आ आबि गेलीह मैथिली..

धनाकर ठाकुर
आठम अनुसूची मे मैथिली कए पहुंचेबा लेल बहुत लोक अपन नाम क माला फेराईट छथि, खास क दरभंगा मे। ई नहि जे तारा बाबू वा बैजूजी किछु नहि केलाथि वा सीपी ठाकुर, मुदा हुनका सब संग बहुतो क नाम जोड़ी स ठीक रहत। मुदा एक आदमी जेकर नाम कियो नहि लेत अछि स छथि डॉ भुबनेश्वर प्रसाद गुरूमैता। गुरूमैता राष्‍ट्रीय स्वयंसेवक संघ क सरसंघ चालक सुदर्शन कए ल कए वाजपेयी लग जा क हुनक हिन्दी ग्रंथि कए भंग केलाथि। “तब हिन्दी का क्या होगा ? “- ओ लोकसभाक विपक्ष क नेता क रूप मे कहने छलाह। इ प्रसंग युवा उदयशंकर मिश्र हमरा सुनौने छथि।
मैथिली लेल स्मारपत्र कए नहि देलक, ककरा नहि देलक, 1992 स नरसिंह राव क समय स हम स्वंय एहि काज मे हिस्‍सा लैत रहलहुं। हमरा स्‍मरण अछि एकटा प्रतिनिधिमंडल रांची स दिल्‍ली गेल। ओ दल चतुरा बाबू स भेंट केलक। ओ मैथिली क विरोध केलथि। 20 क नोट आ संविधान क निकली प्रति देखा कहला जाउ संस्कृत पढू, केवल एहि नोट मे आ संविधान मे मैथिली आउत। हमर कार्यालय मंत्री प्रसाद गामक लाइब्रेरियन बिन्देश्वर झा कहलखिन – बहुत मुर्ख क नाम जुडतैक, हमारो सभ क हो. अहाँ सब संसद में बहस करैत छि हम सब चौक चौराहा पर..।”
एक बेर अडवाणी लेह मे सिन्धु उत्सव मे डोगरी आदिक नाम लेलाह, मैथिलीक नहि। दोसर दिन 63टा पोस्टकार्ड हम मैथिल संगठन कए देल जाही पर सहरसा स मायानद मिश्र आ उमा कांत झा(पूर्व सेल टैक्स अफसर) दिल्ली गेलाह, शाहनवाज हुसैन मदद केलथि। एकटा आईआरएस सबटा कागजात ठीक केलथि, गृह राज्यमंत्री आईडी स्वामी कए माया बाबू बुझेलाह जे हमर भाषा अछि आन सब बोली, रांची आबी हमरा रिपोर्ट केलाह।
संयोग स जहिया मैथिली कए मान्यता भेटल, जुलुस क नेतृत्व लेल वैह माया बाबू अपन बेटी लग आयल छलाह- हमरा ओ आ बहुत बधाई देत आ उम्हर मैथिली लेल पगलायल आचार्य नाजिम रिजवी उपाध्यक्ष डॉ कमलकांत झा जयनगर कए ओतहु जुलूस निकलल- केवल रांची आ जयनगर मे जुलूस निकलल- दरभंगा मे केवल उदयशंकर दिवाली अपन घर मे मनेलाह, मानू ओहो एकटा पागल। साल भरि बाद ओहि दिन दरभंगा गेलंहु त एकटा बैसार भेल।
1992 स 2003 तक हम 40 बेर मिथिला मे गामे गाम जागरण यात्रा केलाहं (217 दिन) जाहि मे पदयात्रा केवल मैथिली क संवैधानिक मान्याता लेल छल। बाद मे मिथिला प्रान्त सेहो जुडल, 118 बेर अपन कार्यस्थली रांचीस बाहर मिथिला मैथिली लेल गेलंहु( 300 दिन) जाहि बीच में 11 अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मलेन मे एकर चर्चा उठल। हम सब एकटा कार्यकर्ता छी यश क बात नहि मुदा मान्यता कए दियौलक आरएसएस, वाजपेयी वा आन दल क लोक – की भोगेन्द्र बाबू कए मणिपुरी, कोंकणी दिन मथदुखी नहि भेल छल जे संसद नहि गेलाह। नेपाली स्त्री कानि कए अपन भाषा कए ललक ‘मुझे विदेशी आप लोग कहते हैं’ की 24.12 2003 क राज्यसभा मे प्रणव मुखर्जी कानूनी अड़चन नहि लगा रहल छलाह। की कीर्ति आजाद अडवाणी कए नहि कहने छलथि जे हुनक मातृभाषा अंगिका छनि मैथिली नहि? (हम पूनम आजाद कए 2008 क मिथिला राज्य धरना मे पहिला बेर सामना भेला पर ई प्रश्न केने छलहुं, इम्हर उम्हर नेता जकां ‘ओ समर्थक छथि आ दी। ओना हस्ताक्षर र्कीति आजाद अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद् क समर पत्र पर तुरंत क देने छलाह, जेकर हम गवाह छी। हुकुमदेव यादव सेहो (ओ वाजपेयी कए निर्मली मे याद सेहो करौलथि) हस्ताक्षर नहि कलाह, देवेन्द्र यादव जे बाद मे अनेक ठाम विद्यापति पर्व मे इ बजलाह (नागलोई आ फरीदाबाद मे) जे हमर सन छोट कार्यकर्ता क नंबर आयल…
