आइयो लोक हमरा कलुआ कहि कए बजबैत छथि : शशिरंजन

मैथिली आओर हिंदी रंगमंच स सिनेमा जगत तक पहुंचबा मे अभिनेता शशिरंजन क समक्ष कईटा बाधा आयल। तेरे मेरे सपन मे कलुआ क पात्र कए जीवंत कए ओ अपन प्रतिभाक प्रमाण दुनिया क समक्ष द चुकल छथि। 2010 मे स्टार परिवार अवार्ड लेल फेवरेट मज़ेदार सदस्य क रूप मे नामांकित शशिरंजन एखन धरि आध दर्जन स बेसी सीरियल क चुकल छथि। प्रस्‍तुत अछि मधुबनीक छोट सन गाम क रहनिहार ”बंटी” उर्फ शशिरंजन स प्रकाश झाक इ’समाद लेल भेल गपशप क किछु खास अंश-:

शशिरंजन आई-काल्हि अहाँ लगातार टेलीवीजन पर देखाइत छी. ई हमरा सब मैथिली भाषीक लेल आह्लादकारी अछि. कहू जे अहाँ अभिनय दिस कोना प्रेरित भेलहुँ ?
हम अपन पठन-पाठन लेल मधुबनी मे रहैत छलहुँ। ओही ठाम एक बेर “गीत एवं नाटक प्रभाग” क एकटा आयोजन भेल छल। ई संयोगे छल जे हमहूँ अपन किछु मित्र संग एहि आयोजन के देखबाल लेल गेल रही। आयोजन मे भेल नाटक हमरा अत्यंत प्रभावित केलक आ ओही दिन स’ हम एहि विधा दिस आकर्षित भेलहुँ।

अभिनय कोना आ कत’ स’ लिखलहुँ ?
गीत एवं नाटक प्रभाग द्वारा आयोजित नाटक देखि हम स्थानीय संस्था के तकैत पहुँचलहुँ। मधुबनीक “जमघट” नामक संस्था। यैह संस्था अछि जतए हम अपन अभिनयक प्रथम पाठ सिखलहुँ। एकरा बाद कतेको संस्था संग जुड़ी हम नाटक करैत रहलहुँ। मधुबनीक बाद हम दिल्ली चलि एलहुँ। अहू ठाम हम लगातार रंगमंच स जूड़ल रही। नाटक हमरा बड्ड बेसी आकर्षित करैत अछि। हम बहुतो नाटक केलहु। एखन तक लगभग 20 स 25 टा नाटक मे हम भाग ल चुकलहु। यैह विधा मात्र अछि जाहि स अहाम नीक अभिनय क’ सकैत छी। एहि तरहें कहि सकैत छी जे अभिनयक प्रारंभिक प्रशिक्षण मधुबनी मे भेल आ बाद मे दिल्लीक विभिन्न संस्था सभ स जूड़ि कए ।

एखन तक मैथिली मे कोन कोन नाटक केलहु अछि ?
मैथिली मे बहुत बेसी नाटक करबाक सौभाग्य हमरा नै प्राप्त भेल मुदा तौयो वागीश झा लिखित बिजुलिया भौजी नाटक के कतेको प्रस्तुति केलहु हम। एकरा बाद दिल्ली मे मैलोरंग स महेन्द्र मलंगियाजीक लिखल काठक लोक, राजकमल चौधरी जीक लिखल कमलमुखी कनिया नाटक केलहु। मैलोरंग स’ गोरखधंधा नामक नाटकक पूरा तैयारी सेहो केने रही मुदा ओहि साल बाढ़ि के प्रलय के कारण आयोजने स्थगित भ गेल तेँ ओ नाटक मंचित नहि भेल। ओना हम इहो कहि दी जे मैथिली मे हमरा महेन्द्र मलंगिया बहुत प्रभावित करैत छथि।

मैथिलीक कोन निर्देशक अहाँ के नीक लगैत छथि आ किएक ?
मैथिली मे हम एखन तक जतेक काज केलहुँ ओहि मे मात्र दूटा निर्देशक संग काज करबाक मौका प्राप्त भेल हमरा। पहिल छथि कमलानंद ‘विभूति’ आ दोसर छथि प्रकाश झा। ई दुनू गोटे हमरा नीक लगैत छथि। दुनू गोटेक काज करबाक तरीका नीक छनि।

