प्रवासी बिहारी कए मन पड़ल अपन माटी

पटना। दू दिवसीय बिहार प्रवासी कानक्लेव -2009 क आखिरी दिन बिहार क नायक आ परिवर्तन सारथी विषय पर अपन-अपन क्षेत्र क दिग्गज चर्चा केलथि। प्रवासी क उद्गार मे अपन गामक माटी, मातृभाषा आ संस्कृति क प्रति स्नेह देखल गेल। बस गोटे क अभिव्यक्ति मे बिहार क विकास क लेल सामूहिक प्रयास क एकटा ललक छल।
इमेर्जेस ऑफ न्यू मीडिया इन बिहार और इंस्टीट़्यूट बिल्िडग इन बिहार विषय पर कईटा दिग्गज सत्र कए संबोधित केलथि। एहि मे नव मीडिया कए मजबूत करब आ ई-गवर्नेस क सुधार क संग-संग गाम-गाम तक एकरा पसारबाक गप केलथि। वक्ता कहला जे बिहार पर एकटा बीमारू राज्य क टैग लागल अछि, जेकरा उतारबा लेल एकटा सार्थक पहल हेबाक चाही। बिहार क बदलाव मे मीडिया क एकटा अहम रोल अछि। पुरान गप पर कनबाक बजाय हम सब आगू बढि़ आ स्वर्णिम भविष्य क परिकल्पना करि।
आईआईएम क प्रो. मिथिलेश्वर झा कहला जे कोनो चीजक निर्माण मे समय लगैत अछि। आईआईएम क एसोसिएट प्रो. विद्यानंद झा कहजा जे लोक बदलाव कए चिन्हे, बुझे , शिक्षा क स्तर पर बहुत काज एखन बाकी अछि। पुस्तकालय क स्थिति ठीक नहि अछि। ग्लोबल चैलेंज इन बिहार सत्र कए बिहार राज्य किसान आयोग क रामाधार, यूएसए क संदीप साही आ अजय कुमार झा, इंटरनेशनल बिजनेस मैनेजर ऑस्ट्रेलिया क मनोज कुमार सेहो संबोधित केलाह। मनोज कुमार कहला जे हुनका स्वदेश प्रेम एहि ठाम खींच अनलक अछि। बिहार मे आतंकवाद नहि अछि, एहि ठाम किछु आंतरिक समस्या अछि जे सुलझाउल जा सकैत अछि। कानक्लेव मे अरविन्द सिन्हा क फिल्म दूई पाटन के बीच में दिखाउल गेल जाहि मे बाढ़ स तबाह भेल लोकक व्यथा क मार्मिक चित्रण कैल गेल अछि।

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