ममता क नायककेन्द्रित सांस्कृतिक खेल

जगदीश्वर चतुर्वेदी
रेलमंत्री ममता बनर्जी भाषायी सांस्कृतिक संकीर्णतावाद क खतरनाक खेल खेला रहल छथि। इ खेल राष्ट्रीय एकता क लेल खतरनाक साबित भ सकैत अछि। रेल कए राष्ट्रीय एकीकरण क प्रतीक मानल जाइत अछि। ममता बनर्जी रेलमंत्री बनलाक बाद स ओकरा बांग्ला सांस्कृतिक उन्माद आ नायककेन्द्रित सांस्कृतिक फासीवाद क औजार बना देलथि अछि। कोनो राजनैतिक दल ममता बनर्जी क एहि हथकंडा क प्रतिवाद नहि करि रहल अछि, माकपा तक वोट क राजनीति क दबाब मे मुंह बंद केने अछि।
ममता बनर्जी महज वोट पेबा लेल पश्चिम बंगाल मे अनेक स्टेशन क नामकरण नामी-गिरामी लोक क नाम स केलथि अछि। इ हुनकर सांस्कृतिक प्रेम क नहि बल्कि भाषायी उन्माद पैदा करबाक कोशिश अछि।
नायककेन्द्रित सांस्कृतिक फासीवाद क फ्रेमवर्क मे एहि बेरका रेलबजट सेहो रहल, रवीन्द्रनाथ टैगोर आ स्वामी विवेकानंद क नाम स नव गाडी चलेबाक घोषणा भेल।
कानूनक अनुसार कोनो लोकक नाम पर गाडीक नाम नहि राखल जा सकैत अछि। ताहि लेल एकर नाम विवेक आ कविगुरू राखल गेल अछि। मुदा हाल एहने रहल त आगू क दिन मे हम सब जवाहर, राजीव आ प्रियदर्शनी एक्सप्रेस सेहो देखब, किया कि बंगालक बाद ममता कए केवल गांधी परिवार आ गांधी परिवारक संसदीय इलाका टा देखाइत छैन। ममता अपन कार्यकाल मे अनेक नायक क नाम स रेलवे स्टेशन क नाम सेहो रखलथि अछि, मुदा ओहि सूची मे सेहो केवल बंगाल अछि। इ सीधा अंध बांग्ला क्षेत्रवाद आ नायककेन्द्रित सांस्कृतिक फासीवाद अछि, एकरा कोनो हालत मे सांस्कृतिक प्रेम नहि कहल जा सकैत अछि। सांस्कृतिक प्रेम भाषायी अंधत्व स जखन बंहा जाइत अछि त सामाजिक टकराव पैदा करैत अछि आ ममता बनर्जी इ काज करि रहल छथि । इ खतरनाक खेल अछि। एकरा बंद कैल जेबाक चाही।
रेल मंत्रालय इ निर्णय ल सकैत अछि जे नामी-गिरामी सांस्कृतिक हस्ती क नाम स रेलवे स्टेशन क नाम राखल जाए, मुदा इ काज पूरा देश क पैमाना पर हेबाक चाही आ सब भाषा क प्रति समान नजरिए क आधार पर हेबाक चाही। मुदा ममता बनर्जी देश क सबटा भाषा क प्रति समान नजरिया अपनेबाक बजाय रेल अपन अंध क्षेत्रवादी राजनीतिक स्वार्थं क लेल रेलवे कए इस्तेमाल करि रहल छथि। देश मे कतहु नामी सांस्कृतिक हस्ती क नाम पर रेलवे स्टेशन क नामकरण नहि भेल अछि। पश्चिम बंगाल मे सेहो विगत 60 साल मे कहियो नायककेन्द्रित नामकरण नहि भेल मुदा ममता बनर्जी क रेलमंत्री बनलाक बाद बंगाली हस्ती क नाम स पश्चिम बंगाल मे रेल स्टेशन क नामकरण भ रहल अछि, जे एक तरह स गलत परंपरा अछि।
तहिना रेल बजट मे बंगाली क्षेत्रीयतावाद क आलम रहल जे रवीन्द्रनाथ टैगोर आ विवेकानन्द क नाम स नव ट्रेन चलाउल गेल अछि। उल्लेखनीय अछि जे हिन्दीभाषी रेलमंत्री सब कहियो कोनो हिन्दीभाषी पैघ लेखक क नाम स ट्रेन नहि चला सकलाह। एतबा धरि जे जयंती जनताक नाम सेहो वैशाली करि देल गेल किया कि ओ नायककेन्द्रित नामकरण छल। मुदा ममता एहि कानून कए सेहो नजरअंदाज केलथि।
