बिजलीक समस्‍या आ निदान

बिहार मे बिजलीक समस्‍या ककरो स नुकायल नहि अछि। गरमी बढल जा रहल अछि आ समस्‍याक निदान कतहु नहि देखा रहल अछि। इ व्‍यावहारिक सत्‍य अछि जे राताराति बिहार कए बिजली आवंटन मे बढोतरी नहि भ सकैत्‍ा अछि। एकरा चाहे विपक्ष मुददा बना कए लोक कए सडक पर उतारे या सत्‍ता पक्ष केंद्र पर आरोप लगाबे, दूनू जनैत अछि जे समस्‍याक तत्‍काल निदान कोनो जादू क छडी स संभव अछि जे ककरो लग नहि अछि। एहन मे इ सोचब जरूरी भ गेल जे आखिर कोनो बाट त निकालबाक चाही, एहि संबंध मे जखन जानकार से गप भेल त समस्‍याक निदानक एकटा छोट सन बाट देखा रहल अछि, मुदा आश्‍चर्य जे इ बाट बिजली बोर्ड देखि कए किया अनठियेने अछि, जानकार कहैत छथि जे बिजलीक खपत एहन परिस्थिति मे बढि जाइत अछि जखन काफी घंटाक बाद बिजली अबैत अछि, अगर पांच या दस घंटाक बाद बिजली अबैत अछि त सब एक संग सबटा काज शुरू कए दैत अछि आ लोड एतबा बढि जाइत अछि जे बिजली रहबाक बावजूद सप्‍लाई नहि भ पबैत अछि, एहन मे बोर्ड कए स्‍वीच बढेबाक तत्‍काल जरूरत अछि, जेना एखन 24 घंटा में दू स तीन घंटा बिजली लोक कए भेट रहल अछि, इ बिजली एक मुश्‍त दस स 14 घंटा पर भेट रहल अछि जे बिहारक परिस्थिति मे गलत अछि, इ दू स तीन घंटा बिजली करीब तीन स पांच घंटाक पर आधा या एक घंटा लेल देल जाए त लोग मे बिजली एला पर आपाधापी नहि मचत आ लोड सामान्‍य स किछु बेसी रहत जाहि स करंट जंप ऑवर सेहो नहि करत, मुदा एहि लेल बोर्डक कर्मचारी तैयार नहि छथि जे ओ दू दू घंटा पर जा कए स्‍वीच आन आ आफ करतथि, ओ एतबा काम चोर भ चुकल छथि जे स्‍वीच कए 24 घंटा मे तीन बेर स बेसी छुबा लेल तैयार नहि छथि, आब सवाल उठैत अछि जे लोक कए 24 घंटा में कखनो तीन घंटा सुविधाजनक रहत या हर दू घंटा पर आधा घंटा लेल आयल बिजली उपकार दैत, किया कि आवंटन त तत्‍काल बढबाक कोनो उम्‍मीद नहि अछि, जहां तक एहि समस्‍याक पूर्णत: निराकरणक सवाल अछि त ओ नवीनगर आ बाढ थर्मल चालू भेलाक बाद भ सकत, ताबत 3300 क एवज मे 1400 स काज चलेबाक अछि, ओना एखन बिहार कए केवल 800 मेगावाट भेट रहल अछि।
आब इ सवाल सेहो बेर बेर परेशान कए रहल अछि जे आखिर एहन परिस्थिति केना आओर किया बनल। देखल जाए त इ एकटा पुरान खिस्‍सा जेकां अछि जे लगभग सब कए बुझल अछि। केन्द्रीय ग्रिड क फरक्का, तलचर आओर तिस्ता विद्युत परियोजना मे उत्पादन ठप अछि, उपर स आवंटन पहिने स कम देल गेल अछि। फरक्का क ठप हेबाक कारण पानिक कमी बताउल जा रहल अछि। पानिक कमी किया तेकर कारण अछि जे पानि बंगलादेश कए देल जा रहल अछि। तिस्ता क तीनटा इकाई आ तलचर थर्मल तकनीकी गडबडी क कारण ठप अछि। एहि दूनू ठाम स एक हजार मेगावाट बिजली क उत्पादन होइत अछि जाहि मे स बिहार कए 376 मेगावाट क आपूर्ति कैल जाइत अछि।
