दाग धोबा लेल सब साल 15 लाख खर्च करैत अछि बीपीएससी

पटना स समदिया अनन्त क खास रिपोर्ट

बिहार लोक सेवा आयोग एकटा संवैधनिक संस्था अछि, मुदा इ नियमक धज्जि उड़ अपना पर एतबा धब्बा लगा चुकल अछि जे ओहि धब्बा कए खत्म करबा लेल सब साल इ संस्थान करीब 15 लाख टका खर्च करैत अछि। गौरतलब अछि जे अधिकतर धब्बा पिछला दू दशक मे आयोग क दामन पर लागल अछि। आइ बिहार लोक सेवा आयोग क खिलाफ न्यायालय मे लगभग साढ़े चार सौ स बेसी मुकदमा चलि रहल अछि। एहि मुकदमा कए लड़बा लेल वकील राखल गेल अछि, जेकरा पर प्रति वर्ष लगभग 15 लाख टका खर्च भ रहल अछि। एहन मे माल महराज क मिर्जा खेलथि होली वाला कहावत चरितार्थ भ रहल अछि। आयोग क अयोग्यता स जतए सरकार क राजस्व क क्षति भ रहल अछि , ओतहि राज्य क प्रतिभा क भविष्य सेहो बर्बाद भ रहल अछि।
संविधन क नियम क अनुसार आयोग क ऊपर राज्य सरकार क कोनो नियंत्राण नहि होइत अछि, मुदा जनता क अपन अलग राय अछि। जनता आयोग क बिगड़ैत छवि क लेल प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप स राज्य सरकार कए सेहो दोषी मानैत अछि । जखन जनता एकरा लेल सत्ता कए दोषी मानैत अछि त एहि आयोग क कारनामा क राजनैतिक विशलेषण भेनाई लाजमी अछि । सवाल उठैत अछि जे कि बिहार लोक सेवा आयोग लालू आ नीतीश क चरित्र क आईना बनि चुकल अछि।
बीपीएससी स जखन ‘समादÓ आरटीआई क तहत आयोग के खिलाफ न्यायालय मे चलि रहल मुकदमा क सूची, विधि मद मे होइवाला खर्च क संग-संग जेल गेनिहार अध्यक्ष /सदस्य , पदाधिकारी आ कर्मचारी क सूची क संग-संग कईटा ज्वलंत सवाल क जवाब मांगलक, त कईटा सवाल कए नजरअंदाज करैत आयोग 21 पृष्ठ क दस्तावेज देलक। जे आयोगक कारनामा क बानगी मात्र अछि। एहि दस्तावेज क आधर पर इ दावा त नहि कैल जा सकैत अछि जे बिहार लोक सेवा आयोग मे सर्वप्रथम कहिया धब्बा लागल या एकर खिलाफ पहिल बेर कहिया परीक्षार्थी न्यायालय क दरवाजा खटखटेलथि । मुदा दस्तावेज क आधर पर इ कहल जा सकैत अछि जे सन 1985 मे आयोजित परीक्षा बाद स आयोग क नीयत पर सवाल उठै लागल। ओना 90 क दशक मे आयोग कए न्यायालय मे घसीटबाक चलन जोड़ पकड़लक। लालू-राबड़ी सरकार क कार्यकाल मे सरकार आयोग क अध्यक्ष क पद पर भ्रष्टाचारी कए बैसा मुकदमा क सूची बढ़ेबा मे मदद केलक। लालू -राबड़ी क कथित कुशासन क अवसान के बाद इ आशा बंधल छल जे आयोग आब अपन छवि कए सुधारबा लेल किछु करत। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपन शपथ ग्रहण समारोह मे कहने छलाह जे आब बिहार स प्रतिभा क पलायन नहि होएत, मुदा छात्र क इ भ्रम टूटबा मे समय नहि लागल। नीतीशक कार्यकाल मे सेहो आयोग कानून क कटघरा मे ठाड़ रहल। इ सच अछि जे राज्य मे सुशासन क सरकार अछि मुदा आयोग मे एखनो कुशासन कायम है। निजाम बदलला स धंधली क तरीका बदलि गेल अछि। बहरहाल, नीतीश सरकार लेल राहत गप इ अछि जे हिनकर शासनकाल मे आयोगक कोनो अध्यक्ष जेलक मुंह नहि देखलक अछि।
पटना हाईकोर्ट क अधिवक्ता कहब अछि जे आयोग आरक्षण क नियम क अवहेलना करि आरक्षण क नव अंकगणित बनाकए परीक्षाफल घोषित करैत अछि, जखनकि सुप्रीम कोर्ट कई बेर इ चिंता जता चुकल अछि जे बैकवर्ड जाति क लोककए लगभग तीन दशक स आरक्षण देल जा रहल अछि फेर हिनकर संख्या सरकारी नौकरी मे कम केना अछि? जानकारक कहब अछि जे एकर पाछु एकटा कारण आरक्षण क नियम क अनदेखी करब सेहो अछि।
एहि बीच 47म संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा क परीक्षाफल घोषित भेला पर आरक्षण क हकमारी करबाक आरोप आयोग पर लागि रहल अछि। किछु छात्र आयोग द्वारा असफल घोषित भेलाक बावजूद न्यायालय क समक्ष सफल रहबाक दावा पेश केलथि अछि। 48म स लकए 52म तक बीपीएससी क प्रारंभिक परीक्षा क आयोजन 25/5/08 कए कैल गेल। जेकर परीक्षाफल 9/9/08 कए प्रकाशित भेल। परीक्षाफल घोषित होइत देरी आयोग कटघरा मे ठाड़ भ गेल। गलत प्रश्न पूछबाक संग-संग कई प्रकारक गड़बड़ी क आरोप लागल। एहि मामला मे न्यायालय क दबाव मे 94टा छात्र क लेल फेर स परीक्षा लेल गेल।
