की विलुप्त भ जाएत “मैथिली”

सुनील कुमार झा
सुनबा मे अजीब सन लागि सकैत अछि आओर शायद कनि कटू सेहो लागि सकैत अछि मुदा भारतीय जन भाषाई सर्वेक्षण क पहिल रिपोर्ट स त किछु एखने प्रतीत भ रहल अछि। करीब तीन सौ स बेसी भारतीय भाषा दम तोडि चुकल अछि। किछु भाषा आईसीयू मे पडल अपन अंतिम साँस गिन रहल अछि। मुदा मैथिली क स्थिति आन भाषा स विपरित अछि एकरा लगातार तोडल जा रहल अछि। एहि दिस मिडिया क ध्यान त नहिये अछि पश्चिमी सभ्यता क रंग मे रंगल समाज सेहो अनभिज्ञ भ गेल अछि। भाषा मानव संचार क मूल आधार अछि, मुदा फेर इ सेहो लगैत अछि जे एहि तरह क निर्मोही दृष्टि स जेना 2150 स बेसी समृद्ध भाषाई क्षेत्र वाला इ देश मे एकर कोनो महत्व नहि रहत।
आइ स किछु 80 वर्ष पहिने भारत क पहिल भाषाई सर्वेक्षण भेल छल। अंग्रेज अधिकारी जोर्ज ग्रियर्सन क अगुवाई मे भेल सर्वे क अनुसार मैथिली बिहार आओर आजुक झारखण्ड मे प्रमुखता स पसरल भाषा छल। जेकरा मानवी स्वार्थ आओर राजनैतिक कलह क कारण विभिन्न भाषा (जेकि क्षेत्र विशेष क आधार पर विकसित कैल गेल) मे बांटल जा रहल अछि। एकटा अखंड मैथिली तोडि-तोडि कए अंगिका, बज्जिका आओर न जानि की की बनेबाक प्रयास कैल गेल। ओना ग्रियर्सन क बाद एहि भाषा क सुध लेनिहार कियो नहि भेलाह, किछु छिटपुट काज भेल, मुदा राजनैतिक आस्थिरता आओर साहित्‍य मे कलह क कारण ओ कोनो प्रभाव नहि छोडि सकल। आब करीब आठ दशक बाद भारतीय जन भाषाई सर्वेक्षण ( पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ़ इंडिया) भाषा पर एक बेर फेर गंभीर काज केलक अछि। इ छह खंड मे अपन पहिल रिपोर्ट प्रकाशित केलक अछि, जे कि भारतीय भाषा क किछु अनछुअल पहलु कए उजागर करैत अछि। सर्वे क अध्यक्ष गणेश देवी क अनुसार भारत क 20 प्रतिशत भाषा विलुप्त भ चुकल अछि। एखन धरि केवल ग्यारह राज्‍य मे भेल सर्वेक्षण क इ परिणाम अछि। एहन मे इ अपूर्ण रिपोर्ट कहैत अछि जे करीब 310 स बेसी भाषा विलुप्त भ चुकल अछि आ छह सौ स बेसी भाषा अपन अंतिम पड़ाव मे अछि। इ सब देख सुन कए लगैत अछि जे कहीं अगिला नंबर अपन त नहि? अटल सरकारक अथक प्रयास क फलस्वरूप मैथिली संविधान क आठम अनुसूची मे जगह त पाबि लेलक मुदा राज्‍य सरकारक बेरुखी आ मैथिली कए खंडित करबाक कुचक्रक मे भागीदार बनि कहीं हम एहि भाषा कए लुप्‍त करबाक काज त नहि करए जा रहल छी।
जनगणना क अनुसार सेहो भारतीय भाषा क ग्राफ देखब त ओ सेहो कम नहि चौकायत, 1961 क जनसँख्या क अनुसार 1652 मातृभाषा दर्ज कैल गेल अछि, जे 1971 क जनगणना तक केवल 109 रहि गेल। इ आंकडा शर्मनाक कहल जा सकैत अछि। मैथिल समाज मे पसरि रहल बहुभाषी संस्‍कृति क कारण बिहार-झारखण्ड सन गढ़ मे सेहो लोक अपन मातृभाषा हिंदी दर्ज करा रखने छथि, जखनकि मैथिली सूची स गायब करि देल गेल। आइ स्थिति इ भ चुकल अछि जे हमर बीच भाषाई अंतराल एतबा बढि गेल अछि जे हम कोनो भाषा (अपन मातृभाषा त कए) क एक वाक्य पूरा-पूरा आओर शुद्ध-शुद्ध लिख या बाजि नहि सकैत छी।
भाषा क सम्बन्ध मे भेट रहल लगातार जानकारी कही इ चेतावनी त नहि द रहल अछि जे अगिला नंबर हमरे छी। की मैथिली सेहो इतिहास बनि कए रहि जाएत, कही एहन त नहि जे मैथिली क संबंध मे कहल जाए जे इ लुप्‍त भ गेल जखन कि विभिन्‍न रूप मे इ समाज मे अपन यात्रा जारी रखने रहे। जाहि रूप मे मैथिली कए तोडल जा रहल अछि ओहि मे कोनो संदेह नहि जे मैथिली क अस्तित्‍व रहितो कहल जाए जे इ भाषा कहियो अस्तित्‍व, चर्चा आओर चलन मे मौजूद छल ! कनि सोचियउ…?
“मैथिल भ कए जे नहि बजय मैथिली”
” मोन होइत अछि हुनकर कान पकडि कए अईंठ ली”

