“डॉल्फिन दिवस” : औपचारिकता मात्र नहि रही जाए इ दिवस

नई दिल्‍ली। दुनियाक दुर्लभ प्राणी मे स एक वा विलुप्तप्राय गैगेटिक डॉल्फिन कए राष्ट्रीय जल जीव घोषित भेना तीन साल बीत गेल छल, मुदा बिहार मे डॉल्फिन क तादात लगातार कम भ रहल छल। आब बिहार सरकार सेहो डॉल्फिन संरक्षणक लेल हरेक साल पांच अक्टूबर क दिन “डॉल्फिन दिवस” मनेबाक निर्णय लेलक। आइ एहि दिवस पर डॉल्फिन क संरक्षणक संकल्‍प मात्र औपचारिकता मात्र नहि रहि जाए।
इ सच अछि जे डॉल्फिन क तादात मे लगातार भ रहल कमी क वजह ओकर लगातार भ रहल शिकार वा गंगाक प्रदूषण बताओल जा रहल अछि। ओना सरकार आब डॉल्फिन कए बचेबा लेल पटना मे एशिया क पहिल डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र खोलबाक योजना सेहो बनेलक अछि।
केंद्र सरकार 2009 मे “भारतीय वन्य जीव संरक्षण निति’ क तहत डॉल्फिन कए सुरक्षा प्रदान केलाक बादो बिहारक गंगा नदी मे एकर सुरक्षा लेल कोनो खास प्रयास नहि कएल जा रहल अछि। गंगाक जलस्तर घटला स ओही म भेल गंदगी स पर्यावरण वैज्ञानिक सेहो समय-समय पर चिंता प्रकट केने छथि। जलस्तर घटला स डॉल्फिनक शिकार क संभावना बढि जाएत अछि।
राज्यक उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कहलथि की बिहार मे दू अक्टूबर स व्यापक रूप स वन्य प्राणी सप्ताह मनायल जा रहल छल। पटना मे गंगा क डॉल्फिन बला क्षेत्र कए डॉल्फिन वाच सेंटरक रूप म विकसित करेबाक योजना अछि। कनाडा आर जापान क व्हेल वा डॉल्फिन दर्शन केंद्र क तर्ज पर एकरा विकसित कैल जाएत।
मोदी कहलथि जे हरेक साल पांच अक्टूबर कए डॉल्फिन दिवस मनाओल जाएत। जाही क तहत लोक सबहकए डॉल्फिन क प्रति जागरूकता करबा लेल एकटा कार्यशालाक आयोजन कैल जाएत, एही मे मछुआरा सहित आम लोक कए सेहो डॉल्फिन क बारे मे जानकारी देल जाएत।
विशेषज्ञ बताबैत छथि जे सोंसे देश मे डॉल्फिन क संख्या 1800 अछि जाही म स खाली बिहार मे 1200 स 1300 डॉल्फिन अछि।
ज्ञात होए जे एकरा सुरक्षा प्रदान करेबा लेल सरकार 1991 मे बिहार मे सुल्तानगंज स ल कए कहलगांव तक करीब 60 किलोमीटर क्षेत्र कए ‘गैंगेटिक रिवर डॉल्फिन संरक्षित क्षेत्र’ घोषित केलक अछि जाहि क बादो डॉल्फिन क शिकार मे कमी नहि आएल अछि।
डॉल्फिन संरक्षण लेल भारत सरकार द्वारा गठित सलाहकार समिति क अध्यक्ष आ पटना विश्वविद्यालय क जीव विज्ञान विभाग क विभागाध्यक्ष डॉं आर के सिन्हा बतेलथि जे डॉल्फिन मे एकटा विशेष प्रकारक तेल होएत अछि। ई तेल कोनो डॉल्फिनक वजन क 30 प्रतिशत होएत अछि।
एही तेलक गंध स आन मछली ओकर दिस आकर्षित होएत अछि। मछुआरा अपन जाल मे एही तेलक प्रयोग करैत अछि, ताहि कारण स डॉल्फिन क शिकार होइत अछि। ओ बतेलथि जे आब भारत मे 2000 स कम डॉल्फिन बचल अछि। डॉल्फिनक कमी गंगा प्रदूषण क सबसे पैघ कारक अछि। ओ कहलथि जे गंगाक घटब जलस्तर कए रोकब एकटा पैघ चुनौती अछि।
गौरतलब अछि जे फरवरी 2012 मे योजना आयोगक अध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया अपन बिहार दौरा क दौरान गंगा क सैर पर निकलल रहथि। तखन ओ डॉल्फिन क अटखेली देखने छलाह आ तखने ओ घोषणा केने रहथि जे एहि ठाम डॉल्फिन अनुसंधार केंद्र खोलब।
सिन्हा कहैत छथि जे बिहार सरकारक पहल पर बनि रहल ई एशिया क पहिल अनुसंधान केंद्र होएत। ओ कहलथि जे केंद्र डॉल्फिन आ एकर किछु प्रजाति क बचेबाक तरीका खोजत।
गैंगेटिक डॉल्फिन स्वच्छ पाइन मे पाओल जाए बला चारि टा प्रजाति मे स एक अछि, डॉल्फिन स्तनधारी जीव अछि जे सिटेसिया समूहक सदस्य अछि। आम बोलचाल क भाषा मे एकरा सोंस वा गंगा गाय क नाम जानल जाएत अछि। तिरहुत राज (दरभंगा राज) एकरा अपन राज्‍य चिन्‍ह बनौने छल।
जानकार कहैत छथि जे एकटा पूर्ण व्यस्क डॉल्फिन क लम्बाई दू स 2.70 मीटर होएत अछि, जखनकि एकर वजन 100 स 150 किलोग्राम होएत अछि। मादा डॉल्फिन नर डॉल्फिन स अपेक्षाकृत पैघ होएत अछि। दूनू जबड़ा मे 130 स 150टा दाँत होएत अछि। डॉल्फिन क विकास क क्रम मे एही मे चमगुदड़ी क जेना सूक्षम ‘इको लोकेशन सिस्टम’ क विकास होएत अछि जे ध्वनि क आधार पर दिशा क अनुमान लगबैत अछि आ अपन शिकार तकैत अछि।

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