आखिर महेश्‍वर बाबू हारि गेलाह

मिथिलेश/ प्रीतिलता मल्लिक
पटना । दिल्‍ली स्थित कांग्रेस मुख्‍यालय क सामने लागल दरभंगा लेन क बोर्ड हटा देल गेल, त ककरो एकर विरोध क उम्‍मीद नहि छल। उम्‍मीदक अनुरूप विरोध सेहो नहि भेल। दरअसल कांग्रेस एहि तरह विरोध करबा लेल जनता कए कहियो तैयार नहि केलक। कांग्रेस मे पुरान नाम कए बदलबाक नीति शुरू स विवादित रहल अछि। दरभंगा लेन क मामला एहि नीति पर बहस कए एक बेर फेर शुरू क दलेक अछि। बहस शुरू भेल त नाम बदलबाक इतिहास आ ओकर मानसिकता तकबा लेल दस्‍तावेज उलटबाक इच्‍छा भेल। बिहार एहन शोध लेल उपयुक्‍त स्‍थान अछि ताहि लेल शुरूआत बिहार स केलहुं।
दस्‍तावेज देखला स साफ भ जाइत अछि जे कोनो स्‍थानक नामकरण मे कांग्रेस नीति सकारात्‍मक सोच पर आधारित नहि रहल अछि। कांग्रेस क भीतर सकारात्‍मक सोचक जे छलाह ओ कालांतर मे धकिया देल गेलाह। भारतक आजादी क बाद स्‍थापित नाम कए बदलबा पर पहिल बहस बिहार मे भेल छल। बिहार विधान परिषद मे एक अप्रैल,1948 कए शुरू भेल बहस कालातंर मे सरकारक नामकरण नीति कए स्‍थापित करबाक काज केलक। दस्‍तावेजक अनुसार पुण्यदेव शर्मा सदन मे कहला जे राजधानी क हार्डिग पार्क मे लॉर्ड हार्डिग क प्रतिमा क जगह पर महात्मा गांधी क प्रतिमा लगा देल जाए। पार्क मे गांधी क उपदेश कए अंकित कैल जाए। पुण्यदेव शर्मा क कहब छल जे हार्डिग क प्रतिमा साम्राज्यवाद क प्रतीक अछि आ जखन हम ओहि रास्‍ता स जाइत छी त इ तुरंत झलकि जाइत अछि जे हम गुलाम छलहुं। एहि लेल इ मूर्ति क एहि ठाम रहब नीक गप नहि। एकरा एहि ठाम स हटा देल जाए। ओना एहि प्रस्‍तावक संग वर्मा इ जरूर कहला जे ओ एहि मूर्ति क अपमान नहि करए चाहैत छथि ताहि लेल लॉर्ड हार्डिग क मूर्ति कए पटना संग्रहालय मे सुरक्षित राखल जाए। शर्मा जी क एहि प्रस्‍ताव पर महेश्वनर नारायण सिंह कडा विरोध केने छलाह। हुनकर कहब छल जे एहि प्रकारक प्रस्ताव क जरूरत नहि अछि। हुनकर तर्क छल जे एहन प्रस्‍ताव स अंगरेज क प्रति द्वेष भाव प्रकट होएत। गांधी क प्रतिमा लगेबा लेल हार्डिग क प्रतिमा हटेबाक कोनो औचित्‍य नहि अछि। दूनू क प्रतिमा लगा सकैत छी। हुनकर कहब छल जे लॉर्ड हार्डिग क मूर्ति केवल साम्राज्यवाद क प्रतीक नहि कहल जा सकैत अछि। ओ बिहार निर्माण मे महत्‍वपूर्ण योगदान देनिहार छथि। पार्क मे लागल मूर्ति वो वायसराय आ गर्वनर जेनरल छी जिनकर बिहार प्रांत कए बंगाल स अलग करबा मे अहम भूमिका रहल। अगर हम सब एहि तथ्‍य कए बिसरैत छी त इ दुखद अछि। अपन भाषणक अंत मे महेश्वर सिंह कहने छलाह जे जखन महात्‍मा गांधी अंगरेज क प्रति खराब सोच नहि रखैत छथि त हम सब एहन काज करि लड़कपन किया करि ओनाओ हम हिंदुस्तानी उपकार नहि बुसरैत छी। महेश्‍वर सिंह क एहि भाषणक बाद