अपना कए फेर उठेबाक मौका

Harivansh-1 हरिवंश

चर्चिल विश्वयुद्ध क समय कहने छलाह अतीत कए जेतबा पाछु दूर तक देख सकैत छी, देखू, एहि स भविष्य क लेल संदेश भटैत अछि आ बाट सेहो। बिहार, विकास क दृष्टि स सबस पिछड़ा राज्य अछि। हम मानैत छी जे 80 क दशक मे डेमोग्राफर इन चीफ प्रो आशीष बोस हिंदी इलाकस कए बीमारू कहलाह, त एहन मे हमर भूमिका की भ सकैत अछि? भ्रष्टाचार, गवर्नेस, मूल्यहीनता क राजनीति क बीच हम की कए सकैत छी। आइ पूरा दुनिया मे बहस चलि रहल अछि जे श्रेष्ट शासक (इनलाइटेंड लर्स) केहन हेबाक चाही? ओकरा मे केहन मूल्य हेबाक चाही? ओकर जीवन दर्शन की हेबाक चाही? किशन पटनायक सेहो लिखने छथि चंद्रगुप्त क दरबार मे चाणक्य छलाह, चापलूस क जमात नहि छल। चंद्रगुप्त महान योद्धा छलाह, जे अपन शेष जीवन जैन सन्यासी क तरह बितेलाह (जैन साहित्य क अनुसार)। अशोक युद्ध स मुंह मोड़ि लेलथि आओर बौद्ध भ कए धम्म क संवाहक बनलाह। यानी दूटा महान दार्शनिक आदर्श कए लोक जीवन मे उतारबाक काज एहि वंश क राजा केलथि। अपन समय क सीमा मे भारत क सर्वश्रेष्ट ब्राह्मण नेता चाणक्य छलाह। ओ भारत क प्रथम राष्ट्रनेता छलाह, राजा नहि रहितो। फेर, आगू किशन जी लिखैत छथि चंद्रगुप्त कोनो सामान्य सूझबूझ क आदमी नहि छल, अगर सामान्य सूझबूझ क रहितथि, त एक बेर स्थापित भेलाक बाद संकीर्ण स्वास्थ्य स या चापलूस क कुमंत्रणा क वश मे आबिकए ओ चाणक्य कए मरवा आ भगा देबाक प्रयास करितथि। फेर ओ (चंद्रगुप्त) बिहार क निर्माता नहि भ सकैत छल। इ अछि बिहार क विरासत क पहिल कड़ी। कहां अछि एहि चुनाव मे बिहार क विरासत कए स्थापित करबाक गूंज? एक-एक राजनेता स जनता हिसाब लिए। जखन राजनेता धर्म, जाति, समुदाय, क्षेत्र क गप करथि त जनता हुनका स विरासत क हिसाब मांगे। की अहां कए या हमरा पता अछि जे आज दुनिया क पैघ चिंतक आ विचारक कहि आ मानि रहल छथि जे सिकंदर आ हुनकर पिता फिलिप (मकदुनिया) लुटेरा छलाह। ओ दुनिया क आदर्श नहि भ सकैत छथि। इ पश्चिम क ताजा चिंतन अठि। अशोक एखन धरि ज्ञात दुनिया क सबस इनलाइटेन लर्स (सर्वश्रेष्ट, प्रबुद्ध शासक) मानल जा रहल छथि। आब पश्चिम कए अफसोस अछि जे ओकर छात्र अशोक क बारे मे कम जानैत अछि। अमर्त्य सेन अशोक पर जरूर लिखलथि अछि। दुनिया क एकटा जानल-मानल लेखक मैट रिडले किताब लिखलथि अछि द रेसनल ऑप्टिमिस्ट (हार्पर कॉलिंस 2010)। रिडले मनुष्य क विकासवादी चिंतन क खास अद्येता छथि। ओ लिखलथि अछि जे अशोक कोना मौर्य काल क भारतीय अर्थव्यवस्था कए उदार बनेलाह। दुनिया क लेल खोललाह। श्रेष्ट कर प्रणाली विकसित केलथि। राजसत्ता क ठोस बुनियादी संरचना क नींव रखलथि, ताकि श्रेष्ट ढ़ंग स कारोबार, व्यापार हुए। रिडले ग्लोबलाइजेशन क या ओपेन मार्केट क पक्षधर विचारक मे स अछि, मुदा, 2008 मे ब्रुस रिच एकटा किताब लिखलथि टू अपहोल्ड द वर्ल्ड। हुनकर नव किताब 2010 मे आयल अछि ए कॉल फॉर ए न्यू ग्लोबल इथिक फ्रॉम एनसिएंट इंडिया। एकरा बेकन पब्लिसर छपलक अछि। इ केवल अशोक क बारे मे अछि। ब्रुस पर्यावरणविद