मैथिली कए साहित्यकारक परिधि स मुक्त करू : विनोद


मधुबनी। साहित्य अकादमी आ ‘साहित्यिकीÓ क संयुक्त तत्वावधान मे सरिसवपाही मे आयोजित तंत्रनाथ झा आ सुभद्र झा जन्म शतवार्षिकी क दू दिवसीय समारोह क उद्घाटन पं. गोविन्द झा दीप प्रज्जवलित करि केलाह। पंडित चन्द्रनाथ मिश्र अमर क अध्यक्षता आ साहित्य अकादमी क उप सचिव विजेन्द्र त्रिपाठी आ संयोजक विद्यानाथ झा विदित क निर्देशन मे भेल संगोष्ठी मे विशिष्ट अतिथि विधायक विनोद नारायण झा कहला जे भाषा आ संस्कृति स समाज समृद्ध होइत अछि। मैथिली भाषा कए साहित्यकार क परिधि स हटा कए आमजन मे स्थापित करबाक जरूरत अछि। चन्द्रनाथ मिश्र अमर कहला जे प्राथमिक विद्यालय मे मैथिली क पढ़ाई हेबाक चाही। लखनऊ स आयल डॉ उमा रमण झा दूनू विभूति कए मनीषि बतेलथि।
साहित्य अकादमी क उप सचिव सह समकालीन भारतीय साहित्य पत्रिका क संपादक ब्रजेन्द्र त्रिपाठी कहला जे मैथिली भाषा क मधुरता आ वैषायिक सारगर्भिता एकर महत्ता कए राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेलक अछि। मैथिली साहित्यकार तंत्रनाथ झा आ सुभद्र झा एकरा समृद्ध आ सुदृढ़ भाषा बनेलथि। साहित्य अकादमी क संयोजक विद्यानाथ झा विदित मैथिली भाषी क राष्ट्रीय स्तर पर 1.74 करोड़ आबादी सूचीबद्ध हेबाक सूचना देलथि संगहि ओ आगामी जनगणना मे अपन मातृभाषा मैथिली लिखेबाक अनुरोध केलथि।
एहि अवसर पर कुल सातटा पुस्तकक लोकार्पण सेहो भेल। विद्यापति क पुरुष परीक्षा क नाट्य रुपानंतर डॉ योगानंद सुधीर क पुस्तक क संग बुचरू पासवान क काव्य संकलन नवल विहान भउ रहलै, महेन्द्र नारायण राम क भाऊ भगैत गहबर ग्रामीण गीत संग्रह, विद्यानाथ झा विदित क कर्पूरिया, मैथिली उपन्यास मैथिली मे ब्रेल लिपि क किताब आ बुद्धिधारी रमाकर पर फूलचन्द्र झा आ सुधाकर झा शास्त्री पर देवेन्द्र झा क पुस्तक शामिल अछि।

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