प्रगतिवादी सोचक प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक आ शिक्षाविद छलाह मुखर्जी

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जीक जन्मदिवसक उपलक्ष मे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब मे संगोष्ठिक सफल आयोजन भेल
रामबाबू सिंह
नयी दिल्ली। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी केर जन्मदिवसक अवसर पर आई दिल्लीक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब मे एकटा संगोष्ठी राखल गेल छल जकर विषय छल ” देशक एकता आ अखण्डताक परिपेक्ष्य मे डॉ मुखर्जीक योगदान”। अहि अवसर पर मन्च संचालक शिवानन्द तिवारी आ संगहि पाँच गोट विशिष्ट वक्ता उपस्थित छलाह। जाहिमे “नीति आयोग”कें सम्मानीय सदस्य विवेक देवरॉय जी, भारतीय जनता पार्टी केर राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन)आ दिल्ली प्रदेश प्रभारी रामलाल जी, भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू जी, विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर सँगहि संस्थाक डायरेक्टर अनिर्वाण गांगुली छलाह। संगोष्ठिक शुरुआत हुनक जीवनी सँग भेल। हुनकर जन्म अजुके दिन 6 जुलाई 1901 कलकत्ता मे भेल रहनि आ 23 जुलाई 1953 जम्मू मे रहस्यमय तरीका सँ हुनकर मृत्यु भ’ गेलनि।
ओ प्रगतिवादी सोचक प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक आ शिक्षाविद छलाह। राष्ट्र के’ सम्मान लेल अपन प्राण न्योछावर करनिहार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पहिने हिन्दु महासभाकें राष्ट्रीय अध्यक्ष फेर ओ आरएसएस केर दोसर सर संघ चालक गुरु जीक सँग संवादकें बाद एकटा नव संस्थाके स्थापना कएलाह ” भारतीय जनसंघ”। देशक आन प्रांत केर अलावा जम्मू कश्मीर पर हिनकर फोकस बेसी रहनि। जम्मू कश्मीर पर हिनकर नारा रहनि जे एक देशमे “दू विधान दू प्रधान आ दू निसान” नहि हेबाक चाहि आ एहिलेल सभसँ पहिने ओ पुरजोर विरोध कएलाह संगहि धारा 370 के’ खिलाप सेहो ओ आवाज बुलंद करैत रहलाह। जाहिमे सँ आब दू निसान रहि गेल आ धारा 370 जे आसा अछि जल्दिए सरकार किछु निस्सन डेग उठओताह। ओना रामलाल जी अहि मुद्दा पर गम्भीर नहि देखल गेलाह। एकटा प्रसंग केर चर्च करैत ओ कहैत छथि जे हमर साथी मित्र धारा 370 हटएबा लेल संसद मे 370 सांसद के’ बात कहैत अछि  जे सम्भव नहि अछि तेँ समय पर छोड़ि देल जाए , जल्दिए किछु निदान भेटत से आस अछि।
जम्मू कश्मीर जएबाक लेल पहिने परमिट होयत छल आ मुखर्जी साहब विना परमिट चलि गेलाह। जम्मू कश्मीरकें तात्कालिक मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्लाह, आ देशक प्रधानमंत्री नेहरू जी छलाह। मुखर्जी साहब के’ कहब छलनि जे अपनहि देशमे परमिट किएक आ अहि कारण सँ हुनका पकरि कS जेलमे राखि देलकन्हि। 23 जून 1953 मे जेल के’ भीतर हुनकर रहस्यमयी तरीका सँ मृत्यु भ’ गेलनि। स्वतन्त्र भारतमे पहिल ओ नेता छलाह जे देशक एकता आ अखण्डताक लेल अपन जान देलक। वैचारिक मतांतर रहितहुँ हुनकर विशिष्ट व्यक्तित्व केर कारण नेहरू जी केंद्रीय उद्योग मंत्री पद देने रहनि जाहिमे बहुत रास नव परिवर्तन अनलाह मुदा नेहरू जी सँग हुनकर मतांतर के’ बाद ओ त्यागपत्र दS देलखिन। आई प्रवुद्ध शिक्षाविद, प्रखर राष्ट्रवादी चिन्तक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी केर संगोष्ठिक माध्यम सँ याद कएल गेलनि। ओहन व्यक्तित्वकें समस्त देशवासी के’ तरफ सँ शत शत नमन।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments