दरभंगाक रंगमंचक अन्हार दुर कए रहल छथि‍ प्रकाश

जितेन्द्र नाथ झा

दरभंगा क प्रोफ़सर कालोनी …सांझ भ गेल अछि …कने ठण्ड सेहो छै ..सडक पर लोक सबहक कम आवाजाही ..पास मे मैथिली साहित्य परिषद क प्रांगन मे दू टा नाटक क मंचन हेबाक लेल उत्साही युवक क टोली तात्कालिक स्टेज बनेबा मे लागल अछि । किछु युवा रंगकर्मी दर्शक लेल दरी बिछा रहल अछि ..किछुए काल में नाटक मंचन हेबाक अछि ..सात बजिते बजिते दर्शक सब बिछाओल दरी पर बैस रहलाह …जाबे तक नाटक खत्म नै भेल ताबे तक दर्शक बैसल रहलाह । दर्शक क संख्या आ प्रतिक्रिया देखि निर्देश प्रकाश बंधूक रंगकर्मी दल खुश छथि‍ ।

छोट छीन शहर दरभंगा । नै ढंगक आडिटोरियम । नाटक क लेल कुनो सुविधा नै ..लोक सब मे  नाटक देखे क लगाव, मुदा नाटक करत के । देखैक प्रति लगाव मुदा, नाटक करत के । रंगमंच त भ रहल छल  । मुदा रंगमंच क नाम पर खानापूर्ति भ रहल छल । ऐहन माहौल मे रंगकर्मी प्रकाश बंधू क आगमन दरभंगा रंगमंच मे होइत अछि आ मृतप्राय थियेटर क आधुनिक जमाना क रंगमंचीय तकनीक सं आ नव सोच सं रंग परम्परा मे जान फूंकते छथि ।

किछु दिन पहिले प्रकाश दरभंगा क प्रोफ़ेसर कालोनी क मैथिली साहित्य परिषद के आँगन मे इन्टीमेट थियेटर डिजाइन केलनि जकरा मार्डन भाषा मे बाक्स थियेटर कहल जाइत अछि से बनाकए बादशाहत क खात्मा आ कर्फ्यू नाटक क मंचन केलनि । कपडा सं घेरि‍ कए स्टेजनुमा मंच बनाओल गेल । जमीन पर दरी बिछोल गेल । दर्शक एलाह आ अंत तक देखबाक लेल बैसल रहलाह । एही  नाटक क मंचन सं परिषद क लोग बहुत खुश छथि, किएक त परिषद क पूर्व अध्यक्ष गणपति मिश्र जे आब ई दुनिया मे नहीं छथि हुनकर इच्छा रहनि जे परिषद क आँगन मे नाटकक मंचन होय । एहि शहरक ल कए प्रकाश बंधू क योजना अछि जे ओ एहि शहर मे एक टा आडिटोरियम बनाओत, जाहीं सं ककरो नाटक करेबा वा करबा मे असुविधा नै होय ।

नई दिल्ली मे पढाई काल मे पैघ भैयारी रंगकर्मी दीपक बंधू क सलाह पर थियेटर सं  हिनका  रिश्ता बनल । फेर दिल्ली मे थियेटर यूनिट क स्थापना केलाह आ नाटक स अटूट रिश्ता बनी गेलनि । 2001 में हिनकर पिता श्री बी आर पी बंधू (सांग ड्रामा डिवीजन क सहायक निदेशक ) जी  नौकरी क सिलसिला मे दरभंगा एलाह त अपन पिता क संगे प्रकाश सेहो दरभंगा एलनि । एही ठाम  युवा सबकए एकजुट कए थियेटर यूनिट नाट्य दल बनेलौनी आ शिथिल भ गेल रंगमंच कए गति प्रदान केलनि । आय बिहार क राजधानी पटना होय या देश क राजधनी दिल्ली होय गैर व्यवसायी नाट्य संस्थान क लेल महंग आ पैघ नाटक बिना कुनो सरकारी अनुदानक संभव नै अछि । ओही ठाम  प्रकाश बंधू क टीम बिना कुनो सरकारी अनुदानक साल भरि  अलग-अलग प्रस्तुति करैत रहैत अछि । मोतिहारी क रहनिहार प्रकाश कहैत छथि जे दरभंगा मे दर्शक क कुनू कमी नै, हम जखन कुनो  नाटक करैत छी त दर्शक क नीक रिस्पांस भेटैत अछि । एही ठाम कमी छै त एकटा नीक आडिटोरियम क जाहि स दर्शक कए तकनीकी रूप से बेहतरीन नाटक देखबा क अवसर भेटि‍ सकय ।  आठवाँ सर्ग ,बिछु ,मरनोप्रान्त ,अंधा युग ,मैथिली नाटक अभिनव् जयदेव विद्यापति आदि नाटक निर्देशित केनिहार प्रकाश एहि शहर मे रंग परम्परा क माहौल बनेने अछि  । चाहे ओ नाट्य कार्यशाला होए या नुक्कड़ नाटक क प्रस्तुति…प्रकाश दरभंगा रंगमंच क उम्मीद बनि चुकल छथि ।

प्रकाश हिन्दी नाटक करै छथि आ मैथिली नाटकक संदर्भ म कहय छथि जे एकटा नाटक केने रही अभिनव जयदेव विद्यापति तकर बहुत नीक रिस्पांस रहै, आब एकटा आओर मैथिली नाटक क मंचन लेल सोची रहल छी ।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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