बिहार कए देखि कए दुख होइत छल

नीतीश सरकार कए सत्ता मे एलाक बाद स इ चर्चा रहल जे बिहार मे बंद चीनी मिल खुलत। बिहार मे अगिला साल चुनाव अछि आ एखन धरि एकोटा मिल चालू नहि भ सकल अछि। मुदा प्रवासी बिहारीक दिल्ली स्थित कंपनी तिरहुत इंडस्ट्री लि. घोषणा केलक अछि जे ओ रैयाम चीनी मिल कए शिलान्यास दिसंबर मे करत आ 2011 मे ओहि मिल स चीनी उत्पादन शुरू भ जाइत। चीनीक संग-संग बिजली आ एग्रो इंडस्ट्रीक विकास सेहो होयत। विजन-2015 पर तिरहुत इंडस्ट्री लि. क निदेशक एएन झा स समाद लेल विस्तार स गप केलथि अछि वरिष्ठ पत्रकार विनीत झा ‘उत्पल’। प्रस्तुत अछि साक्षात्कारक पहिल कड़ी
बिहार मे उद्योग लगेबाक पाछु कोनो विशेष कारण
यउ, सच कहल जाए त हमरा बिहार लौटबाक पाछु दू गोटे छथि। अशोक यादव आ हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’। ई दूनू गोटे 35-38 सालक हेताह आ ओइ इलाका क विधायक छथि। दूनू गोटेक जिद स हम इ फैसला लेबा लेल तैयार भेलहुं।
हिनका स संपर्क कोना भेल
हिनका सब स संपर्क भेल प्रदीप चौधरीक माध्यम स। प्रदीप जी चार्टर एकाउंटेंट छथि आ एहि कंपनी मे हमर भागीदार सेहो छथि।
प्रवासी मैथिल हेबाक बावजूद मिथिला स एहन जुड़ाव क कारण
देखू, ओना त हमर दादा डॉ सर गंगानाथ झा 1880-90 मे मिथिला स पलायन करि गेलाह। हमर सबहक ओहि ठाम(सरिसव-पाही) कोनो संपत्ति नहि अछि। हमर पिताक आदित्यनाथ झाक जन्म इलाहाबाद मे भेलनि आ हमर लखनऊ मे। हमर शुरुआती पढ़ाई उत्तरप्रदेश आ कॉलेज दिल्लीक सेंट स्टेफन मे भेल। एकर बावजूद हम सब मिथिला स जुड़ल रहलहु तेकर पाछु दू-तीन टा कारण रहल। पहिल त हमर दादा आ पिता दूनू गोटेक साफ निर्देश छल जे घर मे मैथिली बाजल जाए। हमर संतानो आइ एकर पालन करैत अछि। दोसर जे हमर सासुर राघोपुर(सकरी) अछि आ जखन धरि ससुर छलाह, साल मे एक बेर जाइते छलहुं।
एहि प्रोजेक्ट क नींव कोना पड़ल
पिछला साल फरवरी मे ओ हमरा फोन केलथि आ कहलथि जे एक घंटा समय चाही। ओ हमरा बिहार भवन ल गेलथि। ओहि ठाम अशोक यादव आ हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’ स परिचय भेल। अशोक यादव हमरा स चीनी मिलक संबंध मे गप शुरू केलथि। कहलथि जे सकरी चीनी मिल कोना शुरू भ सकैत अछि। हमर जबाव छल, असंभव अछि। 32 एकड़ मे त आइ मिलक संबंध मे सोचले नहि जा सकैत अछि। विश्व बैंक सेहो कहैत अछि जे 3500 टीएमटी स कम उत्पादन वाला संयंत्र घाटाक सौदा अछि। जखन कि सकरी मात्र 900 टीएमटी क्षमतावाला मिल छल। लेकिन ओ आग्रह करैत रहलाह, तखन बीच मे हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’ कहलथि जे अगर रैयाम सेहो भ जाए। हमर सवाल छल, एहि मे अहांक की स्वार्थ आ हमरा स की चाहैत छी। अशोक यादव साफ कहलथि जे हुनकर सबहक स्वार्थ एतबा जे मिल चालू भ जाए। अशोक यादवक कहब छल जे अगर मिल चालू भ जाइत अछि त