त कि मोतिहारी क बाद नालंदा

नई दिल्‍ली। जेकर आशंका छल, से सामने आबि गेल। नालंदा कए फेर स विश्व ख्याति दियेबा लेल शुरू भेल प्रोजेक्ट नालंदा स दिल्‍ली अनबाक प्रक्रिया शुरू भ गेल। नालंदा विश्‍वविद्यालयक कुलपति गोपा सबरवाल किछु दिन पहिने कहि चुकल छलथि जे नालंदा मे एतबा पैघ विश्‍वविद्यालय व्‍यावहारिक नहि अछि। लोक नालंदा पढबा लेल नहि जाएत। हुनक इ विचार एकर संकेत छल जे केंद्र सरकार एहि विश्‍वविद्यालय कए दिल्‍ली अनबाक योजना बना रहल अछि। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लेल एक झटका मे इ फैसला लेब संभव नहि भ रहल अछि, ताहि लेल ओ क्रमवार इ फैसला ल रहल छथि। पहिने कहल गेल जे मोतिहारी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय लेल उचित स्‍थान नहि अछि, मुदा आब नालंदा कए अंतरराष्‍टीय विश्‍वविद्यालय लेल अनुचित स्‍थान बतेबा लेल जमीन तैयार कैल जा रहल अछि। एहि बीच बिहारक वरिष्‍ठ पत्रकार केके सिंह खुलासा केलथि अछि जे नालंदा विश्‍वविद्यालय क एकटा महत्‍वपूर्ण स्‍कूल दिल्‍ली मे खोलल जाएत। एहि गपक सूचना विश्‍वविद्यालयक कुलपति गोपा सबरवाल देलथि अछि। हुनक अनुसार विश्‍वविद्यालय क अंतरराष्‍टीय अध्‍ययन स्‍कूल नालंदा विश्‍वविद्यालय लेल दिल्‍ली मे खोलल गेल अस्‍थायी कार्यालय मे खोलल जाएत। जानकार एकरा नालंदा विश्‍वविद्यालय कए दिल्‍ली स्‍थानांतरित करबाक पहिल चरण मानि रहल छथि। सवाल उठैत अछि जे सरकार आइ धरि इ कहैत रहल जे नालंदा क विश्व ख्याति वापस लौटेबाक लेल राजगीर लग विश्वविद्यालय खोलल जा रहल अछि। संसद मे क़ानून पास कैल गेल। दुनिया भरि क देश स नालंदाक नाम पर मांगल गेल आ 16टा देश मदद करबाक एलान सेहो केलक। इ मदद नालंदा लेल देल गेल नहि कि कोनो आन ठाम विश्‍वविद्यालय खोलबा लेल। मुदा सरकार नालंदाक नाम बेच दिल्‍ली मे विश्‍वविद्यालय खोलबाक चालाकी शुरू क देलक अछि। एकर सबस पहिल प्रमाण ग़ैर क़ानूनी तरीका स वाइस चांसलर यानी कुलपति क नियुक्ति स भेल। ओकर बाद एडवाइजर कमेटी मे प्रधानमंत्री क बेटी कए जगह भेट गेल। आब नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय क ढांचागत विकास आ सुविधा पर निगरानी लेल जे समिति बनल अछि ओकर अध्‍यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया कए बना देल गेल अछि। कहबा लेल त बिहार क नालंदा जिला मे जाहि जगह पर प्राचीन काल मे विख्यात विश्वविद्यालय छल ओतहि फेर स अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय क स्थापना भ रहल अछि, मुदा ओ मात्र कहबा लेल रहत, इ विश्‍वविद्यालयक सबटा काज दिल्‍ली मे अनबाक कुचक्र रचल जा रहल अछि। सरकार राष्ट्रीय निगरानी समिति मे अहलूवालिया क अतिरिक्त दसटा आओर सदस्य बनेलक अछि। एहि मे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार [पीएमओ] सदस्य [मानव संसाधन] योजना आयोग, सदस्य [अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था], विदेश सचिव, सचिव मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सचिव [व्यय] वित्त मंत्रालय, कुलपति नालंदा विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय निदेशक मंडल स नामित व्यक्ति, डॉ. अरोमेर रवि निदेशक, भारतीय इतिहास अध्ययन संस्थान आ सलाहकार [उच्च शिक्षा] योजना आयोग, सदस्य हेताह। इ समिति नालंदा मे विश्व स्तर क विश्वविद्यालय बनेबा लेल ढांचागत संसाधन तैयार करबा लेल आ क्षेत्रीय, स्थानीय विकास आ संस्थागत व्यवस्था क उपाय पर विचार करि कए अपन सिफारिश देत। सामान्‍य तौर पर इ अंदाजा लगाउल जा सकैत अछि जे इ समिति की सिफारिश करत। एकर भूमिका सेहो पहिने तैयार क लेल गेल अछि। पश्चिम बंगाल नेशनल यूनीवर्सिटी क पूर्व कुलपति प्रो. एनआर माधव मेनन क अध्यक्षता मे दस सदस्यीय कमेटी सेहो बना देल गेल अछि जे नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय क कानून मे संशोधन करत। आआइएम बेंगलूर क निदेशक प्रो. पंकज चंद्रा, नालंदा विश्वविद्यालय क कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल आओर दिल्‍ली क लेडी श्रीराम कॉलेज क प्रिंसिपल डॉ. मीनाक्षी गोपीनाथ कए एहि समितिक सदस्य बनाउल गेल अछि।
अब सवाल उठैत अछि जे नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी क नाम पर जे भ रहल अछि ओ शर्मनाक अछि। इ कोनो घोटाला स कम नहि अछि। नियम क अनदेखी, भाई-भतीजावाद, टकाक लूट, झूठ बयानबाजी आ प्रधानमंत्री क बेटी उपिंदर सिंह क मौजूदगी क कारण विदेश मंत्रालय तक दुनिया कए ठकबाक प्रयास मे लागल अछि। मुदा बिहारक जनता नालंदा विश्वविद्यालय क तबाही लेल बख्तियार खिलजी कए त शायद मा़फ क देने अछि, मुदा एहि बेर अगर नालंदा क गौरव क संग खिलवाड़ भेल त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आ मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार कए शायद मा़फ नहि क सकत।

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1 टिप्पणी

  1. हमरा जनैत मुख्यमंत्री नितीश कुमार जी मात्र गप्प बेसी हँकैत छथि कारण जतेक ओ बजैत छथि ओकर एकांशो काज नहि होइत देखल जा रहल अछि , देखू नव बिहारक निर्माण करैत-करैत ओ पुरनो बिहारक अस्मिता नहि बचा पाबि रहल छथि , एकर दोख हम जनता जर्नादनक अछि कारण हमरा लोकनि तुरन्त ककरो भगवान जे मानि लैत छियैक ई ओकरे प्रतिफल थिक।

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