उत्तर बिहार क बूटि बदलत चिकित्साक दुनिया

मुजफ्फरपुर। सामाजिक आओर राजनीतिक बदलाव क पड़ताल करनिहार लेल बिहार हरदम प्रिय विषय रहल अछि। मुदा आब औषधीय गुणवाला पौध वैज्ञानिक, शोधार्थी आ दवा कंपनी कए खींच रहल अछि। मोटापा, याददाश्त कमजोर होएब आओर शरीर मे कंपन (पर्किसंस) जइसन बीमारी कए दूर करबाक लेल राज्यक बाहर क वैज्ञानिक उत्तर बिहार क विभिन्न जिला मे कोलियस, कचनार, बैकोपा आदि पौध पर शोध मे दिलचस्पी देखा रहल अछि। एहि बीमारी क इलाज क तलाश मे एनसीएल पुणे, जामिया हमदर्द नई दिल्ली आ सिमैप लखनऊ क बिहार विवि स साझेदारी क तैयारी अछि। एहि निर्णय स विश्वविद्यालय बॉटनी विभाग मे सैप अंतर्गत शोध कार्य करि रहल रिसर्च स्कॉलर कए स्तरीय संस्थान क संग जुड़बाक मौका भेटत। ओतहि, एहि पैघ प्रोजेक्ट स औषधीय पौध पर भ रहल रिसर्च मे तेजी आउत। पिछला सप्ताह एहि संस्थान क प्रोफेसर क टीम बिहार विवि आबि कए उत्तर बिहार क बूटी बदलत चिकित्सा दुनिया पौध आ एहि चलि रहल शोध क जायजा सेहो ल चुकल छथि। विश्वविद्यालय क शोधार्थी कचनार, कोलियस आदि पौध कए जैव प्रोद्योगिकी क मदद स लैब मे पैघ पैमाना पर उत्पादन करबाक विधि ताकि रहल अछि। आब एकर रसायन कए अलग करबाक संग जंतु पर एकर प्रभाव आ रोग स मुक्ति दिएबा मे एकर भूमिका पर अध्ययन भ सकत। विश्वविद्यालय कए बॉटनी विभाग क अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार कहलक जे इ विश्वविद्यालय क लेल पैघ उपलब्धि अछि। एकरा लेल बॉटनी विभाग मे अलग स अत्याधुनिक सुविधा स लैस लैब क निर्माण कैल गेल अछि। कईटा पैघ उपकरण खरीदल गेल अछि। कम्प्यूटर आ अन्य उपस्कर क मदद स एहि ठाम कैल गेल प्राथमिक शोध कार्य पर दिल्ली, पुणे आ लखनऊ क संस्थान क प्रयोगशाला मे काज होएत। विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय क डीन डा. एसएन तिवारी कहला जे एहि विश्वविद्यालय प्रयोगशाला कए आओर दुरुस्त कैल जा रहल अछि।

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