नालंदा कए दिल्‍ली ल जेबाक मामला स अंतरजाल आओर ब्लॉग जगत मे उबाल

नई दिल्‍ली। नालंदा विश्व विद्यालय कए दिल्ली अनबाक आशंका पर अंतरजाल आओर ब्लॉग जगत मे उबाल अछि। बिहार क वरिष्‍ठ पत्रकार केके सिंह जखन एहि आशंका स संबंधित खबर देलथि त फेसबुक सन सोशल साइट पर बहस क गंगा बहि गेल अछि। इसमाद सेहो एहि संबंध मे सूचना देलक जे मोतिहारीक बाद आब नालंदा क नंबर अछि। एकर बाद सोमदिन फेसबुक पर पत्रकार ज्ञनेश्वर वात्स्यायन एकटा पोस्‍ट लिखलथि जे नीतीश कए सेहो ‘तवज्‍जो’ नहि दैत छथि गोपा सब्‍बरवाल। हुनक कहब छल जे ईश्‍वर जानैत अछि नालंदा अंतर्राष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालय क भविष्‍य। ओना पत्रकार केके सिंह अपन ब्‍लॉग मे अगिला साल स विवि क शैक्षिक सत्र शुरु हेबाक आस जगा देलथि अछि। मुदा इ सत्र बिहार मे शुरू होएत या दिल्‍ली मे एकर जानकारी एखन ककरो लग नहि अछि। ज्ञनेश्वर वात्स्यायन क कहब अछि जे विवाद मे रहल यूनिवर्सिटी क वाइस चांसलर गोपा सब्‍बरवाल कए बिहार एबाक फुर्सत नहि अछि। शायद ओ राजगीर मे ‘फाइव स्‍टार’ क सुविधा क इंतजार मे छथि। ज्ञनेश्वर वात्स्यायन क दावा अछि जे ओ दू दिन पहिने एहि यूनिवर्सिटी क वेबसाइट www.nalandauniv.edu.in देखने छलथि। कई मास पहिने बनल एहि साइट, पर अहां देखब जे एपीजे कलाम क बिहार विधान सभा मे देल गेल भाषण स ल कए अमर्त्‍य सेन आओर गोपा सब्‍बरवाल क विचार तक भेट जाएत, मुदा नीतीश कुमार क पेज जेना क्लिक करब, संदेश भेटत- we are in the process of updating the site….(हम सब एहि साइट कए अपडेट करबा मे लागल छी)। ज्ञनेश्वर वात्स्यायन क अनुसार एकर दू टा मतलब अछि, यूनिवर्सिटी कए 450 एकड़ भूमि उपलब्‍ध करा देनिहार नीतीश कुमार या त अपन संदेश नहि देलथि अछि अथवा हुनक संदेश कए अपलोड करबा लायक नहि बुझल गेल अछि। सच की अछि इ त मैडम सब्‍बरवाल बुझतीह।
सोशल साइट पर मैडम सब्‍बरवाल क दरमाहा पर सेहो चर्चा गरम अछि। हुनक मासिक दरमाहा पांच लाख टका स बेसी अछि। इ दरमाहा देश क सर्वाधिक प्रतिष्ठित जेएनयू क वाइस चांसलर स बेसी आ दिल्‍ली यूनिवर्सिटी क वाइस चांसलर स दोगुना अछि। अक्‍तूबर,2010 स मैडम इ दरमाहा ल रहल छथि। श्री वात्स्यायन क कहब अछि जे दरमाहा कए ‘टैक्‍स फ्री’ करबाक सेहो प्रयास भेल। सोशल साइट पर इ बहस सेहो जारी अछि जे एतबा पैघ दरमाहा क बदला मे मैडम एखन धरि की उपलब्धि हासिल केलथि अछि। किछु लोक क इ सेहो कहब अछि जे मैडम क करीबी डा. अंजना शर्मा कए पिछला साल 3.30 लाख क दरमाहा पर ओएसडी नियुक्‍त करबाक कोन जरूरत छल। यूनिवर्सिटी क गवर्निंग बोर्ड क बैठक पर एखन धरि देश-विदेश मे करीब तीन करोड़ टका खर्च कैल जा चुकल अछि। ओना एहि पर अधिकतर लोक क कहब अछि जे एहि प्रकार क बैसार क अहमियत पर कोनो एतराज नहि अछि, मुदा स्‍थान पर त सवाल उठाउल जा रहल अछि।