छथि। ग्लोबलाइजेशन क आलोचक, वामपंथी विचारक। यानी दुनिया मे वाम स लकए दक्षिण विचार वाला चिंतक अशोक क गीत गाबि रहल अछि। दुनिया कोना मूल्य स जुडए, नैतिक बनए, श्रेष्ट बनए, एकरा लेल, मुदा बिहार अपन भाग्य लिखए जा रहल अछि आ बिहारी नेता, जे बिहार क भविष्य तय करताह, ओ केकर गीत गाबि रहल छथि? की हमर रहनुमा हमर समाज कए या बिहारी कए नव सपना आ संकल्प दिखौता? एक बेर फेर बिहार अपन भविष्य तय करै जा रहल अछि। बिहार कए तय करबाक अछि जे ओ इतिहास बनेनिहार बनत या फेर हास्यास्पद या इतिहास क पाद टिप्पणी मे जगह पाउत। बिहार मे भ रहल एहि भविष्य निर्धारक चुनाव मे कतय अछि, सामूहिक संकल्प जगौनिहार अभियान? पैघ सपना क गप? फेर भारत कए नव दिशा देबाक आ नव इतिहास बनेबाक जज्बा? नेता क चिंता परिवार अछि। बेटा, बेटी, सौर- संबंधी। बदबू आबि रहल अछि, एहि राजनीति स। बिहारी पहचान, अपन अतीत स ताकत आ ऊर्जा ल नव बाट पर चलबा लेल नहि देखा रहल अछि कोनो प्रकारक छटपटाहट। हिंदी इलाका मे हम बीमारू हालात स निकलि कए बेहतर आ श्रेष्ट बनि जाए, एकर पूरा संभावना अछि। एकरा लेल चाहि समाज क हर क्षेत्र मे श्रेष्ट आ युवा नेतृत्व। आइ जरूरत अछि जे बिहार अपन सुदूर अतीत कए देखए। चर्चिल क सुझाव क तहत, ताकि दूर भविष्य क लेल सबक भेट सकए। की छलहुं, की भ गेलहुं हम, जे चर्चा बिहार क चुनाव मे हेबाक चाही। एहन अनंत प्रसंग जखन भटैत अछि, तखन समाज, मुल्क, राज्य या देश क कायापलट होइत अछि। कई साल पहिने सिंगापुर शहर मे म्यूजियम देख रहल छलहुं। ली यूआन क्यू केना अपन मुल्क आ शहर बदललाह। ओ मछुआरा क गाम छल। बदबूदार। दुनिया भरि क छंटल आओर गलत धंधा मे लागल लोक क समुद्री पड़ाव। ओहन मरल-निर्जीव शहर आ देश कए ली कोना दुनिया क अलभ्य शहर बना देलथि? ओहि म्यूजियम मे प्रधानमंत्री क रूप मे ली क ओ मशहूर फोटो तसवीर देखलहुं, जखन झाड़ू उठा कए ओ अपने सड़क साफ करैत छलाह। ओ ऑक्सफोर्ड स पढ़ि-लिखि कए लौटल छलाह। हुनका मे जज्बा छल। अपन मुल्क कए दुनिया क सर्वश्रेष्ट मुल्क बनेबाक । दू खंड मे हुनकर आत्मकथा अछि। हमरा सब कए ओ पढ़बाक चाही। हर स्कूल क पाठ्यक्रम मे ऐहन पुस्तक अनिवार्य हेबाक चाही। ली लिखने छथि, जखन अपन देश क पुनर्निर्माण क संकल्प हुनकर मन मे जगल, त ओ भारत कए देखलथि। गांधी आ नेहरू क आभा मे अपन मुल्क कए गढ़ए चाहलाह। पर एहि ठाम आबि कए भारतक कामकाजी संस्कृति देखि निराश भेलाह। सिंगापुर क राष्ट्राध्यक्ष क रूप मे जखन ओ राष्ट्रपति भवन मे ठहरलाह, त भारतीय लोक कए केहन पाउलाह? आला नौकरशाह कोना सिंगापुर दूतावास स उम्दा शराबक बोतल क चाहत रखैत छलाह। एहिना जखन चीन मे शेंङोन क धरती पर हम पैर रखलहु, त बुझलहु जे मनुष्य क भीतर केतबा संभावना अछि। ओतहि स, 1980 मे चीन कए पलटि देनिहार देंग शियाओ पेंग दुनिया क सर्वश्रेष्ट औद्योगिक हब क नींव रखलथि। ओ सेहो बदबूदार जंगल छल। दलदल जमीन, समुद्री झाड़ी आओर मछुआ क धंधा, नहि सपना, नहि संकल्प। आइ 30 साल बाद दुनिया क विशेषज्ञ मानैत छथि जे शेंङोन चीन क