नेपाल क सामने फेर राजनीतिक गतिरोध

सीतामढी। प्रधानमंत्री झालानाथ खनल क इस्तीफा स नेपाल मे फेर संकट ठार भ गेल अछि। नेपाल क राष्ट्रपति राम बरन यादव राजनीतिक पार्टी सब स आम सहमति क सरकार बनेबा लेल एक सप्‍ताह क समय देलथि अछि, नहि त ओ बहुमत वाला सरकार देश पर थोपबाक धमकी देलथि अछि। खनल रविदिन इस्तीफा देलथि। राष्ट्रपति ओना हुनका स अगिला सरकार बनबा धरि पद पर रहबा लेल कहलथि अछि। यादव कहला जे अगर 21 अगस्त तक आम सहमति ननहि बनल त ओ चुनाव करेबा क अपन संवैधानिक अधिकार क प्रयोग करताह जेकर बाद बहुमत देखी सरकार बनेबाक बाट खुलत।
फरवरी मे प्रधानमंत्री पद ग्रहण करनिहार खनल कहला अछि जे विभिन्न पार्टी दिस स हुनका समर्थन नहि भेटला स स इस्तीफा द रहल छथि किया कि एहि स संविधान क मसौदा तैयार करबाक काज पूरा नहि भ पाबि रहल अछि। संगहि पूर्व माओवादी विद्रोही संग शांति वार्ता सेहो आगू नहि जा रहल अछि। आब देश मे नव चुनाव असगर विकल्‍प देखा रहल अछि मुदा ओकरा लेल नव संविधान जरूरी अछि।
सरकार क सामने 31 अगस्त तक संविधान क मसौदा तैयार करबाक समयसीमा अछि मुदा पूर्व गुरिल्ला लड़ाकाक मसला पर गतिरोध बनल अछि। इ समयसीमा दू बेर बढ़ाउल जा चुकल अछि। 2006 मे गृह युद्ध खत्म भेलाक बाद हिनका लोकनि कए शिविर तक सीमित करि देल गेल अछि। 2006 मे भेल शांति संधि क मुताबिक अगर निश्चित समयसीमा तक संविधान क मसौदा तैयार नहि भेल त एहि स पैदा होइवाला राजनीतिक स्थिरता क वजह स शांति प्रक्रिया पटरी स उतरि जाएत।
शांति प्रक्रिया क सबसे पैघ मुद्दा 19,000 माओवादी लड़ाका कए सेना क हिस्सा बनेबा पर अछि मुदा सैन्य नेतृत्व आ विपक्षी नेपाली कांग्रेस पार्टी एकर हक मे नहि अछि। एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) क नेता झालानाथ खनल क प्रेस सलाहकार सूर्य थापा कहला, ओ आखिरी मिनट तक आम सहमति बनेबा लेल प्रयास केलथि मुदा पार्टी सब संविधान क मसौदा आ शांति प्रक्रिया पर सहमत नहि भेल। एकर बाद इस्तीफा आखरी विकल्‍प छल।
नेपाल मे दस साल तक चलल गृह युद्ध क बाद 2006 मे शांति संधि भेल मुदा निर्वाचित सांसद नव संविधान तैयार करबा मे नाकाम रहल। सात मास तक नेपाल मे कियो प्रधानमंत्री नहि छल। फेर फरवरी मे खनल प्रधानमंत्री पद ग्रहण केलथि मुदा हुनकर इस्तीफा क बाद फेर राजनीतिक गतिरोध पैदा भ गेल अछि। 2008 क चुनाव मे माओवादी सबस पैघ पार्टी क तौर पर उभरल जेकर बाद पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड प्रधानमंत्री चुनल गेलाह। खनल तीन पार्टी वाला गठबंधन क नेतृत्व केलथि जाहि मे माओवादी सेहो शामिल छलथि मुदा ओ पहिने साफ करि चुकल छलथि जे अगर शांति प्रक्रिया कए आगू नहि बढाउल गेल त ओ इस्तीफा द देताह। पर्यवेक्षक क कहब अछि जे राजनीतिक निष्क्रियता क वजह स गृह युद्ध क बाद देश मे सुधार आ विकास क प्रक्रिया खतरा मे पडि गेल अछि। बहुत रास लोक कए उम्मीद छल जे गृह युद्ध खत्म भेलाक बाद हुनकर जिनगी बेहतर होएत मुदा एहन किछु नहि भेल। नेपाल दुनिया क सबस गरीब देश मे स एक अछि। नेपालक एहि राजनीतिक अस्थिरता क प्रभाव बिहार पर सेहो परत। मजबूत, स्थिर आ विकसित नेपाल बिहार लेल बहुत जरूरी अछि। आइ बिहार ताहि विकासक बाट पर चलि रहल अछि ओहि मे अगर नेपाल कदमताल करिते त मिथिला क भाग्‍य उदय हेबा स कियो नहि रोकि सकैत छल।

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