दस्तावेज क अनुसार सीडीपीओ क लेल भेल परीक्षा एखन धरि क सर्वाधिक विवादास्पद परीक्षा रहल अछि। सीडीपीओ परीक्षा 34/05 क तहत परीक्षा लेल गेल छल आ असगर 27टा मुकदमा मात्र एहि स संबंधित अछि। एहि प्रकार स प्रथम बीएएस परीक्षा 04/03 क तहत आयोजित भेल सेहो कम विवादित नहि रहल। आयोग के खिलाफ लगभग डेढ़ दर्जन मुकदमा वर्ष 2005 आ 2006 मे कैल गेल। अस्सिटेंट सिविल इंजीनियरिंग परीक्षा 128/96 क तहत आयोजित परीक्षा पर वर्ष 98, 99 आ 2002 मे 15टा केस दायर कैल गेल। टीबी परीक्षा 1/97 क आयोजन क बाद वर्ष 2000, 2001 2002 आ 2006 मे 15टा मुकदमा न्यायालय मे दायर कैल गेल। एहि प्रकार स एएनएम 59/98 क आयोजित परीक्षा पर लगभग आधा दर्जन मुकदमा भेल अछि। नर्स ग्रेड -1 57/98 क मामला मे सेहो आयोग क खिलाफ वर्ष 1999 मे लगभग एक दर्जन मुकदमा दर्ज कैल गेल। इ परीक्षा त नमूना मात्र छी, सच्चाई त इ अछि जे बिहार लोक सेवा द्वारा आयोजित अधिकतर परीक्षा पर सवाल उठाउल गेल अछि।
दरअसल बीपीएससी मे लगभग ढाई दशक स हेरापफेरी करबाक मामला चलि रहल अछि। समय क बढ़ैत सुईया क संग इ सिलसिला थमबाक नाम नहि ल रहल अछि। आयोग कोनो टका ल कए नौकरी बेचबाक काज केलक एकर नमूना मात्र अछि 43म सीमित परीक्षा। न्यायालय क आदेश पर निगरानी ब्यूरो 43म सीमित प्रतियोगिता परीक्षा मे भेल धांधली स संबंधित मामला मे आयोग क अघ्यक्ष राम सिंहासन सिंह, भानु प्रताप प्रोग्राम एनालिस्ट , सदस्य सह उपसचिव सैयद मासूम अली, सहायक सचिव तेजनारायण सिंह, सूचना अधिकारी संजीव कुमार आ एकटा अन्य प्रोग्राम एनालिस्ट विजय कुमार आदि कए निगरानी ब्यूरो छापेमारी करि गिरफतार केने छल। एहि मामला मे ब्यूरो आयोग क पूर्व अध्यक्ष रजिया तबसुम आ सदस्य देवनन्दन शर्मा पर सेहो शिकंजा कसने छल। आरोपानुसार इ सब उत्तरपुस्तिका मे छेड़छाड़ करि सिपाही, नर्स, डाइवर तक कए डिप्टी कलक्टर बना देने छलथि। 184 पदक लेल इ परीक्षा 19 अक्तूबर, 2003 कए भेल छल। जेकर परीक्षाफल 19 मई, 2005 कए प्रकाशित कैल गेल छल।
जानकार कहैत छथि जे एकटा अन्य मामला मे आयोग मे कथित रूप स भ रहल धांधली पर आयोग क तत्कालीन सचिव 26 फरवरी, 1991 कए टिप्पणी केने छलाह। तइयो आयोग बेखबर रहल। एहि मामला मे न्यायालय क आदेश सेहो बेअसर रहल । 8 फरवरी, 1999 कए तदर्थ रूप स 28टा सहायक क नियुक्ति कए न्यायालय द्वारा अनियमित ठहरेबाक बावजूद 21टा सहायक कए सम्पुष्ट करि देलक । एहि पर आडिटर जखन सवाल ठाड़ केलथि त कहल गेल जे 28टा सहायक क पूर्व नियुक्ति क मामला विचाराधीन अछि न कि 21टा सहायक क । आयोग क एहि जवाब स आडिटर संतुष्ट नहि भेल छलाह। बीपीएससी क पूर्व सदस्य आ नेत्राहीन विद्वान डॉ शिवपूजन ठाकुर क मुहिम क कारण जतए तत्कालीन अध्यक्ष क निलंबन भेल छल ओतहि एकटा अन्य पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी राय कए सीबीआई मेधा घोटाला मामला मे गिरफ्तार केने छल।
बिहार लोक सेवा आयोग मे टका ल कए नौकरी बांटबाक घोटाला अपन जगह अछि आ छपाई प्रतिष्ठान,कए गलत तरीका स लाभ, परीक्षक-मुख्य परीक्षक कए अधिक भुगतान, राजस्व पर सूद क हानि, लेखन सामग्री क्रय, केन्द्राधीक्षक कए अनियमित भुगतान, विशेषज्ञ कए अनियमित भुगतान, न्यायिक प्रकियाओं पर खर्च आदि पर सेहो आडिटर अपत्ति दर्ज करा चुकल छथि। एहि बीच आयोग पर अनियमित आ अवैध नियुक्ति पर 2.5 करोड़ खर्च करबाक आरोप लागि चुकल अछि। नवंबर 2000 स लकए दिसंबर 2002 क बीच 10.93 करोड़ टका क घोटाला महालेखाकार द्वारा पकड़ल गेल अछि। 28 जुलाई, 2005 कए आपत्ति क संग आयोग क सचिव कए पूर्ण विवरण देल जा चुकल अछि। एकर बावजूद अनियमितता बंद नहि भेल अछि।
आयोग क ऊपर लागि रहल आरोप पर जखन राय लेबा लेल समदिया आयोग क अध्यक्ष स संपर्क केलथि त ओ सचिव स गप करबाक सलाह देलथि। सचिव क कहब छल जे सवाल लिखित रूप मे देब त उत्तर देब। जखन सवाल कए लिखिकए देल गेल त दू घंटा क बाद सचिव अपन सहायक स समाद पठौलथि जे सवाल क जवाब देब एहि संस्थान लेल संभव नहि अछि।

