मलंगिया महोत्‍सव देखबा लेल अउताह नेपालक राष्‍ट्रपति


नई दिल्‍ली। मैथिली क लोकरंग संस्‍था मैलोरंग एकटा इतिहास रचबा लेल तैयार अछि। भारत में पहिल बेर कोनो मैथिल सांस्‍कृतिक संस्‍थाक कार्यक्रम मे कोनो आन देशक राष्‍ट्राध्‍यक्ष एबाक स्‍वीकृति देलक अछि। इ’समाद कए भेटल खास जानकारी क अनुसार मैलोरंग क प्रस्‍तावित महेंद्र मलंगिया नाट़य महोत्‍सव कए देखबा लेल नेपालक राष्‍ट्रपति महामहिम रामबरण यादव अउताह। नेपाल दूतावास एकर पुष्टि क देलक अछि। मैलोरंग स भेटल जानकारी क अनुसार महामहित राष्‍ट्रपति 28 तारीख कए महोत्‍सव मे देखबा लेल अउताह। ज्ञात हुए जे महामहित राष्‍ट्रपति 25 दिसंबर कए भारत आबि रहल छथि हुनकर दिल्‍ली सहित बनारस जेबाक सेहो कार्यक्रम अछि। मैलोरंग क अनुसार 28 तारीख कए महेंद्र मलंगिया नाट़य महोत्‍सव तहत हुनक लिखल ओकरा आँगनक बारहमासा नाटकक होएत। एहि नाटकक मंचन मिथिला नाट्यकला परिषद, जनकपुर, नेपाल करत तथा एहि नाटक क निर्देशन रमेश रंजन करताह। महेंद्र मलंगिया लिखित एहि नाटक कए देखबा लेल नेपालक राष्‍ट्रपति समेत नेपाल आ भारत क कईटा गणमान्‍य लोक प्रेक्षागृह मे उपस्थित रहताह। मैथिली नाटकक इतिहास मे इ एकटा पैघ उपलब्धि होएत।
नाटकक संबंध मे संस्‍थाक प्रमुख प्रकाश झा कहला जे ओकरा आँगनक बारहमासा मे मिथिला क दलित समुदाय क मजदूर क साल भरि यानी बारह महीना क दयनीय आर्थिक विप्पन्नता क स्थिति क चित्रण अछि। इ चित्रण ओहि समय क अछि जखन दिन भरि क मजदूरी मे मात्र तीन किलो (लगभग) धान आ कोनो दोसर अन्न भेटैत छल। मजदूरी क कार्य सेहो प्रति दिन नहि भेटैत छल। ओहि मजदूरी मे कपड़ा – लत्ता, दवाई – दारू, मर – मसाला कीनब कठिन नहि बल्कि असभंव छल। अत: बिछानक बदला मे पुआर पर सुतब, मालिक स फाटल – पुरान कपड़ा माँगब, दू – चारि सेर अन्न या दू – चारि टका लेल हाथ पसारब ओकर नियति भ गेल छल। जेकर उदाहरण नाटक क मुख्य पात्र मल्लर अछि। जेना मरुभूमि मे मृग पाइन तकबा मे अपस्यांत भ कए मरि जाइत अछि तहिना एहि समाज क लोक धन कमेबा लेल शहर जाइत अछि आ खाली हाथ लौट अबैत अछि। एहन विकराल परिस्थिति मे कम उम्र मे मल्लर सन लोक जे परिवार क मुखिया होइत अछि, मरि जाइत अछि। एहि दयनीय स्थिति मे सेहो गामक मालिक ओकर कनिया – बेटी क इज्जत हरण लेल ललायित रहैत छथि।
दुखित मल्लर जखन मरनासन्न अवस्था मे होइत अछि त ओकर मात्र एक टा इच्छा रहैत अछि जे ओ छौंकल दालि – भात खइते, मुदा ओकर इ अंतिम इच्छा सेहो पूरा नहि भ सकल। एतबे नहि मरलाक बाद जमीन, लकड़ी आ नकदी क अभाव मे मल्लर कए मुँह मे मुखबती मात्र लगा कए नदी मे भँसा देल जाइत अछि। यैह ओइ दलित समुदाय क लगभग प्रत्येक परिवार क बारह महीना छी।
ज्ञात हुए जे दिल्‍ली मे 24 स 30 दिसंबर, 2012 तक मलंगिया नाटय महोत्‍सव क आयोजन होएत। मैथिली रंगमंच मे एहि प्रकारक इ पहिल आयोजन थिक जे कि कोनो एकटा नाटककार महेंद्र मलंगिया क चर्चित कईटा नाटक देखबाक अवसर देत। एहि महोत्‍सवक आयोजन मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) संस्‍था क रहल अछि। संस्‍थाक निदेशक प्रकाश झा क अनुसार नई दिल्‍ली क मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर मे प्रतिदिन सांझ 6.30 बजे स नाटक क आयोजन होएत।

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1 टिप्पणी

  1. Bahut bahut dhanyabad esamad ke je hamar sabahak prayas ke etek sthan daet chhath. Ashish ji, kumud ji aa bhai sunul ji ke mailorang pariwar aavari
    Chhani.

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