एकटा कलंक धोबाक कवायद

पटना। विकास क एहि दौर मे प्रदेश क कई इलाका ऐहन अछि, जेहि ठाम आदमी, आदमी क मैला सिर पर ढोएत अछि। आधुनिक युग मे इ कोनो कलंक स कम नहि अछि, मुदा राज्य सरकार एहि क मिटाब क अभियान मे जुटल अछि। केन्द्रीय कैबिनेट सचिव ऐहि माह इ मसला पर हस्तक्षेप केलाह त सरकार एहि वित्तीय वर्ष मे एहि प्रथा कए समाप्त करबाक वादा करि देलक। आंकड़ा क अनुसार 114 नगर निकाय मे 2323 ऐहन शौचालय अछि, जे शुष्क शौचालय क श्रेणी मे आबैत अछि। एहि मे 848 ऐहन अछि, जेहि ठाम मानव मल कए सिर पर उठाबि करि सफाई कएल जाइत अछि। शेष संडास अछि, जेकरा भरबाक पर मानव सफाई करैत अछि। इ आंकड़ा मे किछु आओर इजाफा भ सकैत अछि।
एहन शौचालय राखब अपराध अछि
एहन शौचालय कए बनेबा आ चालू रखबा कानून अपराध अछि। छह साल पहिने एहि से संबंधित केन्द्रीय कानून कए एहि ठाम लागू कएल जा चुकल अछि। आदेश क उल्लंघन करै वाला कए एक साल क जेल आ दू हजार टका जुर्माना आ दूनू सजा भ सकैत अछि। मुदा एहि मामला मे शायद कोनो टा सजा भेल। सर्वोच्च न्यायालय, मानवाधिकार आयोग आ सफाई कर्मचारी आयोग एकर लगातार मानीटरिंग करि रहल अछि।
पुनर्वास मे बाधक अछि बैंक
केन्द्र सरकार सिर पर मैला ढोबे वाला सफाई कर्मचारी कए पुनर्वास आ आत्मनिर्भर बनबाक लेल कर्ज मुहैया करबाक निर्देश देने अछि। मुदा बैंक कए असहयोग आ योजना क घालमेल क कारण ठोस नतीजा सामने नहि आइत अछि। कर्ज क लेल करीब सात हजार आवेदन बैंक क पास लंबा समय स पड़ल अछि। सरकार आब कर्ज देब क लेल बैंक पर दबाव बनेबाक निर्णय केने अछि। बैंक पहल नहि केलक त अनुसूचित जाति, जनजाति विकास निगम क महिला समृद्धि योजना आ माइक्रो क्रेडिट फाइनांस योजना क तहत 31 दिसंबर तक कर्ज मुहैया कराउल जाइत।
सामाजिक न्याय आ अधिकारिता मंत्रालय बीता माह राज्य सरकार कए पत्र क माध्यम स बतउलक जे हुनका पांव पर खड़ा हेबा क लेल मार्च, 2009 तक बैंक सिर्फ आ सिर्फ 7.5 फीसदी लोग कए कर्ज मुहैया करउलक। जुलाई मे इ बढि़ कए 13.1 फीसदी भेल। केन्द्र क निर्देश छल जे सितंबर तक एहि कए पुनर्वासित करि लेल जाए। बात नहि बनल त केन्द्रीय कैबिनेट सचिव कए हस्तक्षेप करै पड़ल। ओना शुष्क शौचालय क पूरा योजना मेे घालमेल अछि। भारत सरकार शुष्क शौचालय कए समाप्त करेबा लेल समेकित अल्प लागत स्वच्छता अभियान (आईएलसीएस) चालू केने अछि। प्रदेश मे काफी संख्या में ऐहन शौचालय अछि, जे बकेट लैटरिन त नहि, मुदा ओ सीधा नाला, तालाब, खेत मे गिरैत अछि। आईएलसीएस योजना क तहत राज्य क स्टीयरिंग कमेटी हाल क महीना में करीब 75 हजार शुष्क शौचालयों क जलवाही शौचालय मे परिवर्तित करबाक योजना कए मंजूरी देल गेल अछि। 10 हजार टका मे बनै वाला शौचालय मे 75 फीसदी केन्द्रीय मदद क रूप मे भेटत।

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