ममता बनर्जी जाहि तर्क स कविगुरू आ विवेका नाम स गाडी देलथि अछि ओहि आधार पर 125म जयंती पर देशरत्न राजेंद्र प्रसाद पर गाडी भ सकैत छल आ 100 साल पूरा भेला पर नार्गाजुन क नाम पर सेहो गाडी भ सकैत छल।
तहिना उत्तमकुमार क नाम स एकटा स्थानीय रेलवे स्टेशन क नाम राखल गेल अछि। ऐना त ओ इलाहाबाद रेलवे स्टेशन क नाम फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन क नाम पर राखि सकैत छलीह। अमिताभ क कद उत्तमकुमार स कोनो मामला मे कम नहि अछि। देशक कोनो स्टेशनक नाम लता दीदीक नाम पर सेहो भ सकैत अछि। उत्तम कुमार बंगाल क महानायक छथि मुदा अमिताभ समूचा देश क फिल्म उद्योग क निर्विवाद महानायक छथि। लता दीदी त भारत रत्न छथि। मुदा एहन नहि भ सकल। असल मे ममता बनर्जी रेलवे स्टेशन क नामकरण नायक क नाम स करिकए नायककेन्द्रित फासिस्ट सांस्कृतिकबोध क प्रचार करि रहल छथि, इ राष्ट्रीय एकता आ लोकतंत्र क बुनियादी स्प्रिट क खिलाफ अछि।
हिन्दी क महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ महिषादल मे जनमल छलाह। ओ अपन जीवन क मूल्यवान कई दशक पश्चिम बंगाल मे गुजारने छथि। मुदा हुनकर नाम पर सेहो गौर नहि कैल गेल। हुनकर जन्मस्थान क लग मे कोनो छोट स हाल्ट क नाम सेहो हुनकर नाम पर नहि अछि। निराला मे रवीन्द्नाथ क अनेक खूबि देखल जा सकैत अछि, बंगाली जाति क सांस्कृतिक सौष्ठव सेहो अछि। ओ हिन्दी क ओहने नायक छथि जेहन बांग्ला क रवीन्द्रनाथ।
राजनीतिक रूप स देखल जाए त पश्चिम बंगाल क राजनीति मे हिन्दीभाषी क 30 स बेसी सीट पर निर्णायक भूमिका अछि, एहि मे बिहार आ उत्तरप्रदेश क मूलक पैघ संख्या अछि। खासकए मैथिलवासी पिछला लोकसभा चुनाव मे तृणमूल कांग्रेस कए जमिकए वोट देने छलथि, जाहि स सुदीप वंद्योपाध्याय कए कोलकाता पूर्व सन सीट जीतबा मे सुविधा भेल। एहन मे मैथिली भाषी क नायक रहल बाबा नागार्जुन क एहि साल जन्मशती वर्ष अछि। बाबा नागार्जुन हिन्दी क आदर्श महानायक सेहो छथि। रेलमंत्री ममता बनर्जी हुनको उपर ध्यान नहि देलथि। बाबा क नाम स कोनो ट्रेन आरंभ नहि कैल गेल। अगर रवीन्द्नाथ क नाम स ट्रेन चलल त बाबा क नाम स किया नहि । बाबा नागार्जुन कए मैथिली आ हिन्दी क नजरूल कहल जाइत अछि। एहन महाकवि क इ शताब्दी वर्ष अछि आ बाबा क नाम स ममता बनर्जी कए देश क कोनो स्टेशन क नामकरण करबाक या ट्रेन चलेबाक इच्छा नहि भेल। सवाल उठैत अछि जे रवीन्द्रनाथ टैगोर आ विवेकानन्द मे एहन की अछि जे सुब्रह्मण्यभारती ,निराला आ नागार्जुन मे नहि अछि। असल गप इ अछि जे रेल क ओट मे ममता बनर्जी नायककेन्द्रित सांस्कृतिक फासीवाद क राजनीति करि रहल छथि, एकर प्रतिवाद हेबाक चाही।

जगदीश्वर चतुर्वेदी कलकत्ता विश्वविद्यालय क हिन्दी विभाग मे प्रोफेसर छथि।

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