गरीबी पर भ्रम पैदा करबाक कोशिश

पटना। गरीबी पर नव सिरा स शुरू भेल चर्चा कए आगू बढ़वैत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहलथि जे गरीबी क मामला मे इ भ्रम पैदा करबाक कोशिश कएल जा रहल अछि जे गरीबी खत्म भ रहल अछि। कहियो कैलोरी त कहियो डॉलर क गप कहि कए गरीबी रेखा स नीचा रहै वाला लोक क सूची तय करबाक गप होइत अछि। मुख्यमंत्री कहलथि जे दरअसल गरीबी रेखा स नीचा रहै वाला लोक क संख्या तय करबाक केंद्र क जे पैमाना अछि, ओ सब तरह स गलत अछि। स्थानीय तारामंडल मे आयोजित एकटा कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री इ गप कहलथि। ओ कहला जे बीपीएल सूची कए लकए भेल गहन सर्वेक्षण क क्रम मे बिहार मे 1.22 करोड़ लोक कए गरीबी रेखा स नीचा पाउल गेल। इ गहन सर्वेक्षण क बाद इ शिकायत रहि गेल जे पैघ संख्या मे नाम छूटि गेेल अछि। नाम छूटै कए 60 लाख टा शिकायत आएल। एकर जांच भ गेल अछि आ आब 20 लाख अतिरिक्त बिहार मे गरीबी रेखा स नीचा रहनिहार लोक कए सूची मे जुड़ जाइत। एहि तरह स लगभग डेढ़ करोड़ टा लोक गरीबी रेखा स नीचा रहनिहार लोक क सूची मे शामिल भ जाइत। इ स्थिति तखन अछि, जखन केंद्र द्वारा निर्धारित लाइन पर सर्वे भेल अछि।
गरीबी रेखा स नीचा रहनिहार लोक क बारे मे गप करैत मुख्यमंत्री केंद्र क रवैया पर सेहो खूब निशाना सधलथि। ओ कहला जे विचित्र स्थिति अछि। पहिने ओ संख्या तय करि देइत अछि जे बिहार मे एतबै लोक गरीबी रेखा स नीचे अछि आ फेर हम कहैत छी जे हुनकर पहचान करू। इ उचित नहि अछि। केंद्र जखन संख्या तय करि रहल अछि तखन ओ इ चिन्हित सेहो करे जे गरीब के अछि। केंद्र क हाउसहोल्ड सर्वे स बेसी एहि ठाम गरीब अछि।
अखिनो एनसी सक्सेना क कमेटी इ तय करबाक लेल बनल अछि जे गरीब कोन अछि। हाल मे श्री सक्सेना बिहार सेहो आएल छलाह। श्री सक्सेना क संग हुनका इ मसल पर गप भेल छल। ओना गरीबी मपबाक तरीका पर किछु दिन पहिने पटना मे ओ इ क्षेत्र क विशेषज्ञ क एकटा पैघ सेमिनार सेहो करेने छल, जेहि मे इ गप प्रमुखता स रखल गेल छल जे केंद्र क जे पैमाना अछि, ओ गलत अछि।
केंद्र द्वारा योजना मे भेदभाव आ नीति तैयार करबा मे सेहरा लेबाक प्रवृत्ति पर सेहो मुख्यमंत्री खूब कहलथि। मुख्यमंत्री कहला जे हर बेर इ तय होइत अछि जे राज्य मे केंद्र प्रायोजित योजना क संख्या कम होइत, मुदा केंद्र लगातार केंद्र प्रायोजित योजना क संख्या बढ़ा द रहल अछि। एहि तरह जखन कोनो नीति बनबाक होइत अछि त ओकर सेहरा ओ खुद ल लेइत अछि आ जखन कोनो समस्या पैदा होइत अछि त ओ राज्य क दोष ठहरा देल जाइत अछि। संघीय ढांचा मे एहि तरह क प्रवृत्ति ठीक नहि अछि।

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