मिथिला क देन छी मध्य काल क नव्य न्याय क भाषा : झा

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संविधानसभा क सदस्‍य आ राज्‍यसभा क पूर्व सदस्‍य डा कामेश्‍वर सिंह क फोटो पर माल्‍यार्पण करैत दरभंगा क नगर विधायक संजय सरावगी।
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दरभंगा : पूणे संस्कृत शोध संस्थान क पूर्व निदेशक प्रो. वीएन झा कहला अछि जे मध्य काल मे ज्ञान कए सबटा क्षेत्र मे नव्य न्याय क भाषा कए अपनाउल गेल, जे पूर्णत: मिथिला क देन अछि। श्री झा इ गप महाराजाधिराज कामेश्‍वर सिंह स्मारक व्याख्यानमाला 2012 क तहत विश्व क बहुभाषायी प्रतिमान, न्याय दर्शन क विश्व दृष्टि पर व्याख्यान दैत कहला। बुधदिन महाराजा कामेश्‍वर सिंह क 106 म जयंती पर अवसर पर महाराजा कामेश्वर सिंह फाउंडेशन क तत्वावधान मे आयोजित समारोह मे प्रो. झा कहला जे आदर्शवादी क अनुसार भाषा मिथ्या अछि, जखनकि यथार्थवादी क अनुसार भाषा क माध्यम स सत्य कए बुझल जा सकैत अछि। भारतीय दर्शन मे सत्य क अन्वेषण क प्रतिमान क विकास होइत गेल। यथार्थवादी क अलग सिद्धांत विकसित भेल ओतहि भारतीय दार्शनिक क अलग। मध्य काल मे ज्ञान कए सबटा क्षेत्र मे नव्य न्याय क भाषा कए अपनाउल गेल। इ पूर्णत: मिथिला क देन अछि।
एहि अवसर पर सेनानिवृत पुलिस महानिदेशक डीएन गौतम कहला जे आइ आध्यात्म आ विज्ञान मे एक दोसर क सामना करबाक इच्छ त अछि मुदा सामने कियो नहि आबि रहल अछि। तर्क क तुक मे तालमेल क खोज भ रहल अछि। सूर्य कए प्रकाशमान आ उर्जावान सब कियो मानैत अछि मुदा उपनिषद मे पहिने स सूर्य पर जल क चर्चा अछि आ आइ इ प्रमाणित भ रहल अछि। प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी वर्मा मिथिला क समृद्ध विरासत क चर्चा करैत कहला जे डा. हेतुकर झा क संचालन मे कामेश्वर सिंह फाउंडेशन एहि विरासत कए भलिभांति बचेबा मे लागल अछि। मिथिलाक्षर क फांट विकसित करनिहार हिमांशु पांडेय कहला जे आब एहि ठामक युवक कए जिम्मेवारी अछि जे मिथिला आ मैथिली कए विकसित करथि। सेवानिवृत आयकर आयुक्त आशुतोष सिंह ठाकुर धन्यवाद ज्ञापन केलथि। एहि अवसर पर हिस्ट्री आफ तिरहुत आ महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह लेक्चरर सीरीज तीन क लोकार्पण सेहो कैल गेल।

महाराजाधिराज कामेश्‍वर सिंह स्मारक व्याख्यानमाला 2012 क किछु अंश
विश्व क बहुभाषायी प्रतिमान, न्याय दर्शन क विश्व दृष्टि

हमर अनुभव क उद्गम क अनेकता क अन्वेषण आवश्यक अछि। कोनो जिज्ञासा क दूटा उत्तर चार संभावना कए जन्म दैत अछि। सत्य क ज्ञान क सिद्धांत क आधार जिज्ञासा कए संपूर्णता स बुझबा पर टिकल अछि। सत्य क ज्ञान अन्वेषण क प्रतिमान क विकास स बहुत हद तक जुडल अछि। आब सवाल अछि जे की सत्य भाषा क माध्यम स बुझल जा सकैत अछि। भारतीय आदर्शवाद आ प्रत्यक्षवाद की अछि। एकर विकास कोना भेल। भारतीय दर्शन क विकास मे गौतम, दिग्नाग आ शंकर क अवदान महत्वपूर्ण अछि। गौतम न्याय दर्शन क नींव रखलथि। दिग्नाग गौतम क सूत्र क परिभाषा बौद्ध दर्शन क तहत प्रस्तुत केलथि। आत्मा आ प्रत्यक्ष क सिद्धांत क प्रति गौतम आ दिग्नाग क सिद्धांत मे बहुत पैघ अंतर अछि। शंकर ब्रह्मा आ आत्मा क अस्तित्व, साहचर्य आ अन्वेषण पर विशेष बल देलाह। आदर्श वादी क अनुसार भाषा मिथ्या अछि। यथार्थ वादी क अनुसार भाषा क माध्यम स सत्य कए बुझल जा सकैत अछि। भारतीय दर्शन मे सत्य क अन्वेषण क प्रतिमान क विकास होइत गेल। यर्थार्थवादी क अलग सिद्धांत विकसित भले ओतहि भारतीय दार्शनिक क अलग। मध्य काल मे ज्ञान कए सबटा क्षेत्र मे नव्य न्याय क भाषा कए अपनाउल गेल। इ पूर्णत: मिथिला क देन अछि।
-प्रो. वीएन झा
पूणे संस्कृत शोध संस्थान क पूर्व निदेशक

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