मैडम सब्‍बरवाल किछु कहथि मुदा वेबसाइट पर दिल्‍ली क आरके पुरम स्थित किराया क मकान क महत्‍व साफ देखा रहल अछि, राजगीर या नालंदा दबा गेल या मिटा देल गेल अछि। श्री वात्स्यायन क दावा अछि जे ओ शुक्रदिन विवि क राजगीर कार्यालय मे किछु जानकारी लेल फोन केलथि, मुदा फोन कियो नहि उठेलक। नंबर छल-2255330। मैडम एखन धरि राजगीर केतबा बेर एलथि अछि इ बुझबाक सबहक इच्‍छा अछि। बहरहाल, किछु प्रश्‍न अछि, जेकर जवाब आरटीआई क माध्‍यम स यूनिवर्सिटी क मुख्‍य लोक सूचना अधिकारी एसके शर्मा स मांगबाक कोशिश कैल जा रहल अछि।
एहि बहस कए आगू बढबैत कृष्ण कुमार सिंह कहलथि जे जाहि दिन स, पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम, कए विश्वविद्यालय स अलग करि देल गेल तहिए स एकर पुनर्निर्माण क अनिश्चितता उजागर भ गेल। युनिवर्सिटी क जीबी क चेयरमैन प्रो अमर्त्य सेन क मनमानी आ अड़ियल रवैये स असहमत भेलाक बाद डॉ कलाम कए युनिवर्सिटी स अलग हेबाक निर्णय सबस दुखद क्षण छल। श्री सिंह क आरोप अछि जे प्रोफेसर सेन क रूचि युनिवर्सिटी कए ज्ञान लेल कम आ शिक्षा क दलाली मे बेसी अछि। जेकर प्रमाण अछि दिल्ली युनिवर्सिटी क एकटा जूनियर रीडर रैंक क शिक्षक कए युनिवर्सिटी मे अत्यधिक वेतन पर वीसी क रूप मे मनोनयन। एहि स पूरा देश क शिक्षा जगत मे हाय तौबा मचल अछि। एकरा लेल अमर्त्य सेन मे बिहार आ बिहारी संगहि देश क तमाम शिक्षाविद कए जमि कए भला बुरा कहलथि। श्री सिंह क कहब अछि जे श्री सेन क अहंकार आ केंद्र सरकार क रवैया क कारण एहि महत्वकांक्षी विश्वविद्यालय क स्थापना क बाट पर बाधा ठार अछि। बहस मे इ गप सेहो कहल गेल जे विवादस्पद चयन क मामला जखन राज्यसभा मे उठाउल गेल त जखन विदेश मंत्री जे नालंदा युनिवर्सिटी क ग्रन्थ सम्बन्धी मामला स सेहो जुडल छथि कहला जे एहन कोनो नियुक्ति नहि भेल अछि मुदा जखन हुनका गोपा क नियुक्ति संबंधी कागजात देल गेल त ओ एहि मामला पर आइ धरि कोनो स्पष्‍टीकरण नहि देलथि अछि।

maithili news, mithila news, bihar news, latest bihar news, latest mithila news, latest maithili news, maithili newspaper

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments

3 टिप्पणी

  1. दुर्भाग्यजनक होना नालंदा का कहीं और चले जाना. इससे बेहतर यही हो कि नालंदा नाम से नया कुछ बने ही नहीं. हम सब नालंदा के उन भग्नावशेषों पर ही संतोष कर लेंगे.

  2. नालंदा विश्व विद्यालय कए दिल्ली अनब …………………… अतिशय निन्दनीय ओ दुर्भाग्यजनक प्रयास ।

Comments are closed.