बिहार संग केंद्र क व्‍यवहार पर एखन जे राजनीति भ रहल अछि ओकरा सेहो नाजायज नहि ठहरा सकैत छी, देखल जाए त इ गंभीर सवाल अछि जे केंद्र बिहार लेल अलग कानून किया बना रहल अछि। केंद्र क कानून अछि जे कोनो राज्य मे स्थापित केन्द्रीय ग्रिड क बिजली उत्पादन इकाई स राज्य कए 50 प्रतिशत बिजली भेटबाक चाही। एहि कानून क तहत छहटा राज्‍य मे केन्द्रीय ग्रिड क 16 नईटा परियोजना क कुल उत्पादन मे स 50 प्रतिशत बिजली राज्य कए भेटत, जतए उत्पादन इकाई स्थापित अछि मुदा दुर्भाग्यवश या पूर्वाग्रहवश एकर लाभ बिहार मे बाढ़, कहलगांव आओर नवीनगर पर लागू नहि होएत।
कोयला लिंक कए ल कए राज्‍य आ केंद्र मे बयानबाजी होइत रहैत अछि, मुदा देखल जाए त बिहार कए गंगाजल प्रयोग करबा स सेहो रोकल जा रहल अछि। बिजली उत्पादन क क्षेत्र मे भारत बंगलादेश क बीच जलसंधि सेहो बिहारक हित कए बलि चढा कए भेल अछि, किया जे एहि संधि क अनुसार बिहार मे प्रतिकूल मौसम मे सेहो गंगा क न्यूनतम जलस्तर कए बना कए रखबा लेल कहल गेल अछि अर्थात बिहार एहि जल क बिजली उत्पादन क लेल व्यावसायिक इस्तेमाल नहि कए सकैत अछि जखनकि उत्तर प्रदेश आओर पश्चिम बंगाल कए एहि शर्त स मुक्त राखल गेल अछि। इ बुझब कठिन अछि जे गंगा उत्‍तर प्रदेश स अबैत अछि जाहि ठाम इ बंधन नहि अछि आ बंगाल जाइत अछि, ओहू ठाम इ बंधन नहि अछि त फेर बीच मे रहनिहार बिहार कए एहन बंधन क पाछु कोन तर्क देल जा सकैत्‍ा अछि गया है। स्पष्ट अछि जे इ संधि क माध्‍यम स केन्द्र बिहार क हित पर कुठाराघात केने अछि। अगर उत्‍तर प्रदेश क बाद गंगा मे जलक अभाव देखा बिहार कए पानि लेबा स रोकल जाइत अछि त इ बंधन बंगाल पर सेहो लागू हेबाक चाही, मुदा एहन नहि अछि। बांग्‍लादेश कए पानि देबा लेल बिहार कए बिजली देनिहार थर्मल मे उत्‍पादन रोकल जा रहल अछि, जखनकि बिहार मे बिजली लेल हाहाकार मचल अछि। एहि मे कोनो दू राय नहि जे एकटा ओ थर्मल चालू रहलाह स बिहारक बिजलीक समस्‍याक निदान नहि भ रहल अछि मुदा समस्‍या कोना गंभीर स लाइलाज भ चुकल अछि एहि स इ ज्ञान भ जा रहल अछि। बिहार मे बिजलीक समस्‍या लेल कोनो एक टा पहलू कए जिम्‍मेदार नहि कहि सकैत छी मुदा एतबा जरूर जे जनता, नेता, बोर्ड क संग संग एहि मे केंद्र क योगदान सेहो उल्‍लेखनीय अछि।

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