अविश्‍वासक दिसंबर

कुमुद सिंह
दिसंबर, कहबा लेल इ एकटा मास अछि, मुदा इ ओ रातिक भांति अछि जे कहैत अछि जे भोर भ रहल अछि। समय बदलैत आ दिन बितैत देर नहि होइत अछि। जेना जनवरी स दिसंबर एकटा तय समय मे भ जाइत अछि तहिना घोषणा आ उदघाटन एकटा कालक्रम बनि जाइत अछि। समयचक्र एहि दूनू काल कए एक एक करि सामने आनि दैत अछि। अविश्‍वासक काल अपन दिसंबर मे अछि आ विश्‍वासक जनवरीक प्रतिक्षा मे मिथिला व्‍याकुल भ उठल अछि। इ दिसंबर मिथिला लेल खास भ चुकल अछि। दिसंबरक दोसर सप्‍ताह मे जतए मुजफ्फ़रपुर मे बिस्‍कुट उत्‍पादन संयंत्र शुरू भ जाएत, ओतहि अंतिम सप्‍ताह तक दू भाग मे विभाजित मिथिला एक भ जाएत। मिथिलाक लोक लेल किशनगंजक चाह आ मुजफ्फ़रपुर क बिस्‍कुट दूनू आसानी स उपलब्‍ध भ जाएत।
आइ स करीब आठ साल पहिने एकटा विद्वान कहने छलाह जे निराशाक कोठली मे कैद मिथिलाक जनता लेल कोनो घोषणा तखन धरि सार्थक नहि भ सकैत अछि जखन धरि को भौतिक रूप स सामने नहि आबि जाए। इ अविश्‍वास आजादीक बाद देल गेल सरकारी धोखा स पैदा भेल अछि ताहि लेल एकर आलोचना नहि भ सकैत अछि। इ अविश्‍वास सरकारी स्‍तर पर काज भेला स स्‍वत: समाप्‍त भ जाएत। जनताक बीच इ विचार जडता ल चुकल अछि जे घोषणा मुंह स निकलल एकटा एहन शब्‍द अछि जे भौतिक रूप स जमीन पर नहि उतरैत अछि। एहि जडता कए तोडबा लेल घोषणा कए भैतिक रूप स जमीन पर उतारब जरूरी छल। एहि गप पर कोनो विवाद नहि जे घोषणा एखनो जमीन पर नहि उतरि रहल अछि, मुदा घोषणा आ जमीन क बीच टूटल कडी कए जोडबा लेल पुल तैयार भ रहल अछि।
देखल जाए त कोसी पर महासेतुक क घोषणा पहिल बेर 1973 मे भेल। मुदा घोषणा जमीन पर नहि उतरि सकल। विश्‍वासक नींव 2004 मे शिलान्‍यास क संग नहि पडि सकल। घोषणा पर संदेह बनल रहल। आइ देर सबेर पुल तैयार अछि। उदघाटनक बाद जखन मिथिलाक लोक एहि पुल स एहि पार स ओहि पार चल आबि जेताह तखन ओ विश्‍वास कायम होएत जे पिछला 70 साल स खत्‍म भ चुकल छल। 1934 क बाद इ एकटा सपना बनि गेल छल। एकटा पुल समाज मे केतबा परिवर्तन आनत इ त समय कहत, मुदा इ तय अछि जे इ पुल समाज कए एकटा एहन बाट पर ल जाएत जाहि ठाम विश्‍वासक अकाल आ निराशाक बाढि स लोक कए मुक्ति भेटत।
विश्‍वासक अकाल आ निराशाक बाढि केवल बाट खुजला आ पुल बनला स नहि खत्‍म भ सकेत अछि। एकरा लेल विकास चाही आ विकास लेल उद्योग। मिथिला मे बंद उद्योग क कमी नहि अछि। बंद उद्योग क बीच नव उद्योग क स्‍थापना पर विश्‍वास करब ककरो लेल मुश्किल छल। प्रस्‍तावक सूची झूठक पूलिंदा जेकां लगैत छल आ सब किछु सामने रहलाक बावजूद विश्‍वास शरीर स कोसो दूर भगैत छल। दलान पर बहस गरम छल आ लोक एक दोसर स समान प्रश्‍न करैत देखा रहल छल। बहस क बीच मे कोनो योजनाक कागज स जमीन पर उतरबा मे केतबा समय लागत एकर अनुमान करबा स सब चुप भ जाइत छल।
20 अक्तूबर 2010 कए जखन 5.5 एकड़ जमीन लावानिया फिनबिस्ट प्राइवेट लिमिटेड क नाम पर आवंटन भेल त सब एकरा एकटा कागजी प्रक्रिया स आगू किछु मानबा लेल तैयार नहि छल। बियाडा क एहि घोषणा पर विश्‍वास करब कठिन छल जे 36 करोड़ क लागत स पारले जी बिस्कुट क प्लांट दू साल मे तैयार करि लेत। पलायन करैत मजदूर कए देखि इ सबस पैघ झूठ लगैत छल जे एहि प्लांट स लगभग पांच सौ लोक कए रोजगार भेटत। 16 नवंबर 2010 स जखन प्लांट बनब शुरू भेल त किछु विश्‍वासक ईंट जमा भेल। आइ प्‍लांट तैयार अछि। पाथर पर दुईब उगैत देखि कतेको लोकक आंखी नोरा गेल। सब किछु ठीक रहल त 12 दिसंबर कए उत्‍पादन शुरू भ जाएत। प्लांट क डायरेक्टर संजीव ठाकुर क कहब अछि जे लावानिया फिनविस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंट्रैक्ट मैनुफेक्चरिंग (सीएम) यूनिट क रूप मे काज करत। 12 दिसंबर कए प्‍लांट क पहिल चरण शुरू होएत। पहिल चरण मे दो हजार टन प्रति मास बिस्कुटक उत्पादन होएत। अगिला साल दूटा आओर चरण चालू भ जाएत। तीनू चरण चालू भेलाक बाद एहि प्लांट स पांच हजार टन बिस्कुटक उत्पादन होएत। एतबा भेला स इ विश्‍वास त भ जाइत अछि जे आइ पारले जी बिस्कुट गोरखपुर, बनारस आ कानपुर में बनैत अछि आ मिथिला में आपूर्ति होइत अछि, मुदा आब मुजफ्फरपुर मे बनत आ एहि ठाम स निर्यात होएत।

