अपन वजूद लेल संघर्षरत अछि मुग़ल सल्तनतक आखरी कब्र

विजय कुमार श्रीवास्‍तव
दरभंगा । दरभंगा अपन कण कण मे इतिहास समेटने अछि। मुग़ल सल्तनत क आखिरी तीटा चिराग दफ़न अछि। दरभंगा शहर क बीचोबीच स्थित दिग्घी पोखर क महार पर बहदुरशाह जफ़र क पोता जे (बहादुर शाह ज़फर क पुत्र दारा बख्त क बेटा छलाह) शहजादा जुबैरुदीन क कब्र अछि। अगर 1857 क गदर असफल नहि होइत त ओ हिंदुस्तान क बादशाह होइतथि। आखिरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफ़र क पोता हुनकर बेगम आ हुनकर छोट बेटा दिल्‍ली स भागि दरभंगा आबि गेल छलाह आ राज दरभंगाक शरण मे जीवन क अंतिम दिन बितेलाह। हुनकर मजार आइ बद इन्तजामी क शिकार भ कए मिटबाक कगार पर अछि।

 दरभंगा शहर क बदहाली कहल जा सकैत अछि जे अपन कण कण मे इतिहास समेटबाक बावजूद शहर उदासीनता क वजह स देश क पर्यटन क नक्‍शा पर आइ धरि अपन मौजूदगी दर्ज नहि करा सकल अछि। सन 1556 मे मुग़ल बादशाह अकबर अपन राज पुरोहित महेश ठाकुर कए दरभंगा क राज दान मे देने छलाह आओर राज वंश आखिर तक एहि दान क मान रखने रहलाह। सन 1857 क असफल ग़दर क बाद मुग़ल वंश क आखिरी चिराग शहजादा जुबैरुदीन अपन परिवार क संग दिल्‍ली से भागि बनारस पहुंचलाह। मुदा हुनकर माली हालत बहुत खराब छल। इ देख 17 मार्च, 1881 कए तत्कालीन दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह हुनका आदर क संग दरभंगा आनि लेलथि । अंग्रेजक विरोधक बावजूद महाराज हुनकर सम्‍मान मे कतहु कौताही नहि केलथि। शहजादा जुबैरुद्दीन क परिवार दरभंगा क भ कए रहि गेल। वर्ष 1902 मे जुबैरुद्दीन क दूटा बेटा हैजा स मरि गेलाह। ओहि साल हुनकर कनिया सेहो गुजरि गेलीह। 1909 मे जुबैरुद्दीन क सेहो देहांत भ गेल। शहर क दिग्घी पोखरि क महार पर एहि परिवार क मजार अछि जे बहुत खराब स्थिति मे अछि। एकर देख भाल पर न त पुरातत्व विभाग आ न कोनो संस्था क ध्यान एखन धरि गेल अछि।

महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह इ जानैत छलाह जे अगर 1857 क गदर अगर सफल भ जइतए त मुगल सल्तनत किछु दिन तक आओर कायम रहितए। एहि लिहाज स शहजादा जुबैरुद्दीन हिंदुस्तान क बादशाह हेबाक हक रखैत छलाह। ताहि लेल महाराजा जुबैरुद्दीन आओर हुनकर परिवार कए दरभंगा क राज अतिथि क दर्जा देने छलाह, जाहि लेल अंग्रेज स हुनका काफी मतभेद रहल। महाराज हुनका लेल नव मकान बनेलथि आ हुनकर हर सुख क ख्याल रखबा लेल नौकर चाकर सेहो देलथि। महाराजा लक्ष्मेश्वर क मरणोपरांत दरभंगा क महाराज रामेश्‍वर सिंह आ हुनकर पुत्र डा सर कामेश्‍वर सिंह सेहो एहि परम्परा कए कायम रखलथि। शहजादा जुबैरुद्दीन अपने इतिहासकार छलाह ताहि लेल इ गप लिखित रूप मे उपलब्‍ध अछि। ओ दरभंगा मे रहि कए कुल छह टा किताब लिखलथि जे मुगल सल्तनत क आंतरिक स्थिति पर काफी जानकारी दैत अछि। हुनकर लिखल किताब मे स एकटा किताब यात्रा वृतांत मौजे सुल्तानी काफी चर्चित रहल अछि। एहि मे मुगल साम्राज्य आओर राज दरभंगा क इतिहास संस्मरण शैली मे दर्ज अछि।

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