मिथिलाक क भूमि स लक्ष्‍मी क उत्‍पत्ति


दरभंगाक जाले प्रखंड क कुम्‍हरौली गाम मे बंजर भूमि स उपजल गहूंम
विजय कुमार
दरभंगा ।
बिहार मे हरित क्रांति क गप आमतौर पर दक्षिण बिहार मे भ रहल अछि, मुदा उत्‍तर बिहार खास कए मिथिला क्षेत्र मे सेहो दोसर हरित क्रांतिक सुगबुगाहट देखल जा सकैत अछि। एहि क्रम मे दरभंगाक जिलाक कुम्‍हरौली गाम आदर्श कहल जा सकैत अछि। एहि ठामक वशी अहमद आ हुनकर भाई सब मिल कए एहन काज केलथि अछि जे किछु साल पहिने तक असंभव बुझाइत छल। एहि गाम मे लगभग 80 बीघा जमीन बंजर छल। एहि जमीन पर कहियो हल या खुरपी तक नहि चलैत छल। एहन बंजर जमीन कए इ भाई सब मिल कए खेती लेल केवल तैयार नहि केलथि बल्कि एहि जमीन स एहि साल 20 लाख टकाक गहूंम उपजा एकटा चमत्‍कार करि देलथि। ओना इ चमत्‍कार करबा मे हिनका लोकनि कए लगभग दस साल लागि गेल, मुदा हिनकर मेहनत रंग अनलक आ सदूर गाम तक एहि भाई लोकनिक चर्चा भ रहल अछि।
बिहार मे कोनो काज पाथर पर घास रोपब होइत अछि, एहन मे जिला मुख्‍यालय स 45 किमी दूर स्थित कुम्‍हरौली गाम मे बंजर भूमि स लक्ष्‍मी क उत्‍पत्ति सही मायने मे सही साबित करि देलक जे एहन काज मिथिला मे एखनो संभव अछि। अहमद बंधु राज्‍य मे खेतीक लेल सुविधाक अभाव क कारण बता पलायन करनिहार किसान लेल सेहो मिसाल बनि गेलाह अछि। करीब 60 साल स एहि जमीन पर कोनो फसल नहि उपजि रहल छल। मुदा दस सालक मेहनत क बाद गहूंमक शानदार फसल उपजा इ साबित कैल गेल जे इच्‍छाशक्ति लग कोनो बहाना नहि चलि सकैत अछि।

वशी आ हुनकर भाई लोकनि बली, अली आ शमी 2001 मे धमौल चौर क दस बीघा क अपन बंजर जमीन मे खेती क प्रयोग शुरू केलथि, एहि लेल ओ सबस पहिने बैंक स कर्ज ल एकटा टेक्‍टर कीनलथि। मुदा समय पर ओकर किश्‍त नहि द पाबि रहल छलाह, एकर बाद ओ गाम क जमीनवाला सबहक जमीन लीज पर लेलथि आ ओहि जमीन पर खेती शुरू केलथि। तीन साल बाद बंजर भूमि सेहो खेती लायक बनि गेल आ किछु किछु उपजए लागल। दोसर दिस वशी बंधु कए सरकार 50 हजार टकाक किसान क्रेडिट कार्ड सेहो द देलक। वशी कहैत छथि जे एकर अलावा एखन धरि बीज, खाद या अन्‍य प्रकारक कोनो मदद सरकार दिस स नहि भेटल अछि। मुदा जेना जेना फसल उपजए लागल इ सब जमीनक रकबा बढबैत रहला। एहि साल इ सब कुल 80 बीघा मे खेती केलथि अछि आ 80 किलो प्रति कठठा क दर स 20 लाख टकाक फसल तैयार केलथि अछि। एहि दस सालक दौरान वशी बंधु गाम मे तीन मंजिला मकान बनेलाह आ दूटा टेक्‍टर सेहो कीनलथि अछि।

दरभंगा जिलाक जाले प्रखंड अपन विशाल बंजर चौर लेल ज्ञात छल, मुदा आब बंचर चौर स उपजल फसल एहि प्रखंडक नव परिचय बनि चुकल अछि। बाढग्रस्‍त एहि इलाका मे आबादीक घनत्‍व सेहो बहुत कम अछि आ दूर दूर तक बस्‍ती नहि देखबा मे अबैत अछि। अवधारा समूहक नदी एहि चौर क बीच स जाइत अछि आ बाढग्रस्‍त हेबाक कारण एहि ठाम धानक पैदावार नहि होइत अछि। जिलाक अन्‍य प्रखंडक भांति एहि ठाम सेहो सिंचाई क कोनो साधन मौजूद नहि अछि। एहि कारण स बहुत दिन तक एहि इलाका मे गहूंम उपजेबाक लेल सेहो लोक तैयार नहि छल। मुदा वशी बंधु अपन सोच आ मेहनतक बल पर चौर क बीच स बहैत अभिशाप बनल खिरोई नदी एक वरदान साबित करि देलथि अछि। गरमी मे लगभग सूखा गेल एहि नदी स पंप क मदद स इ सब खेत पटेबाक कोशिश शुरू केलथि जे रंग अनलक। हीनकर मेहनत जखन साकार हुए लागल त आओर लोग एहि दिस आयल आ कुनबा पैघ होइत गेल।

आई सबस पैघ खुशी क गप इ अछि जे गाम क ओ खेतीहर मजदूर जे भूमिहीन हेबाक कारण काजक अभाव मे गाम स पलायन करि पंजाब आ दिल्‍ली जाइत छलाह ओ अपन गाम मे बंजर पडल भूमि पर खेती करबा मे व्‍यस्‍त छथि। आब ओ अपना कए मजदूर नहि किसान कहैत छथि। खेती मे लागल मिसाल बनि चुकल किसान सब कए कहब अछि जे बीज आ खाद क सरकार अगर ठीक स व्‍यवस्‍था करि दिए त इ सब धमौल आ ओकर लगपासक करीब 2200 बीघा बंजर जमीन पर सेहो खेती करबा लेल तैयार छथि। देखबाक चाही एहि क्षेत्रक भाजपा विधायक विजय कुमार मिश्र आ सांसद आजाद जी एहि किसान लेल की करैत छथि, दूनू गोटे भाजपा स छथि आ राज्‍य मे भाजपाक सरकार अछि। जखन कि किसान मे अधिकतर अल्‍पसंख्‍याक आ दलित वर्ग स अबैत छथि। जे चुपचाप राज्‍यक विकास मे अपन बहुमुल्‍य योगदान द रहल छथि। सच पूछल जाए त बिहारक विकास क सबस पैघ कारक इ मजदूर स किसान बनल बिहारी छथि।

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