बिहार मे आसान भेल उद्योग क लेल पर्यावरण क एनओसी

पटना। उद्योग क स्थापना क लेल पर्यावरणीय प्रभाव संबंधि अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेब आब आसान भ गेल अछि। एकरा लेल आब केन्द्र सरकार क मुंह नहि देखबाक जरूरत। एहि स संबंधित प्रदेश क प्राधिकार (राज्य पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण)  अनुमति प्रदान करि देत।
उप मुख्यमंत्री सह पर्यावरण आ वन विभाग क प्रभारी मंत्री सुशील कुमार मोदी कहला जे राज्य सरकार क अनुशंसा पर भारत सरकार राज्य पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकार क गठन संबंधी अधिसूचना जारी करि देलक अछि। ओ कहला जे एहि प्राधिकरण क गठन स राज्य मे औद्योगिक विकास क प्रक्रिया मे तेजी आउत। पहिने उद्योग क स्थापना क लेल पर्यावरणीय प्रभाव विषयक अनापत्ति प्रमाण पत्र केन्द्र सरकार स प्राप्त करै  पडै़त छल। मुदा आब मानवीय स्वास्थ्य आ प्राकृतिक संसाधन क दृष्टि स विशिष्ट आ संवेदनशील परियोजना कए छोड़ि अधिकतर मामला मे राज्य सरकार  प्राधिकरण क अनुशंसा पर एनओसी जारी करि सकत।
पर्यावरण आ वन मंत्रालय द्वारा प्राधिकरण क संबंध मे जारी अधिसूचना क अनुसार पटना विश्वविद्यालय मे जंतु विज्ञान क प्रो.रमेश चंद्र सिन्हा कए प्राधिकरण क अध्यक्ष बनाउल गेल अछि जखनकि एहि विश्वविद्यालय क प्रो.रवीन्द्र कुमार सिन्हा कए सदस्य आ राज्य क पर्यावरण आ वन विभाग क परामर्शी कए सदस्य सचिव बनाउल गेल अछि।
प्राधिकरण क अधीन विशेषज्ञ आकलन समिति सेहो रहत। राज्य सरकार क अनुशंसा पर केन्द्र एहि समिति क गठन करि देलक अछि। विशेषज्ञ समिति चेयरमैन तिलकामांझी भागलपुर विवि क वनस्पति विज्ञान विभाग क डा. सुनील कुमार चौधरी कए बनाउल गेल अछि। समिति मे मगध विवि क डा. अशोक कुमार घोष सीताराम सिंह, सहदेव झा, महेश प्रसाद भगत, डा. राकेश कुमार सिंह आ नरेन्द्र कुमार (एनआईटी पटना) कए सदस्य बनाउल गेल अछि। प्राधिकरण आ विशेषज्ञ आकलन समिति क अध्यक्ष आ सदस्य क कार्यकाल तीन साल क होएत। विशेषज्ञ समिति हर मामला क पड़ताल करि प्राधिकरण कए अपन अनुशंसा द सकत। उप मुख्यमंत्री प्रधान सचिव वन कए निर्देश देलथि अछि जे प्राधिकरण आ समिति प्रभावी ढंग स काज करि सकए एकरा लेल जल्द आधारभूत सुविधा मुहैया कराउल जाए।

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