हुनकर सबहक राजनीतिक भविष्य सुरक्षित भ जाइत। हमरा अशोक यादवक गप मे दम लागल आ हम हुनका लोकनि स मिलक संबंध मे रिपोर्ट देबा लेल कहल। मुदा अशोक यादव रिपोर्ट संगहि रखने छलाह। रिपोर्ट देखलाक बाद हमर कहब छल जे रैयाम, सकरी आ लोहट मिला कए एकटा चीनी मिल भ सकैत अछि। अशोक यादव कहलथि जे लोहट त बिका गेल। तखन त रैयाम मे मील लगाउल जा सकैत अछि। ओहि ठाम ओतबा जमीन अछि जे 500 टीएमटी क्षमताक संयंत्र लगा सकैत छी। मुदा सवाल अछि जे मात्र चीनी मिल खोलब ओहि इलाका मे आसान नहि होयत। चीनी मिल तखने चलि सकैत अछि जखन ओकर संग-संग एग्रो इंडस्ट्री कए सेहो स्थापना कैल जाए। हमर इ गप हरिभूषण ठाकुर ‘बचौल’ दिमाग मे नहि गेल, मुदा अशोक यादव बुझला आ ओ हमर संपर्क मे रहलाह।
त अहां उद्योग लगेबा लेल तैयार छलहुं
नहि। ता धरि हम एकटा सलाहकारक भूमिका मे रही। मुदा एक दिन अशोक यादवक फोन आयल। ओ कहलथि जे रैयाम आ सकरी दूनू मिल खरीद सकैत छी, मुदा हमरा आबैय पड़त। हम मना करि देलहुं। मुदा ओ जिद पर छलाह। प्रदीप चौधरी सेहो कहलथि जे यदि अहां चलब त हमहू चलब। दूनू गोटेक आग्रह देखलाक बाद हमर कहब छल जे हमर उम्र आ क्षमता दूनू एहि काज लेल तैयार नहि अछि। एहि योजना कए पूरा होइत-होइत 20 साल तक लागि सकैत अछि। एहन मे हमरा अपन पुत्र स गप करय पड़त। जे एखन लंदन मे इंजीनियरिंग मे व्यापार प्रबंधनक पढ़ाई करि रहल छथि। 24 सालक हमर पुत्र अगर तैयार हेताह, त हम एहि मे हाथ देब। किया कि हम कोनो काज आधा मन आ आधा क्षमता स नहि करैत छी।
पुत्रक केहन प्रतिक्रिया रहल
हम जखन हुनका फोन केलहु त ओ एकरा लेल तैयार त छलाह। ओ कहलथि जे हमर मदद लेल ओ भारत लौट सकैत छथि। हुनकर उत्साह देखि हम एहि योजना मे हाथ देलहुं।
अहांक बिहार जेबाक फैसला माहौल बदलबाक सबूत अछि
पता नहि, मुदा बिहार बदलल बा बदलत स बेसी गंभीर मसला इ अछि जे बिहार कए बदलय पड़त। खास कए मिथिला। इ क्षेत्र एतबा नीचा चल गेल अछि जे ओहि स नीचा आब नहि जा सकैत अछि। तीन साल पहिने धरि हम नियमित सासुर जाइत छलहुं। ओहि ठाम लोक स खास कए 12-14 सालक बच्चा तक क लक्ष्य मात्र छल ठेकेदारी। कोनाओ एकटा पुलिया तक कए ठेकेदारी भेटि जाए त गाम मे पक्का मकान त बनिए जाइत। एहन भविष्य देख दुख होइत छल।
निराकरणक प्रयास आब किया
नहि, 1972 मे हमर पिताक निधनक बाद हम अधिकतर दिल्ली मे रही। ओहि समय मे हमर मधुबनीक पूर्व सांसद भोगेंद्र झा स नीक संबंध छल। एकर पाछु सेहो मिथिला आ मैथिली छल। किया कि ओ राजनीति मे छलाह आ हम कारोबार जगत मे। दूनूक कोनो मेल नहि छल। भोगेंद्रजी मिथिला कए ल कए काफी चिंतित रहैत छलाह। ओ सब एकटा अखिल भारतीय मिथिला संघ गठित केने छलाह। हमर इच्छा छल जे दिल्ली मे रहनिहार सबटा मैथिल कए एकटा मंच पर आनल जाए, मुदा एहि काज मे हम असफल भेलहुं। एहि दौरान हम अपन संपर्क स अखिल भारतीय