इ सशक्तीकरण नहि, विश्वास क अकाल छी

पिछला दू सप्ताह मे बिहार मे दूटा एहन घटना कए अंजाम देल गेल जेकरा महिला सशक्तीकरण नहि बल्कि गरीब आ महिला मे कानून पर स विश्वास उठब कहल जा सकैत अछि। पहिल घटना सीवान क अछि जाहि ठाम एकटा नर्तकी छेड़छाड करबा पर आरोपी कए गोली मारि देलथि। दोसर घटना फुलवारी क अछि जतए एकटा विधवा अपन नुआ मे आगि लगा दुष्कर्मी कए जिंदा जरा देलथि। किछु साल पहिने पूर्णिया मे यौन उत्पीडन क कारण एकटा विधायक कए गोली मारि देल गेल छल। एहि तरहक बढैत घटना बता रहल अछि जे अपराधी कए सजा देबा लेल मान्य संस्था प्रभावहीन भ गेल अछि, लोक कए ओकरा पर स विश्वास उठल जा रहल अछि। अपराधी सरेआम समाज मे अपराध क रहल अछि आ कानून हाथ पर हाथ ध बैसल अछि। धारा क पेंच आ जमानत क दुहारि अपराधी कए कानून क फंदा स बचा रहल अछि। मान्य संस्था अपन दायित्वक निर्भाह करबा मे कतहु नहि कतहु चूकि रहल अछि। एहन मे एहि तरहक घटना समाज मे तामस क नहि बल्कि निराशा क द्योतक अछि। सीवान मे पानक दुकान पर सार्वजनिक रूप स नर्तकी संग जखन छेड़छाड़ भ रहल छल, तखन संसद मे एहन काज लेल सजा कए नरम करबाक दलील देल जा रहल छल। दिल्ली गैंग रेप पर हो-हल्ला क बावजूद एहन घटना मे कोनो कमी नहि आयल अछि। अपराधी पर कार्रवाई क दशा इ अछि जे दरभंगाक दामिनी क आरोपी कए पुलिस एखन धरि पकडि नहि सकल अछि, ओकरा सजा कहिया भेटत इ त भगवान जानथि। इ किछु एहन उदाहरण अछि जे मीडिया मे चर्च कैल गेल अछि। एहन आओर कतेक घटना अछि जाहि मे कानून अपन कोनो भूमिका नहि देखा सकल। एहन मे अगर फुलबारी क एकटा विधवा अपन इज्जत लुटनिहार कए सजा अपन हाथ स द देलक त इ न्यायालय लेल एकटा सबक जेकां अछि। इ घटना साबित करैत अछि जे ओ महिला अपना सन आओर महिला कए बचा लेलक। कारण इ जे ओ कईटा आओर महिला क इज्जत लूटलाक बावजूद जेल क बदला मे समाज मे मौजूद छल। एहन काज कियो ओहिना नहि क लैत अछि, इ बता रहल अछि जे न्याय लेल उम्मीद क आखिरी ईजोत क डिबिया तक मिझा गेल अछि। इ अन्हार क सबूत अछि जे आम आदमी कए किछु देखा नहि रहल अछि ओ अपना लेल न्याय क गुहार करबा लेल कतहु ककरो स न्याय क उम्मीद नहि करैत अछि। अपने हाथ स फैसला क रहल अछि। न्यायालय कए इ सोचबाक चाही जे गरीब आ महिला सन असहाय समाज लग आखिर कोन बाट बचल अछि। गरीब आ महिला लेल भारत मे कानूनी लड़ाई आब एकटा अंतहीन युद्ध भ चुकल अछि। न्याय भेटबा मे देरी आम लोक कए कानून हाथ मे लेबा लेल विवश क रहल अछि। कोर्ट अपने मंथन करै जे कानून हाथ मे लेबा लेल आम आदमी कए मजबूर के क रहल अछि। आइ जेहन परिस्थिति देश मे उपजल अछि ओहि मे एहन काज लेल दोष आम आदमी कए देब कतहु स उचित नहि। त्वरित न्याय एकर एक मात्र समाधान अछि। न्यायालय कए एहि पर विचार करबाक चाही, नहि त न्यायालय क प्रति आम लोकक विश्वास आओर कमजोर होइत जाएत।

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1 टिप्पणी

  1. सर्वप्रथम अशुद्धि के लेल क्षमा
    हमर घर खास मधुबनी अछि आ हम व्यकिगत रूप स जानैत छी जे कोन-कोन सरकारी कार्यालय मे कोना भ्रष्टाचार होयत अछि ! मोदा छोट पैमाना पर!
    वर्त्तमान परिवेश में जिला परिवहन कार्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था एक वृहद और खतरनाक रूप ल नेने छैक !
    दलाली एवं सिफारिश के भयंकर बोलबाला अछि !
    बगर मे थाना सामने समाहरणालय एवं पाछू में सत्तारूढ़ पार्टी के जिला कार्यालय !
    तखनो बेख़ौफ़ और अहंकार स युक्त दलाल सब खुल्लम खुल्ला आम जन के शोषण करैत अछि !
    संगे आम जन कार्यालय के कार्यशैली में विलम्ब एवं भागदौड स बचई के लेल दलाल सभ के चक्कर मे परि क आपन आर्थिक शोषण कराबै के लेल तैयार छथिन !
    हम अहाँ स सविनय निवेदन करम जे अहाँ हमरा एहि वेबसाइट स जोड़ी क आपन बात राखै के मौका दिय !
    जे हम आपन कार्टून , लेख एवं स्टिंग ऑपरेशन के साक्ष्य के संग समस्त मिथिलावासी के जागरूक कराय के कोशिश करम !
    विशेष अहाँ के जवाब के इंतजार रहत !
    हमर फेसबुक आई डी अछि — http://www.facebook.com/mukesh.panjiyar.98
    हमर पेज के आई डी अछि — http://www.facebook.com/appanmadhubani
    हमर ब्लॉग के आई डी अछि — http://www.appanmadhubani.blogspot.in

    धन्यवाद !

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