अपन ‘ख्याल’ मे जा बसल बनैली

Sur Sangeetपूर्णिया ।  सुर आ राग क सरोबर मे बनैली एक बेर फेर नहा गेल। आगरा घराना कप्रसिद्ध गायक उस्‍ताद वसीम अहमद खान क गायकी स एक बेर फेर पूर्णियाकख्‍याल गायकी जीवंत भ उठल। पूर्णिया क संगीत प्रेमी घंटो सुर सरोवर मे गोता लगबैत रहलाह। आरोह आ अवरोह क इ आयोजन छल मिथिला क महान संगीत साधककुमार श्‍यामानंद सिंह क 98म जयंजी क उपलक्ष्‍य मे। राजा कृत्‍यानंद सिंहमेमोरियल ट्रस्‍ट क तत्‍वावधान मे रविदिन आयोजित भेल सुर संध्‍या क इआयोजन शानदार रहल। कार्यक्रम क शुरुआत संगीत भास्‍कर कुमार श्‍यामानंदसिंह क चित्र पर पुष्‍पांजलि स भेल। एहि अवसर पर बनैली राज परिवारकसदस्‍य कांतानंद सिंह सहित शहरक पैघ संख्‍या में संगीत प्रेमी उपस्थित छलाह। कार्यक्रम में आइटीसी संगीत रिसर्च अकादमी क प्राध्‍यापक आ आगराघरानाक रौशन चिराग उत्‍साद वसीम अहमद खान अपन गायन क शुरुआत राग ललित मेंविलंबित स केलथि आ एकर बाद एहि राग मे ओ छोटका ख्‍याल प्रस्‍तुत केलथि।एकर बाद राग जौनपुरी में ओ छोटका ख्‍याल पेश केलथि। जखन ओ राग भैरवी मेंख्‍याल गायन शुरु केलथि त सभागार थपरी क शोर स गूंजि‍ उठल। हुनक संग संगतकरनिहार छलथि तबला पर अशोक मुखर्जी, हारमुनियम पर कमलखा मुखर्जी आतानपुरा पर श्री सागर ।

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1 टिप्पणी

  1. Yo, Nik Lagal. Ek ta Aagraha, Mithila ke bahar raha bala maithil chhat pata rahal aychhi. Sabh san paigh dikkat chhaik hunkar bachchha ke Vivah-dan. Ek ta maithil matrimony chalal, muda okra ekta tamil chala rahal chhaithi, jinka mithila sanskriti ke eko pai gyan nahi? Ki sundar hoyat agar ee kaj ekta maithil chalabaith mithila ke sanskriti se oat-prot.
    Anil

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