बिहार स शुरू होयत कॉमन एजुकेशन सिस्टम : मुचकुंद

बिहार आंदोलन क भूमि रहल अछि। पता नहि किया नहि लागू भेल कॉमन एजुकेशन सिस्टम। कॉमन एजुकेशन सिस्टम क लेल आब जनता कए शुरुआत करय पड़त। -प्रो मुचकुंद दुबे
उज्जवल कुमार

पटना । कॉमन एजुकेशन सिस्टम कमिशन क रिपोर्ट कए लागू करबा मे नीतीश कुमार भले विफल रहलाह, मुदा अबैवाला समय देखत जे एकर शुरुआत बिहार स होयत। बिहार आंदोलन क धरती रहल अछि। महात्मा बुद्ध स लकए महात्मा गांधी आ जेपी सब अपन आंदोलन क शुरआत बिहार स केलथि। इ गप सामान शिक्षा प्रणाली आयोग क अध्यक्ष आ पूर्व विदेश सचिव प्रो मुचकुंद दुबे कहलथि अछि। ओ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन-आइसा द्वारा आयोजित छात्र-शिक्षक कन्वेंशन कए संबोधित करि रहल छलाह।

एखनो लागू अछि जमींदारी प्रथा
कहबा लेल त जमींदारी प्रथा खत्म भ चुकल अछि, मुदा आइ सेहो भारतीय राजनीति एहि स ग्रस्त अछि। प्रोफेसर दुबे कहला जे जमींदार क भूमिका मे आइ राजनेता आबि गेल छथि। पहिने जे काज विदेशी करैत छल ओ आइ एहि देशक किछु नेता करबा मे जुटल छथि। एहि कारण स सामान शिक्षा प्रणाली लागू नहि भ रहल अछि। शिक्षा आ भूमि इ दूनू मे सुधार केने बिना बिहार क कायाकल्प नहि भ सकैत अछि।

नींव नहि पड़ल त, इमारत कोना बनत…
यदि मानव संसाधन क लेल प्राथमिक शिक्षा रूपी नींव नहि पड़त, त विकास रूपी इमारत क कल्पना कोना कैल जा सकैत अछि। दुबे कहला जे आइ बिहार मे 10वीं क बाद 80 फीसदी बच्चा पढ़ाई छोडि़ दैत अछि। एससी आ एसटी क मामला मे त इ आंकड़ा 90 क करीब अछि।
बदलि गेल अछि बेसिक एजुकेशन क दृष्टिïकोण
दूबे कहला जे यूनेस्को क नजरि मे आइ बेसिक एजुकेशन क दृष्टिïकोण बदलि चुकल अछि। एकर अवधि आब 12 साल तक करि देल गेल अछि। कईटा विकसित देश आइ एकरा अनुसार स आगू बढि रहल अछि। आब सबकए 12वीं तक क अनिवार्य शिक्षा देबाक समय आबि गेल अछि।
सुझेने छलहु तमाम विचार
हमर रिपोर्ट मे पहिल बेर ओहि तमाम बिदु क उल्लेख छल, जाहि ओकरा लागू करबा मे सहायता भेटि सकैत छल। दुबे कहला जे हम अपन रिपोर्ट मे सबहक लेल शिक्षा मुहैया करबा लेल 9950 करोड़ टका सालाना बजट क खर्च बतेने रही। एकरा लेल तीन फेज मे शिक्षकक बहाली हेबाक छल। पहिल फेज मे 2.5 लाख, दोसर फेज मे तीन लाख आ तेसरे फेज चारि लाख शिक्षकक बहाली क उल्लेख छल। एकर अलावा 25 हजार प्राथमिक स्कूल, 13 हजार मिडल स्कूल और 15 हजार सेकेंडरी स्कूल क जरूरत सेहो बताउल गेल छल।
झूठे अछि अधिकतर आंकड़ा
राज्य सरकार स्कूल जाइवाला बच्चा क जे डाटा पेश करैत अछि ओ सच्चाई स कोसो दूर अछि। आंकड़ा क खेल स लोक परिचित भ चुकल छथि। स्कूल क लेल इनरोल्ड भेल बच्चा मे स आधा बाद मे स्कूल जेनाई बंद करि दैत अछि। एंट्री क लेवल पर गलत डाटा पेश कैल जाइत अछि। एहि कन्वेंशन मे रजि अहमद कहला जे आजाद हिंदुस्तान मे सबस बेसी अन्याय शिक्षा विभाग क संग भेल अछि। पहिने मास्टर साहब कहैत छलाह जे पढि़-लिख कए बढिय़ा इंसान बनब आइ कहैत छथि जे बड़ आदमी बनब।

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