एखन तक हिन्दीक कोनो कोन नाटक केलहुँ अछि आ किनका संग ?
हिन्दी मे बहुत काज करबाक मौका भेटल। जाहि मे कमलानंद विभूति संग हम बच्चे हैं चान से, रवि भूषण “मुकुल” संग बिजुलिया भौजी, सतीश आनंद संग अन्वेषक, अवतार साहनी संग अग्नि, प्रेम मटियानी संग समर यात्रा, राम जी बाली संग चारुदत्तम, केएस राजेंद्रन संग मृच्च्कतिक्कम, महाचैत्र, औरंगजेब, सुरेश अनागल्ली संग शाकुंतलम, रुद्रदीप चक्रबर्ती संग कर्ण, मोहन महर्षि संग मै इस्तांबुल हूँ, लोकेन्द्र त्रिवेदी संग गाथा भगत सिंह इत्यादि …

मैथिलीक कोन कोन संस्था अहाँ के नीक लगैत अछि आ किएक ?
मैथिली मे एखन कतेको रंग संस्था सब काज कए रहल अछि मिदा हमरा मात्र तीन टा संस्था नीक बुझना जाइत अछि। मिनाप (मिथिला नाट्यकला परिषद), पटनाक भंगिमा आ दिल्लीक रंग संस्था मैलोरंग। एहि तीनू संस्थाक सब कलाकार आ निर्देशक लोकनि एतेक अनुभवी आ बेजोड़ छथि जे हमरा बेर बेर आकर्षित करैत अछि। ई सब गोटे एतेक जबरदस्त कहानी उठबैत छथि जे सबहक मोन के छुबि लैत अछि। नीक अभिनेता आ अभिनेत्रीक रहबाक कारण हिनकर प्रस्तुति कमाल के होई छैन।

फिल्म जगत मे कोना एलहुँ ?
दिल्ली में रंगमंच करैत करैत किछु दूरदर्शन के काज भेटए लागल। ओही स’ माध्यम बनैत गेल। आ तेँ आब फिल्मों तक पहुँच गेलहुँ।

एहि विधा यानी नाटक आ फिल्म दिस अयबा मे पारिवारिक सहयोग कोना की रहल ?
हम मिथिलाक कायस्थ परिवारक बेटा छी, जाहि ठाम पढाई बहुत माइने रखल जाइत अछि। पिताजी के कहनाम रहैन कि हमरा लग एतेक रुपैया नहि अछि जे तोरा कोनो कोर्से वगैरह करबा देबौ। तेँ तोरा जे करबाक छौ से कर मुदा पढाई नै छोड़िहें। पारिवारिक वातावरण नीक छल। परिवार स आर्थिक त ओतेक नई मुदा मानसिक रूप स पूरा सहयोग भेटल।

कोन कोन सिरियल केलहुँ अछि ?
एखन तक जे किछु काज केलहु अछि ओहि मे किछु महत्वपूर्ण अछि — स्टार प्लस पर “तेरे मेरे सपने” ( जाहि लेल हमरा 2010 में स्टार परिवार अवार्ड में फेवरेट मज़ेदार सदस्य के रूप मे नामांकित कैल गेल), आ एहि चैनलक लेल “प्रतिज्ञा” धारावाहिक सेहो केलहुँ। स्टार वन पर “दिल मिल गए” आ “ढूंढ लेगी मंजिल हमें” बांकी दूरदर्शन क लेल किछु …..

अहाँक तेरे मेरे सपन मे कलुआ क पात्र के अत्यंत खूबसूरतीक संग निभेलहुँ। एकरा स’ संबंधित किछु संस्मरण हमरो सब के कहू।
एहि पात्रक लेल तीन महिना स ऑडिसन चलि रहल छल। हम बेर बेर ऑफिस गेलौं मुदा ऑडिसन नहि भ रहल छल। एक दिन ऑडिसन भ गेल आ ठीक दू दिन बाद फ़ोन आएल जे अहाँ चुनि लेल गेल छी। पहिले हमरा लागल जे दस-पन्द्रह दिनक रॉल होते। मुदा, जखन पता चलल जे ई पात्र सेकंड लीड छै त अत्यंत ख़ुशी भेल। सब स पहिले माँ के फ़ोन केलौं। दू दिनक कार्यशाला भेल। शूटिंगक पहिला दिन बहुत डर लागल जे एतेक बड़का पात्र मिडिया मे आई तक नै केलौं, कहीं कोनो गलती नै भ जाय। मुदा निर्देशक, केमेरामैन, सह-कलाकार आ पूरा टीम के सहयोग स कोनो तरहक दिक्कत नहि भेल आ सब के भरपूर प्यार भेटल।