मिथिला संघ करीब 2.5 लाख टकाक दान एहि शर्त पर दिया देलहुं जे एहि टका कए बैंक मे राखल जाए आ ओकर सूदक पाई स (जे ओहि समय मे करीब 30 हजारक करीब छल) छात्रवृति प्रदान कैल जाए। योजनाक अनुसार रकमक 60 फीसदी हिस्सा ओहन मैथिल भाषी छात्रा कए देल जाए जे 12वीं मे सबस बेसी अंक अनलक अछि। तहिना बचल 40 फीसदी सबस बेसी अंग अननिहार मैथिलभाषी छात्र कए दैल जाए। एकरा लेल कोनो स्थान या जातिक बंधन नहि राखल गेल छल। मुदा ओहि दिन बड़ धक्का लागल जहिया पता चलल जे ओहि टका स इ सब कोनो अनधिकृत जमीन खरीद लेलथि अछि। ओकर बाद हम हुनका लोकनिक संपर्क मे नहि छी। आब त भोगेंद्र बाबू सेहो एहि दुनिया मे नहि छथि।
फेर ओहन धोखाक डर नहि
इ कहबा मे हमरा कोनो रोच नहि अछि जे अपन सबहक समाज मे एकटा अजब प्रवृति अछि। यदि ककरो ऊपर जाइत देख लेलक त टांग खिचबा लेल तैयार भ जाइत। एहन मे कोनो काज शुरू करब कठिन जरूर अछि।
त मिल कतय लागत
मिल रैयाम मे लागत। मुदा जाहि ठाम मिल अछि ओ जगह मिल लेल ठीक नहि अछि। नवका मिल ओहि ठाम लागत जतय आवासीय परिसर अछि।
आ सकरी मे
सकरी मे सामन राखल जाइत। किछु आओर काज होयत।
मिल लगबा मे देरी किया भ रहल अछि
हां, किछु देरी भेल, जेकर कारण रहल जे हमरा लोकनि कए जे मिलक कागज भेटल ओहि मे गलती स 42 एकड़ जमीनक उल्लेख नहि छल। 26 अक्टूबर कए जमीन स संबंधित कागज भेटल अछि। आब मिल लगबाक बाट साफ भ गेल।
त झार-पोछ कहिया स शुरू होयत
अहां झार-पोछ पूछैय छी, अशोक यादव पूछैत छथि शिलान्यास कहिया करब। देखू हमरा लेल इ कोनो मायने नहि रखैत अछि। मिलक पुरनका दीवार तोड़ल जा रहल अछि। शिलान्यास अशोक यादव लेल जरूरी छैन ताहि लेल ओ करय पड़त। आशा करैत छी दिसंबरक दोसर सप्ताह सात बा 12 तारीख कए मिलक शिलान्यास भ सकैत अछि।
आब अहांक पहिल काज की रहत
देखू, हम त तैयार छी, किछु कागजी काज रुकल अछि। जेना सरकार एखन धरि डेडिकेटेड कमांड एरियाक निर्धारण नहि केलक अछि। पहिने त एहि मिल कए दू लाख एकड़ कमांड एरिया छल,लगभग पूरा दरभंगा आ मधुबनी। मुदा हमरा ओतबा नहि भेटत। हमर पहिल काज एकर निर्धारण करा अपन किसान कए कुसियार उपजेबा लेल तैयार करब रहत। किया कि कोनो किसान जे आइ 10 बिघा मे आन फसल करैत अछि ओकरा अगर कहबै जे तो कुसियार कर त पागले कहत। एकरा लेल त पहिने 10 बिघा मे जेतबा ओकरा फलस होइत छैक ओ पांच बिघा मे उपजेबा लेल तकनीक उपलब्ध कराबै पड़त। बाकि बचल पांच बिघा मे ओकरा स कुसियार रोपबा सकैत छी।
त मिल लगबा मे दिन समय लागत
मिल लगेबा लेल तुर्की क एकटा कंपनी कए ठेका देल गेल अछि। ओ 12 स 14 माह मे संयंत्र लगा देत, मुदा सवाल अछि जे पेराई सत्र त आब 2011 क नवंबर मे संभव अछि। ओना किछु स्थानीय कंपनी सेहो संपर्क केने छल ओकर कहब छल जे आठ माह मे संयंत्र चालू करि देब, मुदा सवाल उठैत अछि जे अगर ओ नहि चलल त हमरे माथ पर खसत। ताहि लेल हम सब किछु अंतरराष्टï्रीय स्तर पर करि रहल छी। ताहि लेल विश्वास अछि जे 2011क नवंबर मे चीनी, बिजली, अलकोहल, इथनौल आ एग्रो इंडस्ट्रीक उत्पादन शुरू भ जाइत।