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11 टिप्पणी

  1. इ बद्द दुःख के खबरि अहि जे अप्पन मातृभाषा मैथिलि विलुप्त हेबाक कगार पर अहि.
    मुदा एकरा लेल हम ही सब जिम्मेबार छि.
    आन राज्य में रहलाक बाद जखन कखनो गाम जैत छि त हिंदी में बजबा में बद्द निक लागैत अहि,मुदा मैथिलि बजबा में लाज होइत अहि.
    गाम घर में हिंदी में बजै बाला पढ़ल लिखल मानल जैत अहि आ मैथिलि बज्नाहर अनपढ़, इ हमर ब्याक्तिगत अनुभव अहि .
    मैथिलि बजला पर कुनो हॉस्पिटल,प्लैत्फोर्म, अथवा कुनु सरकारी संसथान में मैथिलि बजला पर कियो सुना के लेल तैयार नहीं अछि.
    बहरो में एक-दोषर सा गप्प कियो मैथिलि में नहीं का रहल छैथ.
    कुनो मैथिलि कार्यक्रम में भाग नहीं लेत छैथ मुदा भोजपुरी में अधिक सा अधिक मैथिल जैत छैथ हुनका जा कियो मैथिल कहैत छैन ता तमसैत छैथ आ ज बिहारी कहैत छैन ता फूली क खेशारी भा जीत छैथि .
    हम हुनका इ नहीं कहैत chhiyain जे भोजपुरी कार्यक्रम में नहीं जाओ मुदा आपना माँ मैथिलि के लेल टाइम निकालू..
    आ कम सा कम घर में त मैथिलि बजी लिए.

    जय मिथिला जय मैथिलि
    निबेदक

    अमरेश झा मैथिल

  2. Where are Maithili related NGO’s? They should bring a law suit in Supreme Court against Indian Census Bureau , Government of India and Bihar Government against manipulation of Census data since independence. You know it very well that court is the only institution, which can help. Do we have anyone left, after Jaikant Mishra, to lead for Mithila and Maithili cause?

    In parallel, support Mithila state.

  3. It is time for direct action: Let us declare April 30 as Mithila Day.
    Let us demand all Bhopuri speaking and Maghee speaking, governmnet’s class3 and class4 employees to vacate Mithila. We have capable Maithili speaking young man and woman in all the districts of Mithila. We need those jobs for our Mithilabasi. Start challenging policemen, clearks, chaprasis and ask them to vacate Mithila. They are not welcome in Mithila state. They are our enemy#1 and enemy#2.