धांधली लेल राज्य सरकार दोषी नहि : जगन्नाथ मिश्र

प्रश्न:- बिहार लोक सेवा आयोग मे भ रहल धांधली लेल राज्य सरकार केतबा दोषी अछि?

उत्तर:- संविधन क अनुच्छेद 320 क तहत बिहार लोक सेवा आयोग क गठन भेल अछि । इ एकटा संवैधनिक संस्था अछि। एकर बीच मे राज्य सरकार नहि अबैत अछि। सरकार कए दखल देबाक अधिकार नहि छैक। एकरा लेल राज्य सरकार कए दोषी नहि ठहराउल जा सकैत अछि।

प्रश्न:- आयोग क बदनामी स सरकार क छवि पर प्रभाव पड़ैत अछि बा नहि?

उत्तर:- संस्थान क बदनामी सरकार क लेल नीक गप त नहि अछि। किया कि आयोग क बदनामी स जनता क बीच सरकार क छवि बिगडै़त अछि ।

प्रश्न:- हाल क वर्ष मे आयोग क छवि किछु बेसी खराब भेल अछि, अहांक की कहब अछि?

उत्तर:-1990 क बाद छवि खराब भेल गेल । किया कि आयोग क सदस्य आ अध्यक्ष क गुणवत्ता मे गिरावट आयल गेल।

प्रश्न:- अहांक शासन काल मे आयोग क योग्यता पर सवाल उठल बा नहि ?

उत्तर:-मानव मानव होइत अछि, परपफेक्ट त भगवान होइत छथि। भ सकैत अछि जे किछु आरोप लागल होएत, मुदा हमरा स्मरण नहि अछि ।

बिगड़ल व्यवस्था कए सुधरबा मे वक्त त लागत: प्रो उषा सिन्हा

प्र0:- बिहार लोक सेवा आयोग काफी बदनाम भ चुकल अछि । एकर मुख्य कारण अहां की मानैत छी?

