छुतहा देह रहल आत्‍माक करीब

प्रकाश झा
मैथिली भाषा क सुप्रसिद्ध लेखक महेन्द्र मलंगिया द्वारा लिखित नाटक छुतहा घैल क मंचन दिनांक 16 अक्टूबर, 2011 कए तालकटोरा स्टेडियम क सुरताल खुला मंच पर भेल। इ आयोजन दिल्ली सरकार क लोकोत्सव आयोजन क हिस्सा छल जाहि मे मैथिली – भोजपुरी अकादेमी द्वारा दू दिन क आयोजन कैल गेल। पहिल दिन भोजपुरी मे संजय उपाध्याय निर्देशित लोकनाटक विदेसिया त दोसर दिन संजय चौधरी निर्देशित नाटक छुतहा घैल क मंचन कैल गेल।
नाटक छुतहा घैल मे नाटककार मलंगिया समाज मे महिला क स्थिति कए केन्द्र मे रखलथि अछि। इ नाटक मिथिला मे प्रचलित लोककथा क प्रणेता गोनू झा क कथा पर आधारित अछि। मलंगिया जी क संवाद क तेवर एहि नाटक मे सेहो व्याप्त अछि। नाटक मे पर्याप्त लोकोक्तिक उपयोग भेल अछि।
छुतहा घैल नाटक क प्रसिद्धिक आलय इ अछि जे इ नाटक अपन प्रकाशन स पूर्वहि किशोर केशव क निर्देशन मे पटना क रंगमंच पर मंचित भ चुकल छल। एकर बहुत दिनक बाद नाटक क प्रकाशन 2010 मे मैलोरंग प्रकाशन द्वारा कैल गेल। मिथिला क गाम गाम मे इ नाटक अपन प्रस्तुति क पचास क आँकड़ा पार करि चुकल अछि।
मिथिलांगन संस्था सेहो छुतहा घैल क प्रस्तुति पहिने कए चुकल अछि। इ ओकर दोसर मंचन छल आ एकरा देखि कए लगैत अछि जे नाट्य प्रस्तुति मे उत्तरोत्तर गुणवत्ता समाहित होइत जा रहल अछि। मलंगिया जी क नाटक क खूबी ओकर तीक्ष्ण आ छोट – छोट संवाद होइत अछि। हिनकर नाटकक यैह विशेषता नाटक कए सर्वप्रिय बना दैत अछि। एकर दोसर पक्ष इ सेहो अछि जे प्रशिक्षित अभिनेता कए सेहो सिद्दत क संग बेसी स बेसी पूर्वाभ्यास करै पडैत अछि। जे एहि मंचन मे सेहो देखबा मे भेटल। एहि प्रस्तुति मे मंच पर कुमार शैलेन्द्र, शुभनारायण आ कल्पना मिश्रा सन वरीष्ठ रंगकर्मी कए देखि कए हर्दिक खुशी भेल। उम्र क एहि पड़ाव मे आबि कए सेहो मंच पर हिनकर उर्जा देखि कए दर्शक लोकनि अचम्भित छलाह।. नव अभिनेता / अभिनेत्री कए एहन रंगकर्मी स प्रेरणा लेबाक चाही। एकटा बेहतरीन प्रस्‍तुति लेल निर्देशक संजय चौधरी क संगहि सबटा अभिनेता / अभिनेत्री आ मिथिलांगन परिवार कसंग मैथिली – भोजपुरी अकादमी, दिल्ली सरकार कए बधाई।
लेखक भारतीय नाट्य संघ’क संयुक्‍त सचिव आ मैलोरंग क निदेशक सचिव छथि।

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