दिल्ली मे देखल ‘सुन्दर संयोग’

नई दिल्‍ली। दिल्ली मे एक बेर फेर मैथिल रंगमंचक धमक सुनाई देलक। श्रीराम सेंटर एक बेर फेर गवाह बनल मैथिल क एकटा सुन्दर समागम क। मौका छल मैथिली रंगमंच क सर्वश्रेष्ठ संस्था मैलोरंग ( मैथिली लोक रंग) क द्वारा मैथिली क पहिल आधुनिक नाटक ‘सुन्दर संयोग’ क मंचन क। 1905 मे जीवन झा द्वारा लिखित एहि नाटक कए पहिल बेर मंच पर अनबाक साहस केलथि निर्देशक प्रकाश झा। एहि नाटक कए आजुक समय क अनुसार ढालबा लेल एकर पुनर्लेखन क आवश्यकता पडल जेकरा अंजाम देलथि मैथिली क सुप्रसिद्ध नाटकार, रंग निर्देशक आ चिन्तक ‘महेंद्र मलंगिया’ ।
मि‍थिलाक पृष्‍ठभूमि पर आधारित एहि नाटक कए आधुनिक मैथिली नाटक क प्रथम रचना मानल जाइत अछि। नाटकक कथावस्‍तु नव दंपती सुंदर आ सरला क जीवन पर आधारित छल। ब्‍याह क बाद चतुर्थी क राति सुंदर अपन कनिया कए छोडि भागि जाइत अछि। बहुत दिन बाद जखन सरला अपन माम क संग बैद्यनाथ जाइत अछि त ओहि ठाम संयोग स ओकरा सुंदर भेट जाइत छथि आ दूनू क मिलन एकटा सुंदर संयोग बनि जाइत अछि।
मैलोरंग क नाटकक सुगंध लेबा लेल दिल्‍ली क लोक आतुर भ गेल अछि, ताहि लेल उम्‍मीद क अनुरूप श्रीराम सेंटर खचाखच भरल छल, दर्शक क भीड़ दिल्ली मे मैथिल रंगमंच क स्‍वर्णकाल एबाक आभाष द रहल छल। अपन परंपराक अनुसार मैलोरंग क इ नाटक सेहो निर्धारित समय स शुरू भेल। ठीक साढे छह बजे मंच पर अवतरीत भेलाह संतोष….नट क भूमिका मे मंच पर संतोष कए देखि दर्शक अपन हंसी रोक नहि सकल आ पूरा ऑडिटोरियम हंसी क झंकार स चककि उठल। रहल सहल कसर नटी बनल प्रवीण पूरा क देलथि। प्रवीण क हर एक ठुमका आ हर एक इशारा पर हंसी क फुव्वारा आ ताली क गडगडाहट हाल मे देर तक गूंजैत रहल। एहि दूनू कलाकारक मनोरंजन दर्शक कए पेट पकड़करि लोट-पोट हेबा पर विवश क देलक। खास क बच्‍चा वर्ग त उछली रहल छल। फेर एक एक क मंच पर बाकि क कलाकार अबैत रहलाह आ कथा आगू बढैत रहल। अनिल मिश्रा, नीरा, ज्योति आ बबिता सब कियो अपन सुन्दर आदकारी स दर्शक क मन मोह लेलथि। मुख्य भूमिका मे सुन्दर बनल अमर जी राय आ सरला बनल सोनिया झा कमाल क अभिनय केलथि। ओना नाटकक बीच मे एक दूटा संवाद मे अटकैत कलाकार संवादक प्रवाह कए बाधित केलथि, जे अभ्‍यास क कमी कए संकेत देलक। ध्‍वनी आ प्रकाश पूर्वक भांति सुंदर छल।
नाटक मे मुख्‍य भूमिका निभेनिहार अमरजी राय मैलोरंग स अपन कॅरियर क शुरुआत 2006 मे नाटक काठक लोक स केने छथि आ मैलोरंग क जल डमरू बाजे मे मुख्य भूमिका सेहो निभा चुकल छथि। पिछला वर्ष स्कॉलरशिप भेटलाक बाद एक वर्ष क अभिनय प्रशिक्षण लेल ओ एहि संस्‍था स दूर भ गेल छलाह आ मध्यप्रदेश जा अभिनय क बारीकी सीखलाह। मध्‍यप्रदेश स लौटलाक बाद इ हुनक पहिल मंच प्रस्‍तुति छल, इ एकटा सुदर संयोग रहल जे हुनक दिल्‍ली मे पहिल प्रस्‍तुति मैथिली रंगमंच स भेल।
ओतहि सरला क रूप मे शानदार प्रस्‍तुति देनिहारि सोनिया झा एहि स पर्व हिंदी रंगमंच क संग जुडल छलीह आ किछु छोट-मोट भूमिका करैत छलीह। निर्देशक प्रकाश झाक नजरि हुनकर प्रतिभा कए देखल आ एहि नाटक स ओ मैथिली रंगमंच पर अपन शानदार प्रस्‍तुति द सबस कए चौंका देलथि। अपन पहिल प्रयास मे ओ दर्शक क दिल मे उतरि गेलीह आ पहिल परीक्षा मे शत-प्रतिशत पास भ गेलीह। सरोजनी क भूमिका मे बबिता प्रतिहस्त सेहो नीक अभिनय केलथि, ज्ञात हो जे बबिता क सेहो इ पहिल नाटक छल। ओना प्रकाश झा क इ खासियत रहल अछि जे ओ कलाकार स ओकर सर्वश्रेष्‍ठ निकाली लैत छथि। सुंदर संयोग मे एक बेर फेर प्रकाश झा एकटा मांजल निर्देशक हेबाक प्रमाण द देलथि, हुनका मे निर्देशकक सबटा गुण मौजद अछि जे आब साबित करबाक आवश्‍यकता नहि रहल। स्त्री समस्या कए समाहित कैल सुन्दर संयोग क इ मंचन सचमुच मे अद्भुत रहल।
अंत मे मैलोरंगक परंपरा अनुसार अगिला आयोजनक उदघोषणा कैल गेल जाहि मे प्रकाश झा स्‍वंय कहला जे अक्‍तबर मास मे संस्‍था एकटा नाटक करत, जखन कि दिसंबर मे सात दिनक मलंगिया महोत्सव कैल जा रहल अछि, जे 24-30 दिसम्बर तक होएत। एक शब्द मे कहू त दिल्‍ली मे एहन आयोजन क गवाह बनब एकटा ‘सुन्दर संयोग’ रहल।

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