तोगडिय़ा कए नीतीशक तगड़ा जबाव

बिहार मे जखने राष्टीय स्वंय सेवक संघक कार्यकारिणीक बैठक आहूत भेल, चिंता भ गेल जे संघक झंडाक नीचा स के की बाजत। पहिल बेर आयोजित भेल एहि बैठक मे संघक लोक त बिहारक संस्कृति पर प्रहार नहि लेलथि, मुदा राज्य सरकार पर मुस्लिम तुष्टीकरण क आरोप लगा प्रवीण तोगडिय़ा बिहार क सांप्रदायिक माहौल बिगाड़बाक एकबेर फेर प्रयास केलथि। मुदा ओ सफल नहि भ सकलथि। सफल कोना भ सकैत छथि, आखिर बिहार लोकतंत्रक ओ मंदिर अछि, जाहि ठाम एखनो तोगडिय़ा सन लोकक प्रवेश मात्र संभव अछि, हुनकर विचार आ मंत्र एहि ठाम नहि जपल जा सकैत अछि। इ गप बिहारी हुनका एक बेर नहि कई बेर बता चुकल अछि, मुदा तइयो ओ अपन मूर्खताक नमूना देबा से नहि चूकैत छथि। बिहारक संस्कृति आ सभ्यताक लेल हुनक बयान एकटा अपमान स कम नहि अछि। ताहि लेल बयानक तत्काल बाद बिहारक जनताक प्रतिनिधिक रूप मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तोगडिय़ाक आरोप कए खारिज करैत कहला जे हुनकर सरकार बिहार क सर्वागीण विकास मे विश्वास रखैत अछि आओर राज्य मे अल्पसंख्यक, दलित आ आर्थिक रूप स कमजोर लोक कए समाज क मुख्यधारा मे अनबाक लेल कईटा योजना चलाउल जा रहल अछि। विहिप क अंतरराष्ट्रीय महासचिव प्रवीण तोगडिय़ा मुख्य रूप स किशनगंज मे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय क शाखा खोलबा लेल जमीन देबा पर नीतीश पर तमसाइल छथि। संगहि हुनका मुस्लिम बालिका क लेल शुरू भेल विशेष छात्रवृत्ति योजना सेहो नहि पचि रहल छैन। सवाल उठैत अछि जे बिहार मे मुस्लिम आबादी काफी अछि आ सबहक मानब अछि जे ओकर विकासक बिना बिहारक विकास संभव नहि अछि। एहन मे सरकारक एहि प्रकारक योजना कए विरोध एक प्रकार स बिहारक विकासक विरोध अछि, जे कोनो हालत मे स्वीकार नहि कैल जा सकैत अछि।
जहां तक तोगडिय़ा क सवाल अछि, ओ लोक कए जोड़ब त छोडू भगवानो कए बटबारा करबा मे विश्वास रखैत छथि। तोगडिय़ा हिंदू धर्म संस्कृतिक अनुरूप सीता-राम या राम-जानकी सन संबोधन करबा मे विश्वास नहि रखैत छथि। सीताक धरती पर जा जयश्री रामक नारा लगा प्रवीण तोगडिय़ा राम स सीता कए अलग करि इ साबित करि देलथि जे ओ राम कए सीताक संग स्वीकार नहि करैत छथि। मिथिला विरोधी मानसिकताक परिचय देलाक बावजूद अगर ओ ससम्मन बिहार स लौट एलाह त इ बिहार क अतिथि देवो भव: क मान्यताक सबस पैघ सबूम अछि। दरअसल प्रवीण तोगडिय़ा सन लोक कए विवाद मे रहब उपलब्धि बुझाइत छैन, मुदा एहि लेल बिहारक संस्कृति स खेलबार बर्दाश्त नहि कैल जा सकैत अछि। अयोध्याक घटनाक बाद कइ बेर बिहार आ बिहारीक परीक्षा लेल गेल आ सांप्रदायिक सद्भाव कायम राखि बिहारी अपन महान परंपरा कए कायम रखबा मे सफल रहल। मुदा तोगडिय़ा सन लोक क इ पता नहि कहिया दिमाग मे घुसत जे बिहार गुजरात नहि छी। नरेंद्र मोदी आ सुशील मोदी मे ओतबे अंतर अछि, जेतबा वाजपेयी आ अडवानी मे।
