मिथिला लेल हम मात्र पुत्र छी : रामबरन

मैलोरंग रचलक इतिहास राष्ट्रपति औउलथि “मलंगिया महोत्सव” मे
नई दिल्‍ली। मलंगिया महोत्सव क तेसर दिन नेपालक राष्ट्राध्यक्ष “श्री रामबरन यादव्” जी कहलैथ जे हम नेपाल लेल भलेंहि प्रथम नागरिक वा राष्ट्रपति होए मुदा अहाँ सबहक बीच हम मिथिलाक संतान छी। मैथिली में बजैत राष्ट्रपति बजलैथि जे मैथिली नाटक क इतिहास बड्ड पुरान अछि, 13वी शताब्दी मे लिखल महान लेखक ज्योतिरीश्वर क लिखल धूर्त-समागम होए वा कोनो आन नाटक मैथिली नाटकक इतिहास राजा मल कए समय स चलैत आबैत अछि। एक दिस जते महामहिम राष्ट्रपति ठेठ मैथिली भाषा मे बाजि क दर्शकक दिल जीत लेलैथि ओतहिं अपन भाषण क नेपाली मे शुरू क कए नेपालक राष्ट्रपति होबाक परिचय देलैथि। अपन अनुभव साझा करैत महामहिम कहलैथि जे हम आ मलंगिया दुनु गोटे ग्रामीण परिवेश स छी जनकपुर मे दुनु गोटे संगे पढ़ने छी। हम डॉक्टरी करैत रही आ मलंगिया जी अध्यापक रहैत। फेर हम आगाँ क पढ़ाई लेल कोलकाता आबि गेलोंउ। कोलकाता मे हमरा पता चलल जे विद्यापति मैथिल अछि। कोलकाता मे विद्यापति क मान सम्मान आ विद्यापती क प्रति कोलकाता क लोकक अनुराग देखि क हम धन्य भेलहुँ आ संगे हमरा गर्व भेल जे हम मिथिलाक छी।

अपन भाषण क क्रम मे राष्ट्रपति कहलैथि जे नेपाल मे मैथिली नाटक पर शोध जरुरी अछि। संगे भारत आ नेपाल दुनु मे मैथिली नाटक क संरक्षण हेबाक चाही। एही क्रम मे राष्ट्रपती नेपालक मैथिली साहित्यकार रामभरोस कापड़ी, रेवती रमण, बलराम राय आदि साहित्यकार क धन्यवाद देलैथि आ हुनकर आभार व्यक्त केलैथि जे ओ नेपाल मे मैथिली क ज़िंदा रखने अछि। महामहिम बाजलैथि जे नेपालक सम्बन्ध गंगा लए के अछि, बुद्ध लए क अछि आ जगतजननी सीता क लए अछि आ दुनु देशक सांस्कृतिक सम्बन्ध बढ प्रगाढ़ अछि आ ई कहियो खत्म नै हेबाक चाही।
भाषानक अंत मे महामहिम कहलैथि जे हमरा गर्व अछि जे हम मिथिला बेल्ट क छी। राष्ट्रपति मलंगिया नाट्य महोत्सव क हृदय स शुभकामना देलैथि संगे मैलोरंग आ सब कलाकार क उतरोत्तर प्रगति क कामना केलैथि। राष्ट्रपति समयाभाव क कारण कर्यक्रमक अंत धरि नै रहि सकलैथि आ पुनः पुनः धन्यवाद दैत विदा लेलैथि।

एही अवसर पर मंच संचालन क जिम्मा लेलैथि वरिष्ट साहित्यकार देवशंकर नवीन आ राष्ट्रपति क संबोधित करैत कहलैथि जे अहाँक आगमन हमरा सबहक मनोबल देलैथि अछि। एही अवसर पर मलंगिया जी सेहो राष्ट्रपति क संबोधित करैत कहलैथि जे अहाँ मैथिली क चूड़ामणि छथि, आ दुनु देशक संबंध राम आ सीता क अछि जेकरा कियो कहियो नै बाँटि सकत। अहाँ मिथिलाक गौरव छी आ पाहून क रूप मे एता आबि क अहाँ हमर सबहक मान बढेने छी।
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