जर्मनीक स्कूल मे पढाउल जाएत दरभंगाक अमितक किताब

4259_0दरभंगा। मैथिली मे रसायन शास्त्र क किताब लिखनिहार दरभंगाक प्राध्यापक प्रेम मोहन मिश्रा क पुत्र अमित रंजन क गरीब बच्चा पर लिखल एकटा आलेख जर्मनी क स्कूली बच्चा सब पढ़त। वेद-पुराण मे तक जर्मनी क लोक मे जिज्ञासा रहल अछि, मुदा एकटा इंजीनियर क लिखल आलेख एखन चर्चा मे बनल अछि। एहि आलेख भारत मे गरीब क जिनगी, खास क बच्चा क संबंध मे जानकारी देल गेल अछि। बिहार क दरभंगा क रहनिहार अमित रंजन फिलहाल बी टेक फाइनल इयर क पढ़ाई क रहल छथि। अमित कए सेहो इ अंदाजा नहि छल जे गरीब क हालत पर लिखल गेल हुनकर इ आलेख एतबा चर्चित होएत। जर्मन एजुकेशन पब्लिशर कए अमित क आलेख एतबा नीक लागल जे ओ ओकरा दसवीं क बच्चा क अंग्रेजी पाठ मे शामिल क लेलक अछि। आर्टिकल क टाइटल अछि: ए ड इन लाइफ आॅफ स्लम ड्वेलर्स। किताब एहि मासक छपि कए आबि जाएत। एकर एवज मे अमित कए 28 डॉलर क भुगतान सेहो कैल गेल अछि। एकर संबंध मे जमर्न एजुकेशन पब्लिशर इवा मेएर करार केलक अछि। अमित कहैत छथि – लेखन कए आजुक युग मे कॅरियर बनाउल जा सकैत अछि। अमित क पिता प्रेम मोहन मिश्रा सेहो मानैत छथि जे दरभंगा मे साहित्यिक माहौल अछि। साहित्य स जुडल लोक क नियमित बैसार होइत अछि। कहानी-कविता पर विमर्श करैत करैत हम सब जीवन जीलहुं अछि। अमित कए सेहो लिखबाक संस्कार दरभंगा क एहि माहौल मे भेटल। जखन ओ स्कूल मे छल तखन स कविता लिख रहल अछि।
वेक इंडिया नाउ नाम स अमित क एकटा ब्लाग अछि जे जुलाई 2011 स लिखल जा रहल अछि। इ अंग्रेजी क ब्लाग अछि आ युवा अलग-अलग मुद्दा पर अपन राय रखैत छथि। हाल मे हिंदी मे जागो भारत नाम स हिंदी क ब्लॉग सेहो शुरू कैल गेल अछि। एकटा सवाल क जवाब मे अमित कहला जे चेतन भगत कए ओ पढ़ैत छथि। मुदा हिंदी क मशहूर कवि नागार्जुन कए नहि पढबाक हुनका दुख जरूर अछि।

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