बाढिक भायवहता पर मनुखक चीत्कार अछि ” जल डमरू बाजे”

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esamaad maithili newspaper

सुनील कुमार झा
नई दिल्‍ली। टैगोर इन मैथिली थियेटरक दोसर दिन छल। स्थान रहए एल.टी,जी ऑडिटोरियम, मंडी हाउस, उम्मीदक अनुरूप हाल खचाखच भरल, मैथिलीक जमघट रंगमंचक पैघ लोक स ल कए आम आदमी तक सब मिथिलाक रंग में डूबल छल। तखने मुकेश जी चीत्कार सुनि सबहक रोंगटा ठार भए गेल “गै भुखली” क चीत्कार दर्शक दीर्घा क कुर्सीक हत्था पकडबाक लेल मजबूर क देलक, शानदार आवाज आ शानदार अभिनय, थोपड़ी त जेना रुकय क नामे नहि ल रहल छल। आ फेर शुरू भेल ‘जल डमरू बाजे’, बाढिक विभीषिका पर रामेश्वर’प्रेम’ द्वारा लिखित आ कश्यप कमल आ प्रकाश झा द्वारा अनुवादित एहि नाटकक मंचन प्रकाश झाक निर्देशन मे आर निखैर गेल।
भुखला आ भुखली क रूप मे मुकेश झा आ स्वप्ना मिश्रा अपन अभिनय कए एक बेर फेर लोहा मनेलथि, दुनु गोटे मांजल रंगकर्मी छथि आ हिनकर अभिनय बेजोड़ होइत अछि, डोमा (मुंहचीरा) बनल संतोष जी दर्शककए हंसी आ थोपड़ी दूनू एकहि संग होए लेल मजबूर क देलथि, हिनकर एकटा संवाद ” हम मुसहर छी, तांती स एक खुंट ऊपर आ यादव स दू खुंट नीचा” आजुक जतिवाद पर जबरदस्त व्यंग छल मुदा हिनकर अभिनय क कमाल कहल जाए जे दर्शक अपन हसी आ थोपड़ी दूनू नहि रोकि पाबि रहल छल। फेर मंच पर एक एक कए सबटा मांजल अभिनेता निलेश दीपक, अनिल मिश्रा, नेहा वर्मा आ पुष्पा झा क अभिनय दर्शक क झंकझोरि कए राखि देलक। कुल मिलाकए नीक प्रस्तुति रहल, प्रकाश क निर्देशन आ ध्वनी संयोजन गजब क छल। एहन बुझा रहल छल जे हाल मे आब सहि मे वर्षा शुरू भए जाएत। टैगोर क समर्पित एहि सप्ताह क दोसर दिन बहुत नीक रहल।

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