पडल अछि राशि, सुतल अछि विभाग

पटना। राज्य सरकार योजना व्यय क संकट स जूझि रहल अछि। जनवरी मास तक 24000 करोड़ क योजना आकार क विरुद्ध सिर्फ 60 फीसदी खर्च क उपलब्धि छल। मुदा 40 फीसदी क लक्ष्य दू मास मे प्राप्‍त करब एकटा चुनौति छल। फरवरी बीत गेल आ मार्च क पहिल सप्‍ताह सेहो गुजरि गेल।
जनवरी तक क आंकडा क अनुसार वाणिज्य-कर आओर निबंधन विभाग क खर्च क आंकड़ा शून्य पर अटकल अछि। जखनकि गन्ना विकास 4.82 आ मंत्रिमंडल समन्वय विभाग 8.89 पर सिमटल अछि। एहि विभाग सबहक बहाना सेहो खूब अछि। मंत्री स पदाधिकारी तक कहैत छथि जे योजना राशि खर्च नहि हेबाक पाछु पैघ मजबूरी इ अछि जे करीब 75 फीसदी सेंट्रली टायड फंड अछि। समय पर राशि रिलीज नहि भ सकल। कारण किछु तकनीकी सेहो कहल जा रहल अछि। दोसर दिस डा. भीम सिंह पंचायती राज आ ग्रामीण कार्य दूटा विभाग देख रहल छथि। जनवरी तक ग्रामीण कार्य विभाग 63.71 फीसदी राशि खर्च क लेने छल मुदा पंचायती राज विभाग मे केवल 32 फीसदी राशि खर्च भेल छल। एहि ठाम सेहो मंत्री जी एकरा लेल केन्द्र स राशि एबा मे विलंब कारण बता रहल छथि। हुनकर कहब उचित अछि, दूनू विभाग मे खर्चक अंतर केंद्रांश क कारण देखा रहल अछि। योजना राशि केंद्र स एलाक बाद विभाग स राशि जिला कए आवंटित होइत अछि। पिछला साल बजट उपबंध नहि भेला स पंचायत प्रतिनिधि क मानदेय मे परेशानी रहल। हालांकि भरोस अछि जे लक्ष्य निश्चित हासिल करि लेल जाएत।
संतोष क गप एकटा आओर अछि जे खर्च क आंकडा मे पथ निर्माण, ग्रामीण विकास आ ग्रामीण कार्य सन विभाग 80, 72.08 आओर 63.71 फीसदी खर्च क संग सबस आगू अछि। ओना शहरी विकास क काज देखिनिहार नगर विकास विभाग निराश क देलक अछि। एक मास मे औसत योजना व्यय जेतबा पैघ छलांग लगेलक अछि नगर विकास 11 माह मे नहि लगा सकल अछि। जखन कि शहरी विकास सरकार क एजेंडा मे अछि। मुदा योजना व्यय क नाम पर उपलब्धि ररहल जनवरी तक केवल 16.22 फीसदी। ओना 40 मे 25टा एहन विभाग अछि जे 60 फीसदी क औसत स पाछु चलि रहल अछि।
उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी एहि पूरा मसला कए सुलझेबाक प्रयास करैत कहला अछि जे इ अगर देशक राशि विमुक्ति प्रणाली पर गौर कैल जाए त इ कोनो चिंता क स्थिति नहि अछि। मोदी कहैत छथि जे कहबा लेल त अपन सबहक वित्‍त वर्ष अप्रैल स मार्च होइत अछि, मुदा कोनो प्रदेश मे वित्तीय वर्ष क अंतिम मास मे सबस बेसी खर्च होइत अछि। बिहार मे बाढ़ आओर पाबनि क कारण बीच क अवधि मे कई मास काज बाधित रहैत अछि। दिसम्बर क बाद काज क गति अचानक बढैत अछि। जे मार्च तक लक्ष्‍य क करीब पहुंच जाइत अछि। एकर संगहि केन्द्रीय राशि विलंब स रिलीज भेलाक कारण सेहो राज्यांश विलंब स विमुक्त होइत अछि। प्रारंभिक मास क कमजोर गति क कारण इ सेहो अछि। ओ कहला जे 24 हजार करोड़ क योजना आकार क लक्ष्य कए हासिल करबा मे बिहार सरकार कामयाब होएत।
पडल अछि राशि, सुतल अछि विभाग
वाणिज्य-कर 00 फीसदी
निबंधन एवं उत्पाद 00 फीसदी
गन्ना उद्योग 4.82 फीसदी
मंत्रिमंडल सचिवालय 8.89 फीसदी
नगर विकास 16.22 फीसदी
लघु सिंचाई 20.32 फीसदी
वित्त 21.26 फीसदी
सूचना तकनीक 24.38 फीसदी
आपदा प्रबंधन 26.14 फीसदी
ऊर्जा 31.67 फीसदी
गृह विभाग 32.15 फीसदी
पंचायती राज 32.93 फीसदी
भवन निर्माण-40.25 फीसदी
विज्ञान एवं प्रावैधिकी 42.52 फीसदी
श्रम 40.55 फीसदी
पर्यावरण एवं वन 43.72 फीसदी
सूचना एवं जनसम्पर्क 44.64 फीसदी
जल संसाधन 46.19 फीसदी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण 46.50 फीसदी
विधि विभाग 49.18 फीसदी

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