लॉर्ड हार्डिग क प्रतिमा हटेबाक प्रस्ताव वापस ल लेग गेल। मुदा पुण्यदेव शर्मा आ महेश्‍वर सिंह कए व्‍यक्ति क रूप मे नहि देखल जाए, बल्कि ओ एकटा मानसिकता क प्रतिनिधित्‍व करैत छलाह। ताहि लेल दू व्‍यक्तिक बीच क बहस नहि छल। इ दू टा मानसिकता क बीच क बहस छल। लोहिया क कहब अछि जे इतिहास अपना कए दोहरबैत नहि अछि बल्कि ओ समाजक उपर नीचा होइत मानसिकता कए देखबैत अछि। समाज मे जखन सकारात्‍मक मानसिकता क लोग बेसी होइत अछि त इतिहास नीक बनैत अछि आ समाज मे अगर नकारात्‍मक मानसिकता क लोग बेसी भ जाइत अछि त इतिहास खराब बनैत अछि। 1 अप्रैल 1948 मे वापस भेल प्रसताव पर 1969 मे क्रियान्‍वयन ताहि लेल भेल किया कि बिहार मे नकारात्‍मक सोच समाज पर प्रभावी भ गेल। महेश्‍वर सिंहक इ कहब कोनो मायने नहि रखलक जे हम भारतीय उपकार नहि बिसरैत छी। बिहार आइ 100 साल पूरा क लेलक मुदा हार्डिंग क उपकार कए मानबा लेल महेश्‍वर सिंह आब नहि छथि आ हुनका सन मानसिकता वाला लोक सेहो समाज मे कम होइत गेल अछि। नहि त 1969 मे तत्‍कालीन नगर विकास मंत्री भोला प्रसाद शास्‍त्री जखन मूर्ति कए हटा रहल छलाह तखन एकर विरोध करनिहार कोई नहि छल। नकारात्‍मक सोच क प्रमाण छल जे हार्डिंग मूर्ति त हटा देल गेल मुदा गांधी क मूर्ति लगेबाक सकारात्‍मक पहल नहि कैल गेल। इ काज तखनो नहि भेल जखन भोला प्रसाद शास्‍त्री मुख्‍यमंत्री बनलाह। 1977 मे तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री कर्पूरी ठाकुर कांग्रेस क नामकरण नीतिक घोर विरोध केलथि आ ओहन लोकक नाम मिटेबाक निर्देश देलथि जेकर नाम नकारात्‍मक सोच क तहत थोपल गेल छल। एकर नतीजा छल जे मूर्ति नहि रहलाक बावजूद पार्क क नाम नहि बदली सकल आ ओ हार्डिंग पार्क बनल रहल। मुदा 90 क दशक मे लालू राज आयल आ आयकर गोलंबर पर कुंवर सिंह क मूर्तिक लोकार्पण समारोह में तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद यादव हार्डिंग पार्क क नाम वीर कुंवर सिंह पार्क राखि देलथि। एहि प्रकार स महेश्‍वर सिंह क 1948 मे देल भाषण दस्‍तावेज मे सिमटि गेल आ पुण्यदेव शर्मा क इच्‍छा जमीन पर उतरि गेल। कुल मिला कए आइ वीर कुंवर सिंह पार्क जाहि अवस्‍था मे अछि ओकर कल्‍पना पुण्यदेव शर्मा आ महेश्‍वर सिंह दूनू गोटे नहि केने हेताह। सवाल ओहि नकारात्‍मक सोच क अछि जे कोनो नाम बदलबा लेल नहि बल्कि कोनो वजूद कए मिटेबा लेल पैदा होइत अछि। जरूरत नाम बदलबाक नहि ओहि मानसिकता कए बदलबाक अछि किया कि कोनो चीज बेहतर अवस्‍था मे तखने रही सकैत अछि जखन सोच सकारात्‍मक होएत। नकारात्‍मक सोच स नाम बदलनिहार स सकारात्‍मक सोच स ओकर रख-रखाव क उम्‍मीद करब बेमानी अछि। एकर इतिहास गवाह अछि।

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