भ्रष्‍टाचार पर सुशासन क चोट

कुमुद सिंह
बिहार मे किछु त गप अछि, ओहिना एकरा लोक ‘बिहार’ नहि कहैत अछि। ‘एक बिहारी सौ बीमारी’ कहनिहार सेहो एहि स इनकार नहि करि सकैत छथि जे ‘सौ बीमारीक एक ईलाज’ बिहार मे होइत अछि। समस्‍या त सब ठाम जन्‍म लैत अछि, मुदा ओकर निराकरण बिहार स भेटैत अछि। चाहे समस्‍या सामाजिक हुए बा राजनीतिक। इतिहास गवाह अछि सबटा समस्‍याक निराकरण प्रकट या परोक्ष रूप से बिहार केलक अछि। आई भ्रष्टाचार क खिलाफ राष्ट्रव्यापी गूंज अछि। लोक एकरा स मुक्ति चाहबा लेल की की नहि करि रहल अछि। कियो व्‍यवस्‍था बदलबाक गप करि रहल अछि त कियो कानून बदलबाक नारा लगा रहल अछि। मुदा एहि व्‍यवस्‍था आ स्‍थापित कानून स बिहार एहि मोरचा पर मिसाल कायम करि देलक। बिहार इ साबित कए देलक जे लोकतांत्रिक तरीका स चुनल सरकार आ विधानमंडल स पारित कानून एहि समस्‍या कए मिटेबा लेल काफी अछि। पटना उच्च न्यायालय क आदेश स बिहार सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) क भ्रष्‍ट अधिकारी शिवशंकर वर्मा क तीन मंजिला मकान कए जब्त करि लेलक। दू वर्ष पूर्व बिहार मे लागू भेल विशेष न्यायालय अधिनियम क पहिल कार्रवाई टा नहि छी, इ देश मे सहो पहिल मौका अछि जखन कोनो राज्य सरकार कोनो अफसर क संपत्ति कए एहि अंदाज मे जब्त केलक अछि। अगर केंद्र एहि कानून पर एक साल तक रोक नहि लगा रखने रहिते त इ परिणाम किछु दिन पहिने सामने आबि गेल रहिते। एहि मकान मे आब स्कूल खोलबाक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क सपना पूरा हेबाक रास्ता साफ भ गेल।
निश्चित रूप स इ भ्रष्टाचार क खिलाफ जारी जंग क पहिल सार्थक चरण छी। इ सेहो सत्‍य अछि जे भ्रष्‍टाचार आई मनुष्‍यक स्‍वभाव मे भ्रष्‍टाचार समा चुकल अछि। एहन मे अगर लोभ ओकरा भ्रष्‍ट बना रहल अछि, त डर ओकरा भ्रष्‍ट बनबा स रोकि सकैत अछि। एहि कार्रवाई क बाद आब लोक गड़बड़ी करबा स किछु डरताह। लोभ आ डर मे आब जंग होएत आ कानून जेतबा जल्‍द फैसला देत डर ओतबा बढैत, जीतैत जाएत। एहि एकटा फैसलाक असर आ संदेश समाजक हर तबका कए प्रभावित करत। एहन मकान मे जखन स्कूल खुलत आ ओकर सार्वजनिक उपयोग होएत तखन इ डर लोभ पर बहुत भारी भ जाएत।
लखनऊ मे मोहनलाल गंज तहसील क नगराम थाना क्षेत्र क गरहा गांव क मूल निवासी वर्मा क खिलाफ स्पेशल विजिलेंस यूनिट आय स बेसी संपत्ति अर्जित करबाक (डीए) मुकदमा दर्ज केने अछि। 6 जुलाई, 2007 कए हुनक घर पर पडल छापा मे लॉकर स नौ किलो सोना भेटल छल। आर बहुत किछु भेटल छल। एहि दौरान ओ लघु सिंचाई विभाग क सचिव छलाह। निगरानी क विशेष अदालत स आरोप सिद्ध भेलाक बाद वर्मा हाई कोर्ट मे राहत लेल याचिका दायर केलथि, मुदा कोनो फायदा नहि भेल। एहन नहि अछि जे वर्माक बाद एहन कार्रवाई निकट भविष्‍य मे आर ककरो पर नहि भ सकैत अछि। एहि प्रकारक कार्रवाई तलवार कई गोटा पर लटकि रहल अछि। जाहि मे नारायण मिश्रा, वाईके जायसवाल, रघुवंश कुंवर, सुधीर कुमार, मोतीलाल सिंह, अजय कुमार प्रसाद, रामनरेश सिंह, डीएन चौधरी, संजय सिंह, अनिल कुमार सिन्हा, अखिलेश कुमार शर्मा, नारायण मिश्रा, नंदकिशोर वर्मा, रामाशीष सिंह, विनय कुमार सिंह, डा. मो. जमालुद्दीन, त्रिभुवन राय, मदन प्रसाद श्रीवास्तव, भोला प्रसाद, ओमप्रकाश सिंह, मनोज मानकर, कपिलमुनि राय, गिरीश कुमार, रवींद्र प्रसाद सिंह, विजय कुमार चौरसिया, नागा राम, कालिका प्रसाद सिन्हा, श्रीकांत प्रसाद, सुरेश प्रसाद, वकील प्रसाद यादव, योगेंद्र कुमार सिंह, नरेश पासवान आ अवधेश प्रसाद शामिल छथि। हिनका सब पर आय स बेसी संपत्ति क मुकदमा भ चुकल अछि या ओकर तैयारी चलि रहल अछि। सवाल इ अछि जे बिहार क एहि शुरुआत कए देश ओहिना ग्रहण करत जेना आन निराकरण कए ग्रहण करैत आयल अछि। अगर देशक आन राज्‍य आ खास कए केंद्र मे अगर एहन कानून बनैत अछि त ककरो रामलीला मैदान मे अनशन करबाक जरूरत नहि रहत। लोकपाल जरूरी अछि, मुदा ओ एकमात्र विकल्‍प नहि अछि। इ कार्रवाई कम स कम इ त विश्‍वास दिया देलक अछि।

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