आखिर बिहारक किसान संग इ अन्‍याय किया

पटना। गेहूम क बंपर पैदावार बिहारक किसान लेल मुसीबत बनि गेल अछि। बिहारक किसान कए उम्‍मीद छल जे दोसर हरित क्रांतिक अगुआ कहबाक बाद केंद्रीय पुल मे ओकर हिस्‍सा बढेबा लेल सरकार सामने आउत आ ओकर गहूम कीनत। मुदा एहन कोनो प्रयास सरकार दिस स नहि भेल। सरकारक एहि उदासी स बाजार मे गेहूम क दाम, न्यूनतम खरीद मूल्य (एमएसपी) 1170 टका स करीब 150 टका पर आबि गेल अछि। बिहार क 80 फीसदी किसान एमएसपी स कम मे गेहूम बेचबा लेल मजबूर छथि। दोसर दिस भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) आओर दोसर एजेंसी क कहब अछि जे एहि वित्त वर्ष क शुरुआती दू मास मे एतबा गेहू क खरीद भ चुकल अछि जेतबा खरीद पिछला वित्त वर्ष क पूरा मार्केटिंग सीजन मे भेल छल। गौरलब अछि जे एहि बेर केंद्रीय पुल मे गुजरात आ मध्‍यप्रदेश क हिस्‍सा बढल, मुदा बिहार फेर धकिया देल गेल। गुजरात आ मध्‍यप्रदेश क सेहो पहिने बिहार सन हाल छल मुदा एहि बेर सरकार ओकरा दिस ध्‍यान देलक अछि। आंकडा क अनुसार गुजरात मे कुल 47,471 टन गेहूम क खरीद भ चुकल अछि। पिछला साल क समान अवधि मे केवल 624 टन गेहूम खरीद भेल छल। एहि साल केंद्रीय पूल मे सबस बेसी योगदान देनिहार राज्‍य क सूची मे मध्य प्रदेश तेसर नंबर पर आबि गेल अछि। शीर्ष दू स्थान पर पंजाब आ हरियाणा अछि। आधिकारिक जानकारी क अनुसार एखन धरि पंजाब मे 103 लाख मीट्रिक टन, हरियाणा मे 64 लाख मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश मे 4 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश मे नौ लाख मीट्रिक टन आओर राजस्थान में सात लाख मीट्रिक टन गेहूम क खरीद भ चुकल अछि। गौरतलब अछि जे पंजाब आओर हरियाणा मे फसल क कटाई मे देरी क बावजूद गेहूम क सरकारी खरीद 167.75 लाख टन भ चुकल अछि। जखन कि उत्तर प्रदेश मे सरकारी एजेंसी क व्‍यवहार बिहार स भिन्‍न्‍ा नहि अछि। एहि ठाम 2011-12 मे पिछला साल क 10.4 लाख टन क तुलना मे 36.5 फीसदी कम खरीद कैल गेल अछि। जहां धरि बिहार क सवाल अछि त रिकार्ड पैदावार भेलाक बावजूद एहि साल महज 27,221 टन गेहूम क खरीद कैल गेल अछि। जे पिछला साल क समान अवधि क तुलना मे 85 फीसदी कम अछि। जखन कि राजस्थान मे पिछला साल क समान अवधि क तुलना मे गेहूम खरीद 64 फीसदी बेसी कैल गेल अछि।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा जारी नव आंकडा क अनुसार बीतल वित्त वर्ष क समान अवधि क दौरान दौरान सेहो पंजाब आ हरियाणा स 177 लाख टन गेहूम क खरीददारी भेल छल, जे कुल खरीददारी 85 फीसदीक करीब छल। सवाल उठैत अछि जे एखनो देशक आत जनता कए इ बुझउल जाइत अछि जे पंजाब देश कए भोजन द रहल अछि, जखन कि पैदावार क हिसाब स बिहार देशक दोसर सबस पैघ गहूंम उत्‍पादक राज्‍य अछि। एहन मे अगर बिहार क किसान स सरकारी एजेंसी खरीद नहि करत त बिहार किसान देश मे दोसर हरित क्रांतिक अगुआ कोना बनत। बिहारक किसान लग पंजाब क किसान स कम सुविधा उपलब्‍ध अछि। मुदा एकर बावजूद पैदावार रिकार्ड स्‍तर पर अछि, मुदा सरकारी नीति मे कोनो बदलाव नहि भ रहल अछि। सरकार जाहि राज्‍य स पहिने खरीद करैत छल, ओहि राज्‍य पर एखनो निर्भरता अछि। बिहार कए प्राथमिकता देल जेबाक चाही, मुदा एहन कोनो प्रयास सरकारी स्‍तर पर नहि भ रहल अछि। पंजाब क किसान कए गहूम क दाम सेहो बेसी भेट रहल अछि आ सम्‍मान सेहो भेट रहल अछि जखन कि बिहार क किसान कए न दाम भेट रहल अछि आ न देश कए खुएबाक सम्‍मान भेट रहल अछि। बिहार संग एहि प्रकारक व्‍यवहार पर अधिकारी क कहब अछि जे बिहार मे भंडारण क सही व्यवस्था नहि हेबाक वजह स खरीदारी बाधित भेल अछि। दोसर इ जे बिहार आयूपी मे धीमी खरीदारी लेल ओहि ठाम स्थानीय प्रशासन कए सेहो जिम्मेदार मानल जा रहल अछि। आंकडा क मुताबिक एफसीआई आओर अन्य सरकारी एजेंसी मिलकए एखनधरि कुल 2.25 करोड़ टन गेहूम क खरीदारी क चुकल अछि। पिछला पूरा सीजन मे इ आंकड़ा 2.25 करोड़ टन रहल छल। एहि साल 2.6 करोड़ टन सरकारी खरीद क लक्ष्य राखल गेल अछि। एहन मे इ उम्‍मीद बहुत कम जे लक्ष्य कए हासिल करबा लेल सरकार बिहार क किसान पर ध्‍यान देत।
मशहूर कृषि विज्ञानी आओर सीएसीपी (कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस) क चेयरमैन अशोक गुलाटी क मुताबिक एफसीआई क लग मे अनाज रखबाक जगह नहि अछि आ बरसात लग आबि गेल अछि। एहन मे बिहार क किसान कए भारी नुकसान भ सकैत अछि। निजी खरीद सेहो ठीक स नहि भ पाबि रहल अछि किया कि सरकार गहूम क निर्यात पर रोक लगा रखने अछि। अगर इ रोक तत्‍काल हटा लेल जाए त खुलाबाजार मे सेहो कियान कए गहूम क किछु नीक दाम भेट सकैत अछि। सीएसीपी चेयरमैन अशोक गुलाटी क मुताबिक बिहार मे किसान 1000-1100 टका पर गहूम बेंच रहल छथि। कतहु कतहु त किसान 950 टका मे सेहो गहूम बेचबा लेल मजबूर भ रहल छथि। किया कि ओहि किसान लग गहूम क ज्यादा पैदावार भ गेल अछि आ ओकरा रखबा लेल जगह नहि अछि। ओ इ सेहो मानैत छथि जे गहूम निर्यात क फैसला मे काफी देरी भ चुकल अछि किया कि बिहारक अधिकतर किसान फसल बेच चुकल छथि। अशोक गुलाटी क मुताबिक बिहार मे पिछला 1 साल मे किसान क लागत 20 फीसदी बढल अछि, मुदा फसल क अधिकता क चलते घरेलू बाजार मे गहूम क दाम काफी नीचा आबि सकैत अछि।

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