नहि रहलाह फजलु रहमान हाशमी

किसलय कृष्ण
नई दिल्‍ली।
मैथिली कए मातृभाषा आ हिंदी कए राष्ट्रभाषा मानैत निरंतर सृजनरत रहयबला व्यक्तित्व फजलु रहमान हाशमीक देहांत विगत 20,जुलाई,2011 कए बेगूसराय जिलाक हुनक गाम मुज़फ्फरा बज़ार मे भ’ गेलनि..ओ 75 वर्षक छलाह. 1936 ई. मे मातृक पटना जिलाक बराह जन्मल स्व. हाशमी एकटा एहेन रचनाकार छलथि जिनक रचना मे सरकारक विसंगति पर निरंतर चोट नज़रि आबैत अछि…मौलाना अबुल कलाम आज़ादक मोनोग्राफ क उर्दू सँ मैथिली मे अनुवादक लेल वर्ष 1996 मे हुनका साहित्य अकदेमीक अनुवाद पुरस्कार सँ सेहो सम्मानित कयल गेल.. मैथिली मे निर्मोही आ हिन्दी मे रश्मिराशि नामक काव्यक सृजक हाशमी कए बेगूसरायक दिनकर जनपदीय सम्मान सेहो भेल छनि…मैथिली संस्कृति आ साहित्यक उन्नायक हाशमीजीक निधन पर मैथिली साहित्य जगत मे शोकक लहरि पसरब स्वाभाविक..मैथिलीक चर्चित साहित्यकार प्रदीप बिहारी फोन पर कहलनि जे हुनक एकटा कविताक ई पांति’ सुना करता था बचपन में बुजुर्गों के मुह से ये जवाहरलाल के कपड़े धुले पेरिस से आते हैं हम भी कुछ कम नहीं यारों चपाती खाने को गेहूं अमरीका से मँगाते हैं.’ एखनहु बेगूरायक लोक कंठ मे रचल-बसल अछि..हिनक एकटा चर्चित कविताक अंश मैथिलीक चर्चित संस्कृतिकर्मी धीरेन्द्र प्रेमर्षि द्वारा “भोर” नामक गीत अलबम मे प्रयोग कयल गेल अछि..हिनक एक पुत्र जियाउर्र रहमान जाफरी सेहो मैथिली साहित्य मे सक्रिय छथि….मिथिलाक एहि सुच्छा सपूतक निधन पर ईसमाद परिवार दिस सँ सेहो श्रद्धासुमन….

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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