कोनो भाषा कए भूगोल मे नहि बंधबाक चाही : नचिकेता

सुनील कुमार झा
नई दिल्‍ली।
प्रख्‍यात शिक्षाविद उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’ कहला जे मैथिल कए हिंदी लेल राग द्वेष क भाव नहि रखबा चाही, कोनो भाषा कए भूगोल मे नहि बंधबाक चाही। इंडिया हैबिटेट सेंटर मे आयोजित बोली भाषा महोत्सव ‘समन्वय-2012’ मे प्रेम क अनुरूप भाषा : भाषा क अनुरूप प्रेम विषय पर आयोजित संवाद कए संबोधित क रहल छलाह। एहि कार्यक्रम क मुख्य वक्ता उदयनारायण सिंह कहला जे कोनो लेखक कोनो खास भाषा आ संस्कृति टा पर नहि लिख सकैत अछि। ओ कहला जे एकटा लेखक अनेक भाषा मे लिख सकैत अछि, दोसरक संस्कृति आ समाज कए प्रस्तुति क सकैत अछि, मुदा अपन संस्कार कए संग ल कए सेहो इ काज भ सकैत अछि।
कर्यक्रम कए संबोधित करैत विभा रानी कहलथि जे मिथिला क महिला ‘सीता’ क कारण चुप छथि, सीता हुनका सब लग एकटा एहन चरित्र-चित्रण प्रस्तुत केने छथि जे मिथिला क महिला अपन भूमिका सेहो ओहने रहै चाहैत छथि। मैथिली मे महिला लेखन पर ओ कहलथि जे मैथिली क महिला लेखन अलग अलग रंग क साथ मुखर रहल अछि। ओ सागर राति दीप जरय पर सेहो चर्चा केलथि आ एकर महत्ता कए बतेलथि।
ओतहि गजेन्द्र ठाकुर विद्यापति क विभिन्‍न रूपक चर्चा केलथि। गजेन्द्र ठाकुर नव-नव कलाकार क काव्य क पाठ सेहो केलथि संगहि मैथिली मे संबोधन करनिहार एक मात्र वक्‍ता रहलाह। बहुभाषीय सभागार मे बाकी वक्ता हिंदी वा अंग्रेजी भाषा क प्रयोग केलथि।
देवशंकर नवीन प्रेम पर जतए विद्यापति क ‘देसिल बयना सब जन मिट्ठा पर’ प्रकाश देलथि आ कहला जे मैथिली क साहित्य एहि कम समय सीमा मे परिभाषित नहि कैल जा सकैत अछि मुदा फेर सेहो आयोजक कए आभार व्यक्त केलथि जे 60टा भारतीय भाषा आ बोली क बीच मैथिली कए जगह देल गेल, कर्यक्रम क अंत मे देवशंकर नवीन समन्वय टीम क आभार सेहो व्यक्त केलथि।
सूत्रधार क भूमिका मे अरविन्द बहुत जंचलाह, ओ नहि केवल, दर्शक क बीच दू-भाषिया क काज केलथि बल्कि वक्ता क प्रस्तुति कए सरल रूप मे श्रोता तक अनबाक सेहो काज केलथि।
एहि स पूर्व इंडिया हैबिटेट सेंटर मे आयोजित बोली भाषा महोत्सव ‘समन्वय-2012’ मे मशहूर नृत्यांगना शोभना नारायण मैथिली क महान कवि विद्यापति क पद पर अपन मोहक प्रस्तुति दकए दर्शक क मन मोहि लेलथि। कवि विद्यापति क लोकप्रिय मैथिली पद मे स एक भैरवी स्तुति आ राधा कृष्ण क प्रेम क गीत पर शोभना बेमिसाल प्रस्तुति देलथि। एहि मोहक प्रस्तुति स जतए दर्शक कए क्षेत्रीय भाषा स साक्षात रू-ब-रू करौलथि ओतहि हुनकर नृत्य शैली लोक कए भावविभोर क देलक। हुनकर प्रस्तुति ‘सरस बसंत भय भाल पावल’.. आ ‘हटलो न त्रिपुरारी हे, बिपति बर भारी’.. सन पद कए लोक खूब सराहलक।
कुल मिलकर ‘समन्वय-2012 बहुत नीक रहल। एक दिस जतए समय क कमी खलल ओतहि श्रोता क अनुपस्थिति एकर अस्तित्व पर सवाल ढार क देलक। श्रोता क उपस्थिति नगण्य छल आ किछु जे सभागार मे देखा रहल छलथि ओ अन्य भाषा क कार्यक्रम क बाट ताकि रहल छलथि। मैथिली क ललक लेल ओहि ठाम आंगुर पर गिनल लोक छल।
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2 टिप्पणी

  1. श्रोता क उपस्थिति नगण्य छल आ किछु जे सभागार मे देखा रहल छलथि ओ अन्य भाषा क कार्यक्रम क बाट ताकि रहल छलथि। मैथिली क ललक लेल ओहि ठाम आंगुर पर गिनल लोक छल।- Jakhan anek maithil waktaa me kewl ek maithilee me bajalaah ohen thaam maithilk upsthiti kiyaik ho?

  2. भाषाविद सभ के अप्पन एक राय कायम करबाक चाही|

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