दुर्भाग्‍य मैथिलीक जे एहन पुत्र भेल

एहि स पैघ दुर्भाग्‍य कोनो भाषा लेल आओर की भ सकैत अछि जे लेखक, रचना आ पुस्‍तक भेलाक बावजूद मैथिली क आंचर मे पुरस्‍कार नहि आउत। कारण चयनकर्ता लापता छथि। इ हाल कोनो छोट मोट पुरस्‍कार क नहि अछि बल्कि अकादमी पुरस्‍कारक अछि। जानकारी क अनुसार चयनकर्ता बनबा लेल कोनो हद तक चमचागीरी केनिहार जखन चयनकर्ता बनलाह त बैसार लेल ओ अपन व्‍यस्‍त समय मे स किछु क्षण नहि निकालि सकलाह। हद त इ भ गेल जे ”नहि हगब आ नहि बाट छोडब” जेकां ओ एहि समिति स अपन नाम तक वापस नहि लेलथि जे कियो आन नहि एहि समिति मे राखल जा सकए। कुल मिला कए भेल इ जे मैथिली मे केकरा इ पुरस्‍कार देल जाए ताहि पर फैसला त दूर कोनो बैसार तक नहि भेल। एहन मे आशंका प्रबल अछि जे वर्ष 2011 लेल एहि पुरस्कार स मैथिली वंचित भ जाएत। ओना मैथिली लेल इ कोनो नव गप नहि अछि। पहिने सेहो तीन बेर मैथिली कए इ पुरस्‍कार नहि भेटल अछि, मुदा ओ मामला एहि स अलग छल। एहि स पहिने जखन मैथिली वंचित भेल छल त कारण पुरस्‍कार जोकर पुस्‍तक क अभाव कहल गेल छल। जेना 1965 मे साहित्य अकादमी क मान्यता भेटलाक बाद पुरस्कार क पहिल दावा 1966 में बनल छल, मुदा कोनो रचना कए पुरस्कार लायक नहि मानल गेल। 1972 आ 1974 में सेहो कारण समान रहल। मुदा एहि साल जे भेल ओ त इतिहास नहि अछि। अकादमी मैथिलीक चयन लेल दू-दूटा बैसार बजेलक मुदा अकादमी दिस स मनोनीत तीनू निर्णायक बैसार मे शामिल नहि भेलाह। मामला फिलहाल अकादमी क अध्यक्ष क हाथ में अछि। साहित्य अकादमी क कार्यकारिणी समिति हुनका एहि संबंध मे निर्णय लेबाक अधिकार सौंप देलक अछि। नियम अनुसार साहित्य अकादमी पुरस्कार पर निर्णय निर्णायक क बैसार क बिना नहि भ सकैत अछि। मैथिली क दुर्भाग्य अछि जे तीनू तीन एतबा नैतिक रूप स खसल छलाह जे अपन संस्तुति पठा देलथि मुदा बैसार मे शामिल नहि भेलथि। परिणाम भेल जे अन्य भाषा क पुरस्कारक घोषणा त भ गेल मुदा मैथिली अपन एहि तीनटा नालायक संतान पर नोर बहा रहल अछि। साहित्‍य अकादमीक कहब अछि जे अगर निर्णायक सब कए नहि एबाक छल त ओ पहिने इ प्रस्‍ताव कए ठुकरा सकैत छलाह जाहि स अकादमी दोसर गोटे कए नामित क सकैत छल आ एकटा समृद्ध भाषा कए पुरस्कार स वंचित हेबाक नौबत नहि अबितए।
मैथिली भाषा संग भेल एहि प्रकारक मजाक करबाक दोषी क संबंध मे जानकारी तकनीकी रूप स नहि देल जा सकैत अछि। मुदा साहित्य अकादमी, दिल्ली में मैथिली क संयोजक डॉ. विद्यानाथ झा ‘विदित’ सेहो एहि स काफी व्यथित छथि। डॉ. विदित क पिछला सप्‍ताह दरभंगा मे पत्रकार सब संग गप मे कहला जे हुनकर कार्यकाल में मैथिली संग भेल एहि स बेसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति आओर किछु नहि भ सकैत अछि। ओना ओ साहित्य अकादमी क कार्यसमिति स अनुरोध केलथि अछि जे मैथिली कए पुरस्कार स वंचित नहि कैल जाए, मुदा ओ इ साफ नहि केलथि जे चयन समिति क सदस्‍य चुनबा मे हुनकर केतबा योगदान छल आ अगर छल त एहन लोक कए समिति मे किया लेलथि जेकरा मैथिली लेल एतबो समय नहि अछि। सवाल अछि जे भ सकैत अछि देर सबेर एहि साल मैथिली कए इ पुरस्‍कार द देल जाए आ मैथिली मे रचना केनिहार कए संतोष भेट जाए, मुदा मैथिली कए अपन बाप क दलान बुझिनिहार एहि प्रकार विद्वान सबहक बहिष्‍कार कहिया होएत। अकादमी हिनकर नाम जेतबा नुका लैत मुदा कहल जाइत छैक जे चालि आ प्रवृति नहि बदलैत अछि। सब कए पता अछि इ कुकर्मी सब कए छथि।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments

3 टिप्पणी

  1. करेजा फैट गेल…

    हम हुनका सs मैथिलि बsजलौं
    उ रहs जे हिंदी छांटी रहल रहs
    घंटा भरक बात मs कान तरैस गेल
    मुदा एक शबद नै मैथिलि बाजलक
    पुछ्लौं झाजी घर कतs भेल?
    कहलक दरभंगा “I m outside from a long ”
    आखिर हमर मsन हरखित भेल
    जब सुनलौं मैथिलि हुनकर मुख सs
    पुछला पर की अप्पन भाषा किया नs बजै छि
    बच्चा सsब कs किया नs गाम भेजै छि
    कहलक –यौ की कही लाज लगे यs
    फाटs धरती जे हम समाबौं, हमर मू मs धान दियौ तs लावा
    कहलों हुनका जे यौ अहाँ कोन नौकरी करै छि
    जे अप्पन भाषा कs एना तजै छि
    “मैथिलि” सs सम्मान भेटल यs
    ओही सs पहचान भेटल य
    क्रमश: …

  2. Bahut durbhagyapurna sthiti achhi. Kono bhasha ke Sahiya akademi puraskar bhetnai kono chhot gapp nahin thik, Maithili ke ehi sa maithili bhashiye sab vanchit karba par tulal chhathi. Besi lok ke jankari me chhanhi je teenu mahaan vyakti sabh ke chhathi.

  3. Ki Kahu E sab Suni k Bahut Dukh hoye je lichu log sab ate busy v gel chaith je hunka apan matri bhasa ke le lsamay nai chan thag chaith or kursi seho chahi ham kahay chi ehan log sab ke ghar me nai mojar hetay je ehan type ke lok hoye hjakra gahr me mojar nai o sab neta or kursi ke pyar jyada rahay chani o karta kichu nai ehan log sab ke hatau e kursi par s je maithili ke lelkalank chaith

Comments are closed.