नहि रहलाह रामानंद रेणु : साहित्य गगनक एकटा आर नक्षत्रक अस्त

किसलय कृष्ण
नई दिल्ली |
मैथिली साहित्यक चर्चित कथाकार उपन्यासकार रामानंद रेणु नहि रहलाह |काल्हि १३,अगस्त,२०११ कें दरभंगा स्थित हुनक आवास पर ११ बजे राती में हुनक देहांत भ’ गेलनि | “कतेक रास बात” पोथी पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार सँ सम्मानित स्व. रेणु अपन विशिष्ट शिल्प आ शब्द विन्यास लेल चर्चित रहलाह | ‘दूध फुल’ , ‘उत्तर जनपद’ आदि महत्वपूर्ण उपन्यासक रचनाकार रेणु सदा जीवन उच्च विचार मे आस्था राखय वला लोक छलाह | हुनक निधन सँ मिथिला आ मैथिली कें एकटा अपूरणीय क्षति भेल अछि |
अपन शोक व्यक्त करैत कथाकार अरविन्द ठाकुर कहलनि जे रामानंद रेणु जी’क देहांत सँ मैथिली उपन्यासक एकटा धारा ठमैक गेल अछि | मैथिलीक वरिष्ठ आलोचक मोहन भारद्वाज कहलनि जे स्व. रेणु सृजन आ जीवन दुनू मे मूलतः कवि छलाह , हुनक भीजल आँचर कविता कें मोन पाडैत भारद्वाज जी कहलनि जे ओ सदैव मोन रहताह | समीक्षक रमानंद झा रमण हुनका एकटा सफल उपन्यासकार कहैत कहलनि जे हुनक कथा पात्र शोषित समाजक लोक होइत छल, रेणुक अवसान सँ मैथिली साहित्य कें बहुत क्षति भेल अछि, शोक व्यक्त करयबला मे प्रदीप बिहारी, अजित आजाद, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, मेनका मल्लिक, आशीष झा आ सुनील कुमार झा आदि शामिल छथि|

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments

4 टिप्पणी

    • रेणु बाबु के हमरा तरफ से श्रधांजलि. हुनकर देहांत से मैथिलि साहित्य के अपूर्णीय क्षति भेल.

  1. रामानंद रेणु बाबु के हमरा तरफ से श्रधांजलि

  2. Renujik dehant sa maithili sahitya ke badd paigh chhati bhel achhi. hunak atma ke shantik kamna.

Comments are closed.