वाजपेयी तारा बाबू कए कहथि-“अब मिथिला राज्य तो नहीं मांगिएगा?” तारा बाबू कए मिथिला आन्दोलन मे हम अनुरोध केने रही एबा लेल ओना मैथिली क बीजेपी क अपन प्रांतीय अध्यक्षता मे मधुबनी मे ओ आठम अनुसूची लेल जोड़बा चुकल छलाह आ 1995 मे एही लेल यात्रा केलाह (हम ताबत पदयात्रा साइकिल यात्रा क चुकल छलहुं 1993-11 1994 मे)
मानवाधिकार आयोग क अध्‍यक्ष रंगनाथ मिश्र स रांची मे एकटा प्रतिनिधिमंडल भेंट केलक जाहि मे हम सेहो रही मुदा जे एकटा काज वा निर्णय हमरा स भेल जाही कारण मैथिली आबि गेल संविधान मे ओ छल 1997 क एकटा आकस्मिक निर्णय जे पहिल बेर आयल डॉ गुरुमैता कए अपन जगह अध्यक्ष घोषित कए देल ई देखि जे ओ नेपाली उपसभाप्रमुख राम विलास यादव क समधि छथि – चेन्नई मे 26-27 दिसंबर 1998 क भेल छठम अंतरराष्ट्रिय मैथिली सम्मलेन मे सम्मेलन क उपरान्त देर राति अमेरिका स आयल इन्द्रानंद झा मोमबत्ति जरबा सब कए शपथ दियेने रहथि जे जल्दी स जल्दी एही प्रकरण कए पूरा कैल जाए आ गुरुमैता जी एहि लेल वाजपेयी क निकतम- भेटला पर कहलखिन- ओही दिन ‘मेरी पीठ साक्षी है मैं डॉ गुरमैता को जनता हूँ (कहियो नागपुर लग बिहारी दलक गुरुमैता यूपी डालक वाजपेयी कए चाट कबड्डी मे जोर स पीठ पर मरने छलखिन- गोलवलकर साहेब कए लोक कहलक जा काय आज गुरुमैताने वाजपेयी कए बहुत जोर स मारा।
वाजपेयी कहलखिन’ मुझे आपका धमाका याद है’ (यानी नहि मान्यता देब त फेर किछु धमाका नहि काय दी ओहि पीठिया धमाका लेल) आ जाहि वाजपेयी कए मन मे हिन्दी का क्या होगा रहल छल ओहि ग्रंथि कए अपन सरसंघचालक कन्नडा भाषी सुदर्शन क कथन “मुझे भी विद्यापति प्रिय हैं’ पर वाजपेयी कह‍लथि – ‘जब आपलोग चाहते हैं तो यह संविधान में आयेगी’ और फेर कोशे पूल पर एकर घोषणा भेल जून मे आ दिसंबर मे तारा बाबू बजाउल गेलाह अडवाणी द्वारा। प्रधानमंत्री चाहते हैं जल्दी चुनाव, बोडो क बिल है कैसे होगा सोचिये? ओ गृह राज्यमंत्री चिन्मय्नद जिंक मात्रिक मिथिला मे बैसल छलाह- ताबत बासुदेव आचार्यक फोने संथाली जोड़े, तारा बाबू हिंट देलथि मैथिली भी जोड़बा दे आओर वैह भेल- विधिक विधान स हटी काय जे प्रणब बजलाह राज्य सभा मे मुदा वाजपेयी क आब मन मे छलन्हि आ आबि गेलीह मैथिली.. निर्णय पाठक लेत केकर पैरवी तगड़ा। हमर सभहक वा अपन पीठ अपनहि ठोके बला दरभंगिया नेता सबहक सबहक।

लेखक अंतरराष्‍ट्रीय मैथिली परिषद क अध्‍यक्ष छथि आ इ हुनक निजी विचार अछि।

maithili news, mithila news, bihar news, latest bihar news, latest mithila news, latest maithili news, maithili newspaper, darbhanga, patna

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments

1 टिप्पणी

  1. Maithilik manyata me kono ek vyakti athwa sangathan sa nahin bhetal achhi. Mithilik hak vaste andolan suru karay wala pahil vyakti sa la ka manyata bhetba tak jatek lok athva sangathan chhathi sabhak barabar yogdan chhainha. Humra sabke sab lokani ke dhanyabaad diyani se uchit.

Comments are closed.