ग्रोथ एक्सक्लोजन (हैरत मे द दैय वाला विकास) क कारण बनल। आब चीन ओहने एकटा आओर सेंटर ठार क रहल अछि। कोरिया क पोहांग स्टील प्लांट क सेहो एहने कथा अछि। रेत पर ठार स्टील प्लांट। ओकरा लग मे नहि आयरन ओर छल आ नहि अन्य प्राकृतिक संपदा। मुदा पोहांग स्टील प्लांट हॉर्वर्ड मैनेजमेंट स्कूल क केस स्टडी अछि। जे लोक एकरा बनेबाक सपना देखलथि, ओ दुनिया क हर कोन मे दर-दर भटकलथि। विश्व बैंक कहलक, इ परियोजना अनवायबल अछि। एकरा फाइनेंस करबा लेल दुनिया मे कियो तैयार नहि होएत। मुदा जतए सात्विक जिद अछि, ओतहि सपना साकार होइत अछि। हॉर्वर्ड मानलक कि जे बैंकर पोहांग स्टील प्लांट क प्रपोजल कए अनवायबल पेलक। ओ सही छल। मुदा ओ इ बिसरि गेल जे मनुष्य क दुनिया मे असंभव कए संभव करबाक क्षमता सेहो अछि। आब मिथिले कए ल लियए, गंगा, कोसी, गंडक स घिरल धरती। 700 साल बाद सेहो विद्यापति क रचना स सराबोर आ भिजल धरती। रामवृक्ष बेनीपुरी जी क गप मन पारी , त वैदिक काल क त्रिभुमि (तिरहुत)। पौराणिक काल क जनक क धरती। ऐतिहासिक काल क विदेह आओर लिच्छवी क प्रजातंत्र क क्रीड़ा भूमि। महावीर, गौतम बुद्ध क सघन प्रचार क जगह। एहि तरहे पूरा बिहार क बारे मे अमर्त्य सेन कए मोन पारू, त भारत कए राष्ट्रीयता क सूत्र देनिहार प्रदेश। दार्शनिक, मौलिक चिंतक आ समाजवादी किशन पटनायक क शब्द मे-एखन धरि लिखल गेल इतिहास क अनुसार बिहार लंबा समय तक भारतीय राष्ट्र क ऐतिहासिक अभ्युदय क केंद्र मे रहल। एहन क्रांति आ विद्रोह क उद्गम एहि ठाम स भेल जेकर लक्ष्य मनुष्य समाज कए उदात्त आ मानव कल्याणकारी बनेबाक छल। महावीर जैन आ गौतम बुद्ध क सघन प्रचार क इ क्षेत्र रहल, बाद मे दुनिया क सर्वश्रेष्ट सम्राट सेहो एहि ठाम भेलाहहिंदी इलाका मे हम बीमारू हालात स निकलि कए बेहतर आ श्रेष्ट बनि जाए, एकर पूरा संभावना अछि। एकरा लेल चाहि समाज क हर क्षेत्र मे श्रेष्ट आ युवा नेतृत्व। आइ जरूरत अछि जे बिहार अपन सुदूर अतीत कए देखए। चर्चिल क सुझाव क तहत, ताकि दूर भविष्य क लेल सबक भेट सकए। की छलहुं, की भ गेलहुं हम, जे चर्चा बिहार क चुनाव मे हेबाक चाही। चंद्रगुप्त मौर्य स अशोक तक क काल भारतीय इतिहास क एकटा एहन कीर्तिमान रहल, जे बिहार राज्य क हमेशा आदर्श बनल रहबाक चाही, मुदा एकर बाद बिहार फिसलि गेल। मध्यकाल या आजादी क दौरान या बाद मे बिहार क विरासत नहि बनि सकल। पुनर्जागरण क कोनो पैघ आंदोलन बिहार मे नहि भेल। समाज सुधार क अभियान नहि चलल। रामकृष्ण या विवेकानंद क आध्यात्मिक विरासत क तेज बिहार तक नहि पहुंचल। आजादी क लड़ाई क दौरान बिहार क धरती चंपारण स एकटा नव आवाज गूंजल। जे अपन समय क सबस पैघ सम्राज्य कए, जेकर राज्य मे सूर्यास्त नहि होइत छल, अस्त करि देलक. सेहो अहिंसक बाट स। सात्विक संकल्प आ कर्मठता स।

प्रभात खबर क प्रधान संपादक हरिवंश क एकटा ज्ञानवर्धक आलेख प्रभात खबर पर छपल छल, ओहि आलेखक अनुवादित आ संपादित अंश समाद पर साभार प्रस्तुत अछि।

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