एहि किरदार के करबा मे केहन अनुभव भेल ?
कलुआ एकटा गामक पात्र अछि। हम स्वंम ग्रामीण परिवेश मे पल-बढ़ल छी तें बेसी दिक्कत नहि भेल। हमर काज सब कए बहुत नीक लगलनि। सिरियल करबाक अनुभव बहुत आत्मीय छल। आइयो लोक हमरा कलुआ कहि क बजबैत छथि। ई सुनि नीक लगैत अछि।

अहाँ बहुत रास विज्ञापन मे सेहो अबैत छी – कोन कोन अछि से कहूँ ?

हाँ ! विज्ञापन त बहुत अछि। दूरदर्शन पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना संबन्धित कतेको विज्ञापन केलहुँ , सेट मैक्स के लेल सेहो नीक विज्ञापन दीवाना बना दे (सुन्दर और शीशा) केलहुँ। एखन एकटा नव विज्ञापन चलि रहल अछि — हॉजमोला मिंट मस्ती …

सेट मैक्स लेल कयल गेल अहाँक विज्ञापन हमरा सब कए काफी आकर्षित केने छल। एहि स संबंधित किछु जानकारी दिअ। ओ ई जे कोना ई किरदार अहाँ के भेटल आ कोना एकर शुटिंग समपन्न भेल ?
सेट मैक्सक विज्ञापन लेल लगभग तीन सौ लोकक ऑडिसन लेल गेल। एक सौ पचास मुंबई मे आ एक सौ पचास लखनऊ मे। एही विज्ञापनक शूटिंग लखनऊ मे भेल छल तेँ निर्देशक के इच्छा छलनि जे मुख्य अभिनेता (सुन्दर) लखनऊ मे भेट जाए त नीक। मात्र चारि गोटे के चयनित कयल गेल छल, जाहि मे एकटा हमहूँ रही। हमरा छोड़ि बाकी सब कलाकार लखनऊ क छथि। मात्र तीन दिन मे एकर शूटिंग करबाक छल। एतेक हड़बड़ी मे कनी कठिन रहल मुदा लास्ट शॉर्ट (स्वीटी वेट फॉर द ब्रेक) एक टेक मे भेलाक बाद, जखन पूरा यूनिट ताली बजेलक तखन बहुत खूशीक अनुभव भेल छल। वापसीक समय निर्देशक महोदय कहलथि… ‘मेंने तुम्हारा ऑडिसन देख कर ही कहा था – ये लड़का ज़रूर थिएटर का है’। हमरा लेल बस यैह अवार्ड जेना छल। जे कियो ई विज्ञापन देखलथि अछि … बेर बेर फोन करैत छथि।

एहि विधा मे एयबा लेल की सब आवश्यक अछि नबका तूरक लेल ?
ज़बरदस्त मेहनत आ ज़बरदस्त धैर्य। एकरा अलावा किछु नहि। जे मेहनत नहि करए जनैत छथि आ जिनका लग धैर्य नहि छनि ओ लोकनि एहि क्षेत्र मे नहि आबैथि।
मैथिली फिल्मक स्थितिक लेल अहाँक की विचार अछि ?
अपन मैथिली सिनेमा क इ विडम्बना अछि, जे एहि मे बहुत कम लोग छथि जे सृजनात्मक और कलात्मक दुनू काज करए जनैत छथि। ई लोकनि पहिने व्यापारिक सोच ल अबैत छथि। तैयो हमरा इ इच्छा त ज़रूर अछि जे जाहि जगह पर हिंदी आ भोजपुरी सिनेमा अछि ओतए मैथिलि सिनेमा होई।

मैथिली कए ल कए की सब योजना अछि ?
मुंबई शहर मे त मैथिली स कनी दूर छी। मैथिली स जुड़ाव तखने होइत अछि जखन अपना गाम गेलहुँ। बाकि दिल्ली मे “मैलोरंग” मे जाइत छी। बांकि जँ मैथिली मे किछु करबाक मौका भेटत त ज़रूर तैयार छी करबाक लेल।

इ’समाद स गप करबा लेल अहां कए धन्‍यवाद।
प्रकाश जी अहांक आ इसमाद कए सेहो बहुत बहुत धन्‍यवाद।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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