पारसमणि नहि छथि नीतीश

लोकतंत्र मे नेता नहि जनताक परीक्षा होइत अछि

आशीष झा

बिहार मे विधानसभाक लेल भेल उपचुनाव एक बेर फेर साबित केलक जे लोकतंत्र मे नेता स महत्वपूर्ण जनता होइत अछि। चुनाव परिणामक कई गोटे समीक्षा केलथि अछि। अधिकतर समीक्षक एकरा नीतीश कुमारक हारि कहलथि, किछु एकरा नीतीश लेल खतराक घंटी कहलथि। राजद आ लोजपा अपन पुनर्जन्म कहलक, त भाजपा मे नीतीश सरकार कए बाहर स समर्थन देबाक मांग हूए लागल। लागल जे लोकसभा चुनाव मे राजग क जे जलवा छल से खत्म भ गेल। लालूक प्रति तामस खत्म भ गेल। लालूक लौटबाक रास्ता साफ भ गेल। नीतीशक विदाई निश्चत भ गेल। कुल मिला कए सब कए लागल जे तीन महीना मे सब किछु बदलि गेल। मुदा जे नहि बदलल तकरा पर कोनो चर्चा नहि भेल। बिहारक जनता एक बेर फेर जीत गेल। ओ नहि हारल छल, नहि हारत। ओकर जीत अटल अछि।
समीक्षक बिहारक चुनाव परिणाम नेताक आधार पर देखैत रहला अछि। ओ मानैत रहला अछि जे नीतीश बिहार कए बदलि रहल छथि। मुदा ओ एहि गप पर ध्यान नहि देला जे इ सबहक पाछु मे जनता अछि। बिहार बदलल तखने नीतीश कए सत्ता भेटल। जनता नीतीश कए बिहार बदलबा लेल सत्ता तक पहुंचेलक। बिहारक लोक जनैत अछि जे नीतीश पारसमणि नहि छथि। ओ राजद आ अन्य विकास विरोधी छविक नेता कए अपन दल मे शामिल करि कए ओकरा विकास दूत नहि बना सकैत छथि। चुनाव परिणाम कहैत अछि जे जनता नीतीशक एहि प्रयास कए स्वीकार नहि केलक।
जनता मानैत अछि जे नीतीश कए पार्टी मे गेला स कोनो नेता अपन 15 वर्षक कलंक नहि धो सकैत अछि। जनता विकासक चोला धारण करि जदयू आ कांग्रेसक टिकट पर चुनाव मैदान मे कूदल ओ सब नेता कए हरा देलक, जे पिछला लगभग दू दशक स बिहार कए गर्त मे पहुंचा देबाक काज केलक। जनताक साफ संकेत अछि जे एहन नेता अगर जदयूक टिकट पर लड़त, त लालू आ पासवान मे कोन खराबी।
नीतीश स गलती बस एतबा भेल जे ओ दू टा भ्रम कए दूर नहि कए सकला। पहिल इ जे ओ इ मानि लेलथि जे हुनकर कारण बिहार बदलल, जखन कि बिहार बदलल,तखने ओ एलथि। दोसर जे ओ इ मानि लेने छलाह जे जनताक याददाश्त बहुत मंद अछि। बिहारक जनता क याददाश्त कए मंद बुझबाक गलती विश्लेषक सेहो केलाह अछि। हम एकरा बिहारक जनताक अपमान मानैत छी।
दरअसल, बिहारक राजनीति एकटा नव बाट पर चलि निकलल अछि। एकरा बुझबा लेल लोकतंत्र आ इतिहासक नव ढंग स विश्लेषण जरूरी अछि। बिहार मे सत्ताक स्तर पर बदलाव क इ परंपरा काफी पुरान अछि। ईसा स 326 साल पहिने सिकंदर जखन आक्रमण केलक त जनता मे तत्कालीन नंद वंशक प्रति घोर असंतोष ओकर जीत मे अदृश्य रूप मे सहायक बनल। आइ धरि इ प्रमाण नहि भेटल जे एकटा सुगठित साम्राज्य महज तीन साल मे कोना नष्टï भ गेल। कोनो खून-खराबा नहि भेल। कोना भेल एहन सत्ता परिवर्तन, के केलक एहन खामोश क्रांति जेकर गंूज ककरो सुनाई नहि देलक। पाटलिपुत्र स कोसो दूर अध्यापनक काज मे लागल विष्णुगुप्त या फेर हुनकर शिष्य चंद्रगुप्त अवश्य एहि लेल अमर भ गेलाह, मुदा एकर असली नायक त मगधक लोक छल जे सिकंदरक आक्रमण कए अपन स्वाभिमान स जोडि़ लेलक। आइ लालू आ पासवान क जीत ओहने अदृश्य सहायताक रूप मे देखल जा रहल अछि। सिकंदर क जीत ओकर जीत नहि छल। सिकंदरक राज बेसी दिन नहि रहल, किएक त ओ जनताक विश्वास नहि जीतलक, मगध जीतब आ मगधक लोक कए जीतब हरदम दू टा वस्तु रहल अछि। हम मध्ययुग कए पाछु छोडि़ आयल छी। एखन लोकतंत्र अछि। मुदा जनताक व्यवहार मे कोनो अंतर नहि आयल अछि। जनता एखनो अपना कए पारसमणि बुझबाक गलती केनिहार नेता कए हरेबा लेल अपन धुर विरोधी कए जीतक तमगा थमेबा स नहि चुकैत अछि।

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5 टिप्पणी

  1. मैंने आज ही मैथिली का ई-समाचार पत्र समाद देखा. बहुत अच्छा लगा. देशज संस्कृति, मिथिला पेंटिग्स, पान खान और मखान के बाद मिथिला सायबर दुनिया में भी अपनी पहचान बना रहा है. सबसे बड़ी बात यह की प्रिंट लाइन के सारे नाम महिलाओं के हैं. सुना है की समदिया नाम से एक अख़बार भी शुरू होने वाला है. समाद और समदिया दोनों की टीम को अशेष शुभकामना.

  2. हम अहांक इ-पेपर देखैत रहित छी. नीक लागैत अछि प्रतिक्रिया जरुर देब.शुभकामना

  3. Neek likhalanhu.
    Neetishken ghamand bhel chhalanhi- ona Khagaria me bhel narsanhar seho hunk mahadalit vot rajneetik upaj achhi.

  4. Really common people did’ t accept Nitish alliance with RJD. Result is before them. In this situation I can put my view that patience is a bitter tree it bt gives sweet fruit. Wrote it very well.

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