पर्यटक बढल, मुदा नहि बढल धरोहर संरक्षणक प्रति जागरूकता

पटना । बिहार सरकार आ बिहार क जनता दूनू एखन बिहारक पर्यटन उद्योग क आंकडा देखि गदगद अछि। सवाल उठैत अछि जे हम अपन तैयारी एहि दिस केहन क रहल छी। विदेशी पाहुनक स्वागत लेल हम केतबा तैयार छी। हम अपन कौन धरोहर हुनकर सामने रखबा लेल बचा कए रहने छी। धरोहर स छेड़छाड़ बिहार मे आम गप अछि। गया, नालंदा, राजगीर आ बिक्रमशीला कए छोडि बहुत किछु आओर अछि बिहार मे। गया आओर नालंदा घुमलाक बाद विदेशी पाहुन लौट जाइत छथि। बाकी समृद्धशाली अतीत क गवाही देनिहार धरोहर क दर्शन लेल कोनो योजना नहि अछि। एहन धरोहरक संरक्षण क जिम्मेदारी कए उठा रहल अछि। सिर्फ सरकार क भरोसे इ नहि भ सकैत अछि। इ बिहारक जनताक जवाबदेही जखन धरि नहि बनत संभव नहि अछि। हम धरोहर कए ओकर मूल स्वरूप मे बना कए राखब तखने विदेशी पाहुन ओकरा देखबा लेल आबि सकैत छथि। धरोहर बचत त पर्यटन उद्योगक विकास होएत आ रोजगारक नव अवसर बनत। एकरा विडम्बना कहल जाए जे उत्तर बिहार मे अंतरराष्ट्रीय फलक पर चर्चित अनेक धरोहर कए हम अपन हाथ स बदरंग करबा मे तुलल छी। खास कए बौद्धकालीन धरोहर। पूर्वी चम्पारण मे केसरिया स्थित बौद्ध स्तूप कए पर्यटक क नजरि लागि रहल अछि। लोक विश्व क सबस ऊंच एहि स्तूप क गुंबद मे लागल ईटा कए क्षति पहुंचा रहल छथि। बौद्धकालीन धरोहर क मामला मे बिहार काफी समृद्ध अछि आ इ विदेशी पाहुन कए आकर्षित करेबाक सबस आसान साधन अछि। दुनिया भरि स एहिठाम सब साल लाखक संख्या मे पर्यटक अबैत छथि। पूर्वी चम्पारण क धरती क गर्भ मे नुकायल केसरिया स्तूप खुदाई क बाद 1998 मे विश्व क पर्यटन मानचित्र पर आयल छल। एहि स पहिने जावा मे 103 फुट ऊंच बोरोबुदुर स्तूप कए सबस ऊंच हेबाक गौरव हासिल छल। केसरिया स्तूप क ऊंचाई 104 फुट अछि। एखन धरि स्तूप क महज चालीस फीसदी हिस्सा क उत्खनन भ सकल अछि। कुल उत्खनन क 70 फीसदी हिस्सा कए त संरक्षित करि देल गेल अछि, मुदा शेष भाग असुरक्षित अछि। मुख्य रूप स गुंबद क ओ संवेदनशील हिस्सा, जेकर कारण स एकरा गौरव भेटल अछि, स्थानीय लोकक उदासीनता़ क शिकार भ रहल अछि। एहि स्तूप क निर्माण गुप्तकाल मे सम्राट अशोक करबेने छलाह। मान्यता अछि जे वैशाली स कुशीनगर जेबा काल भगवान बुद्ध केसरिया मे रुकल छलाह। एहि दौरान ओ अपन शिष्य आनंद कए कहला जे ओ पिछला जन्म मे राजा महादेव क नाम स एहि ठाम राज केने छलाह।
बिहार क गौरव एहि स्तूप कए संवारबा लेल घोषणा त बहुत भेल। प्रोजेक्ट सेहो बनल, मुदा सबटा कोशिश कागज स नीचा नहि उतरि सकल। पुरातत्व विभाग एहि ठाम महज एकटा केयर टेकर क तैनाती करि अपन कर्तव्य क इतिश्री करि लेने अछि। केसरिया एहन असगर जगह नहि अछि उत्तर बिहारक अधिकतर धरोहरक देखभाल मे घोर लापरवाही देखल जा सकैत अछि।
कहबा लेल त बिहार मे पर्यटक क बढैत संख्या स सब खुश छथि मुदा सही गाइड लाइन नहि भेटबाक शिकायत एहि ठाम आब आम भ गेल अछि। जखनकि राजग सरकार आ ओकर मुखिया नीतीश कुमार क एजेंडा एकदम साफ अछि। ओ नालंदा विश्वविद्यालय कए पुनर्जीवन देबा पर ध्यान केंद्रित केने छथि। मुदा आन योजना कए लागू करबा मे पुरातत्व विभाग क संग पर्यटन विभाग क सक्रियता देखबा मे नहि आबि रहल अछि। खासकए, एहन साल मे जखन राजेंद्र बाबू क 125म जयंतीक संगहि बिहार अपन अभ्युदय क 100 साल मे प्रवेश कए रहल अछि। इ हमर सबहक जिम्मेदारी बनैत अछि जे हम अपन धरोहर कए सींचकए राखि, किया जे एकरे बदौलत नवबिहार क इतिहास क गाथा सेहो लिखल जाएत।

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2 टिप्पणी

  1. सही बात , एहि ठाम पुणे मे शनिवार बाड़ा, लाल महल आदि दड़िभंगा राजमहलक तुलना मे किछु नञि पर संरक्षित अछि आ पर्यटन मानचित्र पर अछि , जिर्णोद्धार पर जिर्णोद्धार भऽ रहल अछि ………………………………..पर अपना ओहि ठाम सरकार आ लोकसब दुनु मिलि कऽ महलक एक एक ईंटा छोड़ा रहल छथि ।

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