भाषानीति मे सब मातृभाषाक सम्मान कयल जायतः मुख्यमंत्री

जनकपुरधाम । मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत प्रदेशमे बाजल जायवला सब मातृभाषाक सम्मान करबाक हिसाब सँ प्रादेशिक भाषानीति अनबाक बात कहलनि अछि।

भाषा आयोगद्वारा आयोजित भाषा आयोगक संवैधानिक दायित्व तथा प्रदेश एवं स्थानीय सरकारक बहुभाषिक कार्य प्रणाली विषयक संगोष्ठी मे विचार रखैत मुख्यमन्त्री राउत सब भाषाक सम्मान करबाक हिसाब सँ एतय सदन मार्फत भाषानीति अनबाक बात कहलनि। भाषाकेँ अभिव्यक्तिक माध्यम हेबाक दृष्टान्त दैत ओ कहलनि जे सभक भाषाक सम्मान हेबाक चाही। प्रदेशक अधिकांश जनता द्वारा बाजल जायवला भाषा प्रदेशक प्राथमिकतामे रहत ताहि मे कोनो शंका कियो नहि करथि एहि तरहक आग्रह सेहो ओ कयलनि। मातृभाषाक प्रयोगहि सँ हम सब समृद्ध होयब, ओ कहलखिन जे मैथिली तथा भोजपुरी सहित समस्त मातृभाषाक विकास लेल सरकार प्रतिबद्ध अछि।

भाषा आयोगक अध्यक्ष डा. लबदेव अवस्थीक अध्यक्षतामे संपन्न उपरोक्त कार्यक्रममे समाजिक विकास मन्त्री नवल किशोर साह, राजर्षि जनक विश्वविद्यालयक उपकुलपति प्रा. भरत झा, नेपाली काँग्रेस संसदीय दलक नेता राम सरोज यादव, नेकपा नेता राम चन्द्र मण्डल सहित आरो-आरो वक्ता लोकनि अपन-अपन धारणा रखने छलाह।

विदित हो जे डा. लबदेव अवस्थी संघीय नेपाल सरकार द्वारा गठित संवैधानिक भाषा आयोगक अध्यक्ष छथि, हाल २ वर्ष करीब बितलाक बादहु ई आयोग एखन धरि प्रदेशक प्रतिनिधि आ विज्ञजन सदस्यक संख्या (कोरम) पूरा नहि कय सकल अछि। जखन कि कुल ६ वर्षक कार्यकाल लेल गठित एहि आयोग केँ नेपाल मे भाषानीति पर विभिन्न सम्बन्धित पक्ष पर अपन प्रतिवेदन जमा करबाक अछि। हाल धरि पूर्णता नहि पायब एक दिश चिन्ता उत्पन्न करैत अछि तऽ दोसर दिश डा. लबदेव अवस्थी समान विषय-विशेषज्ञ द्वारा राखल गेल विश्वास ई आशा सेहो जगबैत अछि कि निर्धारित समय भीतर आयोग अपन कार्य पूरा कय केँ संघीय सरकार सँ भाषा नीति लागू करबाक काज कय देत। ईहो विदित अछि जे संघीय संविधान मे प्रदेश द्वारा राजकाजक भाषा चयन करबाक अधिकार प्रदेश सरकार केँ देने अछि परञ्च जनगणना मुताबिक जाहि भाषाभाषीक जतेक संख्या छैक ताहि अनुरूपें भाषा चुनल जेबाक धारा संविधान मे स्पष्ट उल्लेख कयल गेल अछि। प्रदेश २ मे सब सँ बेसी संख्या मैथिली, तदोपरान्त भोजपुरी, तथा अन्यान्त भाषाभाषीक संख्या सेहो किछु न किछु तथ्यांक मे स्पष्ट अछि।

समाद साभार –  मैथिली जिन्दाबाद

फोटोः साभार संघीय अनलाइन समाचार

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