    • sir It’s my humble request please don’t raise the finger against Bhojpuri or Magahi speakers,they even can speak maithili with any maithili speaking person, and they never oppose us. But, in the race we’ll have to perform well and bring Maithili in the front row. Its we who enlisted “Maithili in 8vi suchi” whereas even being popular the other languages could not make it. “WE RESPECT ALL OTHER LANGUAGES they are the branches of MAITHILI”

  4. मैथिल के द्वारा मैथिलि के कब्र खोदल जेनाई बहुते दुखक बात य,. कहबई जे एकर समाधान की छि? तs हमरा जे सबसs बढियां तरीका लागे यs उ इ की
    १.सब मैथिल आपस मs मैथिलि मs ही वार्तालाप करै के प्रण लियौ
    २. जे मैथिलि जानतो, बजै सs कतरावs ओकरा लज्जित करू
    ३.बाल-बच्चा आ घरक भाषा मैथिलि ही बाजु, मुदा हिंदी-अंग्रेजी तs सीखिए लेत
    ४. अगर अहाँ, मैथिल क्षेत्र सs बहार प्रवास करै छि तs घर मs कम स कम मैथिलि बाजबाक नितानते आवश्यक यs (नै तs जानते छियै, विवाह मs कत्ते दिक्कत होय छै)

  5. एहि आलेख मे मैथिली कए भोजपुरी क विरोध नहि मानल गेल अछि। दरअसल बिहार क इ दूनू भाषा कए खत्‍म करबा लेल लगातार प्रयास भ रहल अछि। समयक मांग अछि जे मैथिली आ भोजपुरी कए एक संग एकर विरोध करबाक चाही। मैथिली आ भोजपुरी मे कहियो मतभेद नहि रहल। हां, एकर बीच मतभेद पैदा करबाक प्रयास होइत रहल अछि। मैथिली कए खतरा भोजपुरी स आ भोजपुरी कए खतरा मैथिली स कहियो नहि रहल आ नहि भ सकैत अछि। ताहि लेल असली दुश्‍मन कए पहचान करि आ ओकर खात्‍मा लेल संगठित हेबाक चाही।

  6. जावत धरि कोनो भाषाकेँ सामाजिक सम्मान नहि भेटत ओकर बाँचब कठिन अछि आ हम मैथिल अपन भाषाकेँ सामाजिक सम्मान नहि द पाबि रहल छी। हमर सभक संकुचित मानसिकता एकटा ओहन भाषाकेँ गर्तमे द रहल छी जे कहियो अपन वैभव स्थिति मे छल जेकर कारण ओ मात्र मिथिला धरि नहि सीमित रही असम, बंगाल आ नेपाल धरि अपन स्थान बनौने छल। मुदा आइ देखि सकैत छी जे अपन घरमे मैथिली उपेक्षित बनल अछि आ एहि लेल सरकार सँ बेशी हमरा लोकनि स्वयं जिम्मेवार छी कारण सरकार पर दवाब बनाओल जाइछ मुदा हमरा लोकनिक लेल कोनो गप्प धन्न सन जेकर फल छी आइ मैथिली अपन अस्तित्वक लड़ाइ लड़ि रहल अछि मुदा कि हमरा लोकनि माँ मैथिलीक एहि परिस्थिति पर कोनो कान बात द रहल छी ।

  7. Jabat Mithila rajya nahin banat Maithilik bhala nahin bha sakait achhi. Tathapi e avasyak je vartman sarkar (Bihar evam Jharkhand) sa Maithili ke uchit sthan debak hetu jordaar maang hebak chaahi je nahin bha pabi rahal achhi.

    • जय मैथिलि जय मिथिला ,जय माँ भारती पहिने सन निक परचार परसर भ रहल छाई मैथिलि के और मैथिलि कहियो विलुप्त नै हेती

  8. ham vartmaan me viswas karait chi,jaha tak maithili ke vilupt ke prasn achi,jivait jagait udharan aahi thaam dekhu “commento kich bhai angregi me kaw rahal chati,kyek taw hunka maithili nai aabait chain”khair je kich “lekh ke nichor marmarshparshi achi ai me kono sanka nai,bes…..?

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