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2 टिप्पणी

  1. आइ स करीब आठ साल पहिने एकटा विद्वान कहने छलाह जे निराशाक कोठली मे कैद मिथिलाक जनता लेल कोनो घोषणा तखन धरि सार्थक नहि भ सकैत अछि जखन धरि को भौतिक रूप स सामने नहि आबि जाए। इ अविश्‍वास आजादीक बाद देल गेल सरकारी धोखा स पैदा भेल अछि ताहि लेल एकर आलोचना नहि भ सकैत अछि। इ अविश्‍वास सरकारी स्‍तर पर काज भेला स स्‍वत: समाप्‍त भ जाएत।

    विश्‍वासक अकाल आ निराशाक बाढि केवल बाट खुजला आ पुल बनला स नहि खत्‍म भ सकेत अछि। एकरा लेल विकास चाही आ विकास लेल उद्योग। मिथिला मे बंद उद्योग क कमी नहि अछि।

    बहुत नीक लेख कुमुद जी ।

  2. बहुत नीक लेख कुमुद जी…. दिसंबर २०११ विशेष छै

    मिथिला/मैथिली के चर्चा में दड़िभंगा, मुधुबनी, सहरसा ई॰ के गप्प आम बात छै ।
    जे कखनो मुजफ्फरपुर चाहे देवघर परि नज़र पड़ैय त आश्चर्य (सुखद) होईय ।
    घुर-फिर क कहियो-कहियो मुजफ्फरपुर के भी मिथिलाक आंग होबेक एहसास देया दियौ । नञि त ..

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