राजनीतिक सोच, सामाजिक विकास आ सांप्रदायिक सौहार्दक मामला मे बिहार शुरू स देशक आदर्श रहल अछि। एहन मे बिहारक कोनो नेता चाहे ओ लालू होइत, पासवान होइत आ फेर नीतीश तोगडिय़ा या गुजरातक कोनो नेता स सिखबाक आवश्यकता नहि अछि। गांधी स ल कए एखनि धरि कौन एहन आंदोलन भेल अछि जेकर मातृभूमि बिहार नहि रहल अछि। देश कए दिशा पहिनो बिहार दैत छल एखनो बिहार द रहल अछि। कहल जाइत अछि जे बिहार जे आइ करैत अछि देश दस सालक बाद करैत अछि। आइ हम आंखि बंद करि लेने छी, कान झांपि लेने छी, नहि त साफ देखबा आ सुनबा मे आबि रहल अछि जे बिहार दू टा एहन आंदोलनक अगूआ भ रहल अछि, जे आगू जा कए देश कए दिशा देत।
राजनीतिक अपराधीकरण जनक रहल बिहार आब देश कए एकरा स छुटकारा पेबाक बाट देखा रहल अछि। 2005क चुनाव मे अपराधी स भरल बिहार विधानसभा कए अपराधी छविक लोक स मुक्त करबाक आंदोलन शुरू भेल। चुनाव परिणाम सामने अछि। अपराधी छविक लोक विधानसभा त नहि पहुंच सकलाह, मुदा जेल जरूर पहुंच गेलाह अछि। जखन कि आई उप्र सन अनेक राज्य एहन अछि, जाहि ठाम पैघ संख्या मे अपराधी छविक लोक विधानसभाक माननीय सदस्य बनल छथि। एहि ठाम हम झारखंडक गप नहि करब, किया कि ओ बिहार स अलग भेलाक बाद एकटा राष्टï्रीय समस्याक रूप मे सामने आयल अछि। भ्रष्टïाचार, अपराधक आ नक्सलवाद क सबटा रिकार्ड आइ ओ अपन नाम कए चुकल अछि। बिहार स अलग भेला पर झारखंड मे दिवाली मनल छल, आइ झारखंड मे खूनक होली मनाउल जा रहल अछि।
परिवारवाद देशक राजनीतिक लेल पैघ समस्या बनि चुकल अछि। महाराष्टï्र चुनाव मे हम एकर सबस गंदा नमूना देखलहू अछि। देश मे कई टा दल आइ परिवारक कुनबा बनल अछि। एहन मे परिवारवादक खिलाफ जदयूक घोषणा बिहार स शुरू भेल दोसर आंदोलन कहल जा सकैत अछि। कांगेे्रस ‘युवराजÓ राहुल गांधी तक जदयूक एहि फैसला क प्रसंशा केलथि अछि। ओ मानलथि जे कांग्रेस मे परिवारवाद अछि। मुदा लोजपा, सपा सन किछु पार्टी त परिवार स आगू आइ धरि नहि बढ़ल।
सवाल उठैत अछि जे इ समस्या गंभीर किया भेल। बिहार स पैदा भेल एहि समस्या पूरा देश ग्रसित अछि। कोनो राज्य एकरा स छुटकारा लेल प्रयास किया ने केलक। फेर बिहार क धरती स एकर निराकरणक प्रयास किया भ रहल अछि। तोगडिय़ा सन नेता कए इ बुझबाक चाही जे बिहार अपन इलाज करै जनैत अछि आ हुनका सन डॉक्टरक कम-स-कम बिहार कए जरूरत नहि छैक। अगर ओ अपन ज्ञान मे बढ़ोतरी करि लैथि, त एहि रामभक्त कए बिहार मे स्वागत अछि।

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