बिहारक नौकरशाही केतक बाधक बनल
देखू, बिहारक नौकरशाही कोनो आन राज्य स अलग नहि अछि। उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी या ओडिशा सब ठामक नौकरशाही एक रंग अछि। हां एहि मामला मे गुजरात किछु अलग अछि। ओहि ठाम नरेंद्र मोदीक राज चलैत अछि। ओ एक मात्र मुख्यमंत्री छथि जे पूरा कमांड अपना लग रखने छथि। सबहक पहुंच हुनका लग अछि। ओ अपन मंत्रिमंडलों मे एहन लोक कए रखने छथि, जिनका नौकरशाह गुमराह नहि करि सकैत अछि।
कहल जाइत अछि जे बिहरक नौकरशाह क सोच बड़ छोट अछि।
एहन बिहारे टा मे नहि अछि। एक बेर देहरादून सचिवालय मे नारायण दत्त तिवारी स भेंट भ गेल। ओ हमर कका(डॉ अमरनाथ झा) क छात्र छथि, ताहि लेल परिचय अछि। गप चलल त मामला शिक्षा पर आयल। कहलथि जे कोना ठीक होयत। हमर कहब छल जे अहांक शिक्षक गाम नहि रहय चाहैत अछि। कोनो बहाना बना ओ देहरादून आबि जाइत अछि। एहन मे किया ने जे शिक्षक ओहि ठाम अछि, तेकरे सब भाषा पढ़ेबाक मौका देल जाए। तिवारी जी कहलथि से कोना होयत। हमर कहब छल इ कम्प्यूटर कहिया काज देत। फेर सवाल उठल, 14000 स्कूल अछि, टका कोना आउत। हमरा ताज्जुब भेल, कहलहुं जे एतबा दिन मुख्यमंत्री रहलाक बावजूद तिवारी जी लेल टकाक समस्या अछि। विश्व बैंक टका ल कए तैयार अछि। एहि काज लेल चीन दू लाख करोड़ टका सब साल लैत अछि, मुदा हमरा लोकनि लग कोनो प्रोजेक्टे नहि अछि। तिवारी जी प्रधान सचिव(शिक्षा) कए तलब केलथि। सचिव महोदय प्रोजेक्ट बनेबा स हाथ उठा लेलथि। हमरा कहल गेल जे अहां प्रोजेक्ट बना दिय। हम 20000 करोड़क प्रोजेक्ट बना तिवारी जी कए द कहल जे एकरा सरकारी कागज पर उतारी विश्व बैंक लग पठा देल जाए। छह माह बीत गेल, एक दिन तिवारी जी भेटलाह, हुनक संग प्रधान सचिव(शिक्षा)सेहो रहथि। तिवारी जी धन्यवाद देलथि जे अहांक बनाउल प्रोजेक्ट स आठ हजार करोड़ टका इ विश्व बैंक स अनलथि अछि। आठ हजार करोड़ सुनि हम चौंक गेलहुं। प्रधान सचिव(शिक्षा) हमरा कात ल गेलथि आ कहलथि जे अहां त 20000 करोड़ लिखी देने रहि। हम ओकरा आठ एहि ल कए केलहुं जे आठ मांगब त पांच भेटत,मुदा आठ मे आठ भेटि गेल। आब कहू जे एहन नौकरशाह रहत त कोन राज्य विकास करत।
आगू अगिला दिन…….

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2 टिप्पणी

  1. AN Jhaji ke Bahut Bahut Dhanyawad je ahi vishay par dhyan delkhin. chini mill khuig gela sa bahuto varg ke klyan hetain.Bahut Bahut Shubha kamana.

  2. बंद चीनी मिल खोलबाक संकल्प बड्ड नीक लागल…ईसमाद कें एहि

    समाद लेल धन्यवाद….

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