उ0- नियमानुसार आयोग क ऊपर सरकार क नियंत्राण नहि होइत अछि, मुदा सरकार क ऊपर एकर प्रभाव पड़ैत अछि। लालू-राबड़ी सरकार मे आयोग काफी बदनाम भेल। जेकर खमियाजा नीतीश सरकार कए सेहो भुगतए पड़त। किया कि स्थिति कए सुधरबा मे कनि समय त लागत।

प्रश्न:-एहि सरकार मे सेहो आयोग विवादित रहल अछि?

उत्तर:- संस्था अछि त विवाद होएब गंभीर गप नहि। अहम सवाल अछि जे आरोप केहन अछि। टका लकए नौकरी देबाक मामला एखन धरि सामने नहि आयल अछि। हम दावा क संग कहि सकैत छी जे एहन पहिने होइत छल। अध्यक्ष क गुणवत्ता मे काफी सुधर भेल अछि

प्र0:- एहि सरकार मे सहो कईटा मुकदमा भेल अछि ।

उत्तर:-मामला न्यायालय मे अछि, कोर्ट कार्रवाई करि रहल अछि। फैसला एलाक बाद पता चलत जे दोष केकर छल ।

सवाल बेहद चिंताजनक अछि : वरीय अधिवक्ता प्रभाकर सिंह

प्रश्न:-आयोग क खिलाफ अहां केहन मुकदमा क पैरवी पटना उच्च न्यायालय मे करि रहल छी?

उत्तर:-हम एखन लगभग 10टा केस क पैरवी करि रहल छी, जाहि मे 25टा छात्र क भविष्य न्यायालय क फैसला पर निर्भर करैत अछि। अधिकतर मामला गलत नियुक्ति आरक्षण क नियम क अवहेलना क संग-संग प्रश्न पत्र मे गड़बड़ी क संग-संग गलत प्रश्न पूछबाक मामला अछि।

प्र0:- इ केतबा चिंताजनक सवाल अछि ?

उ0:- सवाल बेहद चिंता जनक अछि। आयोग क लग मे विशेषाज्ञ क टीम होइत अछि फेर गलत प्रश्न कोनो पूछल जा सकैत अछि परिक्षर्थी स। हिन्दी क प्रश्न पत्र मे किछु आ अंग्रेजी क प्रश्न किछु आओर होइत अछि। आयोग क अयोग्यता स जतए सरकार क राजस्व क क्षति भ रहल अछि , ओतहि राज्य क प्रतिभा क भविष्य सेहो बर्बाद भ रहल अछि।

जेल गेनिहार अध्यक्ष /सदस्य , पदाधिकारी आ कर्मचारी क सूची:-

नाम पदनाम सम्बन्ध्ति परीक्षा

डा0 रजिया तब्बसुम पूर्व अध्यक्ष बिहार प्रशासनिक सेवा सीमित प्रति0 परीक्षा

डा0 रामसिंहासन सिंह ,, ,,

प्रबंधक मोईनुल हक स्टेडियम, बिहार पशुपालन सेवा वर्ग 2

डा0 डी0 एन शर्मा पूर्व सदस्य तदैव

डा0 शिवबालक चौधरी ,, तदैव

श्री सैयद मासूम अली तत्कालीन उपसचिव तदैव

श्री जेज नारायण सिंह सहायक सचिव तदैव

भनु प्रताप एनालिस्ट प्रोग्रामर बिहार प्रशासनिक सेवा सीमित प्रति0 परीक्षा

विजय कुमार ,, तदैव

संजीव कुमार इनफॉरमेंशन ऑफिसर तदैव

रत्नेश कुमार सिन्हा प्रशाख पदाधिकारी तदैव

कामता प्रसाद दिनचर्या लिपिक तदैव

भीमसेन प्रसाद सहायक प्रबंधक मोईनुल हक स्टेडियम

विगत वर्षों में विधि मद मे व्यय राशि क विवरण

वित्तीय वर्ष व्यय राशि टका मे

2005-06 …… 1484366

2006-07 ……. 1499666

2007-08 …….. 1499762

90 क बाद बिहार लोक सेवा आयोग क खिलाफ दर्ज मुकदमा क वर्षवार सूची

वर्ष मुकदमा क संख्या

1990 –

1991 –

1992 – 02

1993 – 00

1994 – 02

1995 – 00

1996 – 03

1997 – 10

1998 – 17

1999 – 18

2000 – 27

2001 – 38

2002 – 47

2003 – 19

2004 – 22

2005 – 61

2006 – 32

2007 – 88

2008 – 58

2009 –

2010 –

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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1 टिप्पणी

  1. breaking news hai,maithili k karan bahut kuchh samjhnay mai pareshani huee,BPSC ko ka kala chithha kholkar rakh diya hai.

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