पुरान लक्ष्य लेल नव स्वरूप

ओना त इ अखबार करीब चारि साल स अहां सबहक बीच अछि, मुदा 9 नवंबर एहि अखबार लेल एकटा खास दिन अछि। 9 नवंबर 2009 कए एकर स्वरूप मे बदलाव आयल आ इ डॉट कॉम बनि अहांक सामने अछि। बदलाव एकटा प्रक्रिया छी जे होइत रहे त नीक, एहि लेल समाद नौ नवंबर स इसमाद क नाम स अहां सबक बीच रहत। नाम मे बदलाव दू कारण स जरूरी भ गल छल। एकटा जे तकनीकी कारण स एकर साइटक नाम इसमाद राखल गेल छल ताहि लेल एकर इपेपर सेहो इसमाद रहबाक मांग उठि रहल छल। दोसर जे पिछला चारि साल मे समाद मैथिली समाचारक एकटा एहन ब्रांड बनि गेल जे कई गोटे एकरा अपना संग जोडि लेलथि। चारि साल पहिने जखन मैथिलीक पहिल इपेपर अनबाक निर्णय लेल गेल त सबस बेसी बहस एकर नाम कए ल कए भेल। मैथिली समाचार लेल लोकक मन मे मिथिला मिहिर क एहन छाप छल जे एकटा पैघ समूह ओहि स मिलैत नाम रखबाक जोर दैत रहल, जखन कि दोसर समूहक कहब छल जे नव नाम स नव लक्ष्य पैबा लेल आगू बढबाक चाही। तखन एकर नाम समाद राखल गेल। संयोग एहन भेल जे एक साल बाद कोलकाता स एकटा मैथिली दैनिक सेहो एहि स मिलैत-जुलैत नाम स बाजार मे आयल। पिछला साल मैथिलीक पहिल चैनल सौभाग्य मिथिला पर समाचार रूपक शुरू भेल, ओकर नाम सेहो समाद राखल गेल। पिछला चारि चाल मे मैथिली समाचार स समादक  इ जुडाव मिथिला मिहिरक छाप स मैथिली कए एक प्रकार स अलग करि देलक। आइ तीनू समाद अपन अपन लक्ष्य कए प्राप्त करबा लेल सतत प्रयत्नशील अछि। मुदा एक दोसर स अलग रहबाक कारण कई बेर कई ठाम इ कहबा लेल तैयार रहय पडैत अछि जे ओ समाद नहि इ समाद स हम जुडल छी। एहन मे एकर नाम इसमाद सबस उपयुक्त लागल आ बदलाव क एहि मास मे समाद सेहो अपन नामक आगू इ जोडबाक फैसला लेलक अछि। ओना इसमाद क लक्ष्य मे कोनो बदलाव नहि आयल अछि आ इ एखनो बिहारक विकास लेल जमात तैयार करबाक अपन काज जारी राखत। इसमाद पिछला चारि साल मे बिहारक विकास स जुडल कईटा समाचार आन गोटे स पहिने अहां तक पहुंचेलक। दिसंबर कए इसमाद मे छपलक जे बिहार क विकास दर देश स आगू भ गेल, जखनकि इ समाचार अन्य अखबार मे जनवरी मास मे आयल। तहिना इसमाद रैयाम चीनी मिलक मालिक स साक्षात्कार ल मिथिल मे कारखाना खुलबाक जयघोष केलक। मधेपुरा रेल कारखानाक संबंध मे सेहो जानकारी देबा मे इसमाद आगू रहल। राजनीतिक ज्ञानक दावा कहियो इसमाद नहि केलक मुदा एहि विधानसभा चुनाव मे करीब दू दर्जन महिला जेना राजनीतिक समाद अहां तक पहुंचेलथि, ओ बिहार नहि बल्कि पूरा देश लेल एकटा प्रयोग छल। आइ बस शंकर मिश्रक शब्द मे एतबे कहि सकैत छी-
बालोहं जगदानन्द नमे बाला सरस्वती।
अपूर्ण पंचमे वर्षें वर्णयामि जगत्त्रयं।।

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