मिथिला स दूर भेल परदेशी पाहुन

सदूर इलाका मे देखल गेल चिडिया, मुदा शहरक पोखरि तकैत रहल बाट
दरभंगा ।
एशियाक सबस पैघ आद्रभूमि (वेटलैंड) मिथिला मे अछि जाहि ठाम करीब 250 प्रजातिक चिडिया सब साल दिसंबर मे सदूर देश स अबैत रहल अछि, मुदा पांच जिला मे पसरल एहि आद्रभूमि मे लगातार परदेशी पाहुनक संख्या कम भेल जा रहल अछि। बेगूसराय और सहरसा जिले की सीमा से सटे इलाके सहित दरभंगा जिले के बिरौल, गौराबडाम, कुशेश्वार स्थािन आदि जगह पर किछु चिडिया देखा रहल अछि मुदा एहन पहिल बेर भेल अछि जे दरभंगा शहर मे कोनो चिडिया अपन सराय नहि बनेलक अछि। शहरक जाहि पोखरि मे विदेशी चिडियाक झुंड किछु साल पहिने तक सितंबर क बाद देखा जाइत छल, ओहि पोखरि मे जनवरी आधा बीत गेलाक बावजूद कोनो हलचल नहि अछि। ज्ञात हुए जे सब साल जार मे साइबेरिया आ यूरोप क अन्यव इलाका स चिडिया मिथिला मे अबैत अछि आ गर्मी शुरू भेला पर लौट जाइत अछि। दिघोंच, लालसर, गरूर, नकटा, चाहा, आघानी, रतवा, रतवा, हरियाल, गैवर समेत करीब 250 प्रजातिक विदेशी पाहुन चिडिया एहि इलाका मे देखा जाइत छल। मुदा एहि साल दूर दराज क इलाका मे किछु प्रजाति देखा रहल अछि, मुदा शहरी इलाका क पोखरि त अपन पाहुनक बाट ताकि रहल अछि, जे पोखरि एहि मास मे चिडियाक आवाज स गुंजित रहैत छल ओ वीरान आ सुनसान बनल अछि। बेला पैलेस क पोखरि स ल कए मिर्जा खां पोखरि तक कोनो पोखरि मे एहि साल कोनो विदेशी पाहुन नहि देखायल। सवाल अछि विदेशी पाहुन आखिर बाट किया बदलि लेलथि। जलवायु परिवर्तन कारण अछि अथवा एकर पाछु कोनो स्थाबनीय कारण अछि, इ बुझबा मे जानकार सेहो राति दिन एक केने छथि। एखन एहि संबंध मे विशेषज्ञ सेहो एक राय पर नहि पहुंच सकलाह अछि। किछु एकर पाछु जलवायु परिवर्तन आ खास क अफगानिस्ता न कए जिम्मेपदार बता रहल छथि ओतहि किछु लोकक कहब अछि जे मिथिला मे आब ओहन प्राकृतिक छटा नहि बांचल। दरभंगा मे प्राकृति क संसाधन संग भेल छेडछाड क बाद पाहुन लेल बाट बदलब कोनो आश्चकर्य क गप नहि। ओना एकटा पक्ष एकर पाछु एहि इलाका मे बढि रहल गैर कानूनी शिकार कए सेहो कारण बता रहल छथि, मुदा शहरी इलाका मे शिकार कोनो कारण नहि भ सकैत अछि किया त एहन कार्रवाई सदूर इलाका मे होइत अछि। जानकार क कहब अछि जे स्तअनधारी जीव कए भोजन स गर्मी भेटैत अछि आ सदूर देश स मिथिला पहुंचबा मे बाट बाट पर भोजन क अनुपलब्धनता एकर सबहक बाट रोकि रहल अछि। अफगानिस्ताटन क वायुमंडल मे बढैत प्रदूषण एकर एकटा पैघ कारण मानल जा रहल अछि। मुदा 1994 स एहि इलाका कए पक्षीविहार घोषित करबा लेल प्रयासरत पर्यावरणरक्षक श्री विजय कुमार झाक कहब अछि जे एकर पाछु शुद्ध रूप स स्था्नीय कारण अछि। मिथिला मे वेटलैंड चिडिया लेल असुरक्षित भेल जा रहल अछि। ओ कहला जे चिडिया क नजरि बहुत दूर तक देखैत अछि ओकरा दूर स बुझबा मे आबि जाइत अछि जे कोन जगह ओकर सराय लेल उचित अछि। दरभंगाक पोखरिक प्रदूषण एहन अछि जाहि मे कोनो चिडिया क वास असंभव अछि, तहिना सदूर इलाका मे सेहो आब ओ शांति क वातावरण नहि रहल, जे एहि चिडिया सब कए चाही, एहन मे अगर ओ बाट बदलि रहल अछि त इ अपना सब लेल चिंता क विषय अछि। चिडिया पर शोध क रहल वंदना क कहब अछि जे सदूर देश स मिथिला तक पहुंच रहल चिडिया लेल मोबाइल टावर एकटा बाट भ्रमित करनिहार बटोही जेकां अछि। इ चिडिया सब एक मकान क बगल मे दोसर मकान बनला स सेहो भ्रमित भ जाइत अछि एहन मे मोबाइल टावर चिडिया कए बाट बिसरा दैल अछि। दोसर दिस बहुत चिडिया मोबाइल टावर स निकलल तरंग स सेहो प्रभावित होइत छथि। मोबाइल तरंग क कारण ओ अपन टोली स अधिकतर अलग भ जाइत छथि, ताहि लेल एहन इलाका मे ओ एबा स परहेज करैत दथि जाहि इलाका मे मोबाइल टावर रहैत अछि। कुल मिला कए अपन पाहुनक सत्का र लेल नामी मिथिला आइ पाहुनक बाट ताकि रहल अछि। मिथिला क लोक कए एहि दिस ध्यामन देबाक चाही जे पाहुन लेल अगर दलान आ आंगन उचित रूप स सुसज्जित नहि रहत त पाहुन बैसताह कौन ठाम आ हुनक